बड़ी खबर GIVA कंपनी ने रक्षा बंधन पर आप कृति सेनन का विवादित विज्ञापन वापस लिया।
लेकिन देखिए हिंदुओं के खिलाफ कितना जहर भरा है भारत के विपक्षी नेताओं में।
यह पूरा विवाद महिला क्या कपड़े पहने, क्या नहीं इसका है ही नहीं। कृति सेनन हों या कोई और महिला वो ब्रालेट पहन कर घूमें फिरें किसी को कोई तकलीफ नहीं। लेकिन रक्षा बंधन भाई बहन का पवित्र पर्व है, उस दिन कौन लड़की ब्रालेट पहन कर भाई को राखी बांधती है ? हमने तो आज तक नहीं देखा ! पर जब इसका विरोध हुआ तो राहुल गांधी, सुप्रिया श्रीनेत और वोक फेमिनिस्ट इसमें कूद पड़े इस बेहूदापंती का समर्थन करने।
जो लोग इसका समर्थन कर रहे हैं वो क्या ईद का विज्ञापन बिकनी में होगा तो इसका समर्थन करेंगे ? यहां विरोध बिकनी का नहीं, किस मौके पर बिकनी पहनी गई इसका है। कृति सेनन कुछ भी पहनें किसी को फर्क नहीं पड़ता, लेकिन फेमिनिज्म का ज्ञान सिर्फ रक्षा बंधन पर ही आता है, ईद पर नहीं।
सवाल कपड़ों का नहीं, सवाल त्योहारों को नीचा दिखाने की सोच का है. कृति सेनन विज्ञापन विवाद में Giva ने भले ही उस विज्ञापन को हटा दिया हो लेकिन विज्ञापन को लेकर कई सारे सवाल भी पीछे छूट गए हैं. राखी से पहले भाई बहन के त्योहार का मजाक, दीपावली से पहले पर्यावरण और प्रदूषण के नाम पर हल्ला-गुल्ला, होली से पहले पानी बचाओ की रट और सोशल मीडिया कैंपेन, यही बात है जो तमाम लोगों को सालती है. मैं लिबरल और सेक्युलर ब्रिगेड से पूछना चाहता हूं कि क्या वो अंतिम संस्कार या मय्यत के कपड़े पहनकर किसी शादी में जाएंगे? इसका सीधा-सीधा जवाब कोई नहीं देता. क्योंकि पता है सच बोलेंगे तो फंसेंगे, इसी लिए 'My Body My Choice' का नारा दिया जाता है. इस सोच में बुराई नहीं है लेकिन अगर ये सोच सिर्फ सनातन धर्म को नीचा दिखाने तक सीमित है तो मुझे इस पर कड़ी आपत्ति है.
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@kritisanon@KanganaTeam
अरविंद केजरीवाल जी, गुजरात को छोड़िए। पहले दिल्ली के उन सरकारी स्कूलों का हिसाब दीजिए, जिनका आपकी AAP सरकार ने बड़े-बड़े विज्ञापनों के साथ उद्घाटन किया था।
2020 में आपके द्वारा खुद उद्घाटन किए गए एक स्कूल की इमारत कुछ ही वर्षों में “खतरनाक” घोषित करनी पड़ी। बच्चों के पास स्लैब गिरने की घटनाएँ, सीलन, दरारें, गैप और पक्के लैंटर की जगह कमजोर सिल्लियों वाली छत - यही है आपकी तथाकथित “दिल्ली शिक्षा क्रांति”!
और यह कोई अकेला मामला नहीं है। ऐसे कई स्कूलों की बदहाली सामने आ रही है।
स्कूलों की गुणवत्ता फ्रंट-पेज विज्ञापनों से नहीं, बल्कि कक्षाओं और इमारतों की वास्तविक स्थिति से तय होती है।
और भ्रष्टाचार की बात करनी ही है, तो आपकी पुरानी सहयोगी स्वाति मालीवाल खुद आपकी सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा चुकी हैं।
इसलिए गुजरात पर सवाल उठाने से पहले दिल्ली के स्कूलों का हिसाब दीजिए।
पहले दिल्ली के स्कूलों का हिसाब, फिर गुजरात पर सवाल।
राहुल गांधी बार-बार 'मनुस्मृति' का आधा सच बताकर हिंदुओं को निशाना बनाते हैं।
वो यह क्यों भूल जाते हैं कि इसी में 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते...' (जहां नारी का सम्मान, वहां देवता) भी लिखा है?
आखिर सनातन धर्म से ही इतनी नफरत क्यों?
This man single-handedly decimated Congress in Assam with his verbal diarrhoea and Fake Hit job.
BJP need more Mani Shankars and Pawan Kheras in upcoming elections.
इतने ज्वार-भाटे के मध्य इस स्टेडियम की रूपरेखा देख कर आनंद होता है! दर्शकदीर्घा की चंद्राकार छत, त्रिशूलाकार फ्लडलाइट और डमरूरूपी पैवेलियन!
हर हर महादेव! जय काशी!
कांग्रेस के सीनियर नेता पूर्व सांसद राशिद अल्वी:-
नरेंद्र मोदी चंद्रमा के किसी बिंदु का नाम शिव शक्ति या तिरंगा कैसे रख सकते हैं ? क्या नरेंद्र मोदी चंद्रमा के मालिक हैं ?
एंकर :- लेकिन जब कांग्रेस राज के दौरान चंद्रयान-1 जहां लैंड हुआ था उसका भी तो नाम आप लोगों ने जवाहर पॉइंट रखा था
राशिद अल्वी:- देखिए जवाहरलाल नेहरू से किसी के नाम की न शिवशक्ति की न तिरंगा की तुलना हो सकती है जवाहरलाल नेहरू शिव शक्ति और तिरंगा दोनों से महान है
इसीलिए कांग्रेसियों को कुत्ता कहा जाता है