अभी नहीं तो कभी नहीं.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ इतने खुलासे और इतने सबूतों के बाद भी उनका इस्तीफा नहीं हुआ तो आगे कुछ नहीं होने वाला है. देश की जनता अब भी अगर नहीं जागी, देश में अब भी अगर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए आंदोलन नहीं हुआ तो कब होगा ? मोदी और शाह के लाडले ज्ञानेश कुमार के जरिए लाखों लोगों के वोट की डकैती हो रही है, SIR के नाम पर खुल्लमखुल्ला बेईमानी और धांधली हो रही है,
अब भी अगर देश नहीं जागा तो कब जागेगा ? ज्ञानेश कुमार के सहयोगी दो चुनाव आयुक्तों तक ने ही चुनाव आयोग में चल रहे गोरखधंधे का भांडा फोड़ दिया और अब भी अगर ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं हुआ तो कब होगा ? शायद यही सोचकर कॉकरोच जनता पार्टी यानि सीजेपी ने आज ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है. ये वही सीजेपी वाले हैं, जिनके आंदोलन के बाद मोदी सरकार को घुटनों के बल आना पड़ा था और अपने लाडले शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा था. अब सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलने का एलान कर दिया है.
दीपिका पादुकोण ने भगवा रंग के कपड़े पहनकर एक गाने की शूटिंग कर ली थी तो ये भावना आहत गैंग बिलबिला उठा था। संस्कृति और सभ्यता खतरे में आ गई थी। वहीं, भगवा रंग का गमछा ओढ़कर या कपड़े पहनकर जब कोई बलात्कारी बलात्कार करता है, तो भाजपाइयों की संस्कृति और सभ्यता खतरे में नहीं आती है।
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"यह लोग जो बुलडोजर लिए घूम रहे हैं, ये अपने स्वजातियों पर बुलडोजर नहीं चलाते हैं, वह तालाब जमीन, घर कब्जा कर ले कोई कार्रवाई नहीं होती।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी, रायबरेली
राजकुमार भाटी बेहद शानदार और बेबाक प्रवक्ता हैं। डिबेट के दौरान वे अपनी बात तथ्यों और तर्कों के साथ रखते हैं...वो कह रहें है कि "भारत के कई न्यूज़ चैनलों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को एक ‘महामानव’ के रूप में पेश करने की कोशिश किए जाने की आलोचना होती रही है।
लेकिन आज सवाल यह है कि क्या दर्शक इन चैनलों की हर बात पर पहले की तरह भरोसा करते हैं?"
"मीडिया की विश्वसनीयता जनता के विश्वास से तय होती है, और यही वजह है कि आज न्यूज़ चैनलों की भूमिका, निष्पक्षता और पत्रकारिता के तौर-तरीकों पर लगातार बहस हो रही है।"
जिस प्रकार का खुलासा चुनाव आयोग के संदर्भ में एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी समाचार पत्र में हुआ है यह खुलासा बहुत बड़ी चुनावी बेईमानी स्पष्ट दर्शा रहा है
भाजपा के इशारे पर संविधान और लोकतंत्र तथा कानून विरोधी कार्य कर रहे अधिकारी ये जान लें कि पापकर्म और बेईमानी का घड़ा एक दिन अवश्य भरता है और जब फूटता है तो बहुत बुरी सजा मिलती है
भाजपा जो कि ताकत, पैसे का इस्तेमाल करके अधिकारियों से गलत काम करवाती है वो भाजपा भी अंत में अधिकारियों को फंसवा कर भाग खड़ी होती है
अतः बेईमानी और संविधान विरोधी कार्य कोई अफसर ना करे ये सलाह है क्योंकि जब हिसाब किताब होगा तो न्याय और संविधान तथा कानून अनुसार सजा मिलेगी और कोई भाजपाई बचाने नहीं आएगा
इससे क्या होगा? वो लोग बड़ी आसानी से उसको हटा देंगे और उसकी जगह वहां दूसरा कोई RSS का आदमी लाकर बैठा देंगे!
जैसे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ था उसकी जगह जो दूसरा मंत्री बनाया गया है उसने कौन से झंडे गाड़ दिए वो तो रेपिस्टों का समर्थक है!