अस्थायी नर्सेज साथियों का संघर्ष गंभीर एवं संवेदनशील है। सरकार से अपील है क�� वार्ता के माध्यम से शीघ्र समाधान निकाला जाए और 1965 नियमों यो यथावत रखते हुए स्वास्थ्य संवर्गों की भर्ती मेरिट+बोनस से जारी हों।लोकतंत्र में संवाद ही सबसे सशक्त मार्ग है। @RajCMO @bh
लश्कर भी तुम्हारा है सरदार तुम्हारा है
तुम झूठ को सच लिख दो अखबार तुम्हारा है।
इस दौर के फरियादी जायें तो कहां जायें,
कानून तुम्हारा है दरबार तुम्हारा है।
सूरज की तपन तुमसे बर्दाश्त नहीं होती,
इक मोम के पुतले सा किरदार तुम्हारा है।
"भ्रम" "अखबार"
@RajPara2026
हम राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp माननीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री@GajendraKhimsar से विनम्र आग��रह करते हैं कि प्रदेश के हजारों बेरोज़गार पैरामेडिकल युवाओं की आवाज़ सुनें तथा नियमानुसार शीघ्र भर्ती का नोटिफिकेशन जारी करें।
@RajCMO @RajPara2026
विगत रविवार श्री HM sir से नई पैरामेडिकल भर्ती–2026 को लेकर सकारात्मक एवं सार्थक मुलाकात हुई।
भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू करके बेरोजगार पैरामेडिकल अभ्यर्थियों को रोजगार देने पर विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री महोदय ने सकारात्मक प्रयासों का आश्वासन दिया। @GajendraKhimsar@RajCMO
जयपुर SMSअस्पताल के महिला अस्पताल ICU में कार्यरत निविदा नर्सेज कार्मिक श्री दीपक खारवाल के निधन(सुसाइड)का समाचार अत्यंत दुखद है।इस कठिन समय में पैरामेडिकल संवर्ग,दुखी परिवार के साथ खड़ा है। रा��स्थान सरकार से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच एवं दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हैं।
@BhajanlalBjp@RajCMO@GajendraKhimsar
नीट
रीट
SI
कृषि लेक्चरर
इतनों के पेपर लीक
तो फिर पेपर किसके लिए ?
योग्य तो यहाँ भी अधूरी आश के साथ
फिर मेरिट बोनस में क्या दिक्कत?
कम से कम साफ सुथरी मेरिट तो दिखेगी
और योग्य को न्याय भी मिलेगा
माननीय चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खीमसर जी,
चिकित्सा विभाग द्वारा 1965 के नियमों में संशोधन की जो फाइल वर्तमान में चल रही है, उसे 'नॉन-फिजिकल' की श्रेणी में डालकर निरस्त करने की ���हमति प्रदान करें। यही संविदा और निविदा कर्मचारियों के हित में सबसे बड़ा फैसला होगा।
हम न तो नए नियम चाहते हैं और न ही वर्तमान नियमों में कोई संशोधन। स्वास्थ्य विभाग की जो लंबे समय से चली आ रही परंपराएं और व्यवस्थाएं हैं, उनके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ हमें स्वीकार्य नहीं है। विभाग की गरिमा और परंपरा को बनाए रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। @RajCMO
@GajendraKhimsar
#NoAmendmentIn1965Rules
#anuragnehra
प्रदेश के समस्त लैब टेक्नीशियन कर्मचारियों को विश्व लैब टेक्नीशियन दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। चिकित्सा विभाग में लैब टेक्नीशियन मरीजों की समस्त जांचों की जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे है जो कि इलाज ���ा मुख्य आधार है।
राजस्थान के स्वास्थ्य संस्थानों में लैब की जांच से जुड़े कार्यों को हब एंड मॉडल के तहत निजी कम्पनियों को देने का निर्णय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण व जनविरोधी है | यह निर्णय न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को ��्रभावित करेगा बल्कि मरीजों, मेडिकल छात्रों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए गंभीर संकट खड़ा करेगा | निजी कम्पनियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए ऐसे निर्णय से मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर, इंटर्न, नर्सिंग स्टूडेंट्स और पैरामेडिकल स्टाफ की पढ़ाई और प्रशिक्षण पर सीधा असर पड़ेगा,मरीजों को जांच और इलाज के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा वहीं इमरजेंसी सेवाओं में देरी जानलेवा साबित हो सकती है साथ ही बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने की मजबूरी से आम जनता की तकलीफ बढ़ेगी। उदाहरण के तौर पर बताऊं तो थैलेसीमिया जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को समय पर जांच और उपचार नहीं मिल पाएगा वहीं वर्षों से अल्प वेतन पर संविदा पर जो लोग कार्य कर रहे थे उन्हें उम्मीद थी कि क��ी न कभी सरकार उनके साथ न्याय करेगी और वर्षों की मेहनत का उन्हें सकारात्मक फल मिलेगा मगर सरकार के ऐसे तुगलकी फरमान ने पहले से संविदा पर लगे कार्मिकों के भविष्य पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया | मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp को कहना चाहता हूं कि ऐसे निर्णय की तत्काल उच्च स्तरीय समीक्षा करके हब एंड मॉडल के तहत निजी कम्पनियों को दिए गए कार्य पर रोक लगाए | चिकित्सा क्षेत्र में ऐसे महत्वपूर्ण कार्य में निजीकरण को बढ़ावा देना प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए शुभ संकेत नहीं है |
@RajCMO
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी,आपका ध्यान राजस्थान राज्य की अत्यंत चिंताजनक एवं बदहाल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। वर्तमान में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग “वेंटिलेटर” पर है, जहाँ आम जनता को बुनियादी उपचार भी समुचित रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर स्वा���्थ्य सेवाओं में सुधार करने के बजाय अपने निजी व्यवसायों को बढ़ाने में अधिक ध्यान दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त, एक निजी डायग्नॉस्टिक कंपनी को सरकारी अस्पतालों में लैब जांच का कार्य सौंपा गया है, ज��� कथित रूप से स्वास्थ्य मंत्री के करीबी व्यक्ति से जुड़ी हुई है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में निजी लैब द्वारा की जा रही कई गंभीर अनियमितताएँ सामने आ रही हैं ,बिना सैंपल जांच किए ही रिपोर्ट जारी की जा रही हैं,स्वस्थ व्यक्तियों को थायराइड एवं कैंसर जैसे गंभीर रोगों से ग्रसित बताया जा रहा है और इन घटनाओं से संबंधित समाचार प्रतिदिन समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रहे हैं। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ है, जो आपराधिक श्रेणी में आता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से यह प्रश्न है कि इस निजी लैब को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है? गलत रिपोर्टों के कारण जिन मरीजों के जीवन पर खतरा उत्पन्न हो रहा है, उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? यह मामला केवल जांच का नहीं, बल्कि आपराधिक लापरवाही का है, और राजस्थान की जनता शासन से जवाब मांग रही है। जिस स्वास्थ्य मंत्री से पूरा राजस्थान अपेक्षा रखता है,उनके खुद के गृह जिले नागौर की स्वास्थ्य सेवाएँ ��ी अत्यंत दयनीय स्थिति में हैं,चिकित्सकों की कमी, खराब एवं बंद मशीनें तथा व्यापक अव्यवस्थाएँ यह दर्शाती हैं कि वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति अत्यंत कमजोर है। सरकारी अस्पतालों के हालत देखते हुए मैं यह कहना चाहता हूं कि राजस्थान को ऐसे नाकारा और गैर जिम्मेदार स्वास्थ्य मंत्री की कोई जरूरत नहीं है जिन्हें अपने महकमे में धरातल से जुड़ी कोई जानकारी तक नहीं है | प्रधानमंत्री जी को इस स्���िति पर त्वरित संज्ञान लेकर एक कड़ा संदेश गैर - जिम्मेदार मंत्रियों को देना चाहिए ताकि राजस्थान में स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण महकमे का जिम्मा संभाल रहे व्यक्ति को कड़ा सबक मिले और जनता को सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर लाभ मिल सकें | सरकार द्वारा लैब से जुड़ा कार्य निजी कंपनी को देने से वर्षों से अल्प वेतन पर कार्य कर रहे संविदा कार्मिकों / प्लेसमेंट कार्मिकों की आजीविका पर भी संकट आ गया | मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा को पुनः कहना चाहता हूं कि आपको विगत दस दिनो में राज्य के विभिन्न जिलों में प्राइवेट लैब को जांचों का कार्य देने से क्या स्थिति बनी ? उसकी उच्च स्तरीय समीक्षा करनी ��ाहिए क्योंकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अपनी जवाबदेही के प्रति लापरवाह है और उन्हें इस महकमे से जुड़ी धरातल की कोई जानकारी भी नहीं है |
@PMOIndia @RajCMO