गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में गीता बोलने वाले प्रभु ने अपने से अन्य किस परमेश्वर की शरण में जाने को कहा है?
जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण पुस्तक को Sant Rampal Ji Maharaj App से डाउनलोड करके पढ़ें।
#ये_है_गीता_का_ज्ञान
Tattvadarshi Sant Rampal Ji
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गीता जी अध्याय 2 श्लोक 17 में गीता ज्ञान दाता ने अपने से अन्य किसी और को अविनाशी परमात्मा कहा है।
अविनाशी तो उस परमात्मा को जान जिस का नाश करने में कोई समर्थ नहीं है जिससे यह समपूर्ण जगत व्याप्त है।
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#ये_है_गीता_का_ज्ञान अध्याय 17 श्लोक 23 में गीता ज्ञान दाता ने संकेत किया है कि इस सच्चिदानंद घन ब्रह्म अर्थात परम अक्षर ब्रह्म की भक्ति का ऊँ- तत्-सत् यह तीन मंत्र का जाप है, इसी का जाप करने का निर्देश है।
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गीताजी अध्याय 4 श्लोक 5 में गीता ज्ञान देने वाला भगवान स्वयं को जन्म मरण के अंतर्गत बता रहा है, फिर जन्म मरण से परे अविनाशी व पूजनीय पूर्ण परमात्मा कौन है?
जानने के लिए देखें साधना चैनल शाम 7:30 बजे।
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It is clearly written in Holy Gita Ji Chapter 9 Verse 25 that if you worship ghosts, you will go into the lives of ghosts and if you worship ancestors, you will go into the lives of ancestors.Then why do you perform Shraddha rituals, Pind Daan etc.?
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गीता अध्याय 7 श्लोक 16: "चतुर्विधा भजन्ते मां जनाः सुकृतिनोऽर्जुन।" गीता ज्ञान दाता कहता है कि अर्थार्थी, आर्त, जिज्ञासु और ज्ञानी मेरी भक्ति करते हैं। फिर भ��, वह अपनी भक्ति से प्राप्त होने वाली गति को अनुत्तम मानता है।
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गीता जी अध्याय 7श्लोक 16 में गीता ज्ञान दाता ने अपने से अन्य किसी और को अविनाशी परमात्मा कहा है।
अविनाशी तो उस परमात्मा को जान जिस का नाश करने में कोई समर्थ नहीं है जिससे यह समपूर्ण जगत व्याप्त है।
- Sant Rampal Ji Maharaj
#ये_है_गीता_का_ज्ञान अध्याय 17 श्लोक 23 में गीता ज्ञान दाता ने संकेत किया है कि इस सच्चिदानंद घन ब्रह्म अर्थात परम अक्षर ब्रह्म की भक्ति का ऊँ- तत्-सत् यह तीन मंत्र का जाप है, इसी का जाप करने का निर्देश है।
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गीता अध्याय 18 श्लोक 62
हे भारत! तू सब प्रकार से उस परमेश्वर की ही ���रण में जा। उस परमात्मा की कृपा से ही तू परम शांति को तथा सनातन परम धाम को प्राप्त होगा।
इस श्लोक में गीता ज्ञान दाता अपने से अन्य सर्व शक्तिमान पूर्ण परमात्मा की शरण में जाने को कह रहा है, उसकी शरण में जाने से ही पूर्ण शांति व सनातन परम धाम (सत्यलोक/अविनाशी लोक) की प्राप्ति होगी।
अधिक जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण पुस्तक को Sant Rampal Ji Maharaj App से डाउनलोड करके पढ़ें।
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गीता सार
गीता ज्ञान दाता ने संकेत किया है कि इस
सच्चिदानंद घन ब्रह्म अर्थात परम अक्षर ब्रह्म
की भक्ति का ऊँ तत् सत् यह तीन मंत्र का
जाप है, इसी का जाप करने का निर्देश है।
📚जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण पुस्तक को
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गीता अध्याय 18, श्लोक 62
“हे अर्जुन! तू सब प्रकार से उस परम ईश्वर की ही शरण में जा। उस परमपिता परमात्मा की कृपा से ही तू परम शांति और शाश्वत स्थान- सतलोक (स्थान-धाम) को प्राप्त होगा”।
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The true salvation mantra is mentioned in Gita,Chapter 17, shlok 23 which is Om Tat Sat (symbolic) which works when given by a Tatvdarshi Saint.Gayatri Mantra does not give any benefit to the seekers. It does not provide salvation.
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पूर्ण मोक्ष के लिए इन तीन देवताओं ब्रह्मा, विष्णु, महेश की शास्त्रीय साधना करनी होती है। इन तीन देवताओं की साधना करनी है लेकिन पूजा तो पूर्ण परमात्मा कबीर साहब जी की करनी है।
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गीताजी अध्याय 2 श्लोक 17 में कहा गया है कि अविनाशी तो उस परमात्मा को जानो जिस का नाश करने में कोई समर्थ नहीं है।
कौन है वो परमात्मा ? 🤔
जानने के ���िए अवश्य पढ़ें 📙
"हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण"
पुस्तक को।
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गीता जी अध्याय 2 श्लोक 17 में गीता ज्ञान दाता ने अपने से अन्य किसी और को अविनाशी परमात्मा कहा है।
अविनाशी तो उस परमात्मा को जान जिस का नाश करने में कोई समर्थ नहीं है जिससे यह समपूर्ण जगत व्याप्त है।
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गीताजी अध्याय 2 श्लोक 17 में कहा गया है कि अविनाशी तो उस परमात्मा को जानो जिस का नाश करने में को��� समर्थ नहीं है।
कौन है वो परमात्मा ?
जानने के लिए अवश्य पढ़ें 📙
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