कल के आंदोलन में शामिल होने के लिए ध्रुव राठी का आगमन दिल्ली में हो चुका है.
इंडिया गेट से थोड़ी दूरी पर खड़ा होकर ध्रुव राठी बोलता है कल आंदोलन है इसलिए सरकार ने 50 से ज्यादा मेट्रो स्टेशन को बंद करने का एलान क���या है.
ध्रुव राठी वीडियो में बोल रहे हैं सरकार हमसे और हमारे आंदोलन से डर गयी है इसलिए दिल्ली में लॉक डाउन जैसी स्थिति बना रही है.
ध्रुव राठी अक्सर सोशल मीडिया पर भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध मुखर आवाज माने जाते हैं.
ध्रुव राठी से केवल एक शिकायत है उनको जन नायक केवल राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल में नजर आता है. बहन मायावती जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और हेमंत सोरे��� में उन्हें कोई जन नायक नजर नही आता.
ध्रुव राठी लिबरल और सेक्युलर कोबरा विचारधारा वालों के पसंदीदा आदमी हैं.
बैंगलुरु में चल रहा CJP का एन्टी-SIR प्रोटेस्ट में ध्रुव राठी ने दमदार भाषण दिया.
युवाओं को संबोधित करते हुए ध्रुव राठी ने कहा, एलन मस्क या जॉ��्ज सोरस ने फण्ड नही किया है, मैं यहां खुद के पैसे से आया हूँ,
नरेंद्र मोदी सोच रहे होंगे कि इस आदमी को मुझसे क्या दिक्कत है. ध्रुव राठी ने आगे कहा,
असल में दिक्कत पूरी जनता को है
असल मे दिक्कत पूरे देश को है
ध्रुव राठी ने अपील की SIR का मामला किसी पार्टी का नही है. इसमें BJP के समर्थकों को भी खुलकर आगे आकर विरोध करना चाहिए.
सुबह से सोशल मीडिया पर नेहा बोरा का प्रदर्शन करते हुए एक वीडियो वायरल किया गया है.
नेहा बोरा बैरिकेडिंग के ऊपर चढ़कर आंदोलन कर रही हैं. उनका पूरा ध्यान प्रदर्शन पर है,
लेकिन कुछ टपोरियों का ध्यान उनके शरीर के अंगों पर जा रहा है.
इस तरह के वीडियो को 50,000 से ज्यादा बुकमार्क किया लोगों ने. करोड़ों लोग देख चुके हैं. 20-25 अकाउंट्स मिलियन व्यूज ले चुके हैं.
नेहा बोरा को रविवार को आंदोलन के समय काफी चोट लगी थी. आज सुबह के प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके हाथों में चोट का एक निशान साफ साफ नजर आ रहा है.
प्रेस कॉ���्फ्रेंस के वीडियो को 50,000 बुकमार्क नही किया गया. लाखों लोगों ने शेयर भी नही किया. चमड़ी चोरों से कहना चाहता हूँ नेहा बोरा शरीर नही, क्रांतिकारी महिला है.
यह देखो जर्मनी से कौन आया है. Dhruv Rathee आया है.
वीडियो में अभिजीत दीपके, प्रकाश राज, मोहम्मद जुबेर और ध्रुव राठी समेत CJP के अन्य नेता नजर आ रहे हैं.
दिल्ली और मुंबई के बाद कल बैंगलोर में प्रोटेस्ट है.
बैंगलोर के प्रोटेस्ट में शामिल होने के लिए Dhruv Rathee जर्मनी से आए हैं.
भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस के खिलाफ Dhruv Rathee सोशल मीडिया पर सबसे बड़ी आवाज हैं.
नेहा बोरा को कुछ नही होगा. दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा को छोड़ दिया है.
नेहा बोरा के सुरक्षा की जिम्मेदारी भी दिल्ली पुलिस की है.
नेहा बोरा जंतर मंतर 2.0 आंदोलन को एन्जॉय कर रही हैं.
उन्हें किसी का डर नही है. क्यों कि वो कोई आम लड़की नही हैं. एक बड़े वामपंथी संगठन की लीडर हैं. वृंदा करात का सहयोग है.
नेहा बोरा को जनता और युवाओं का भी जन समर्थन मिल रहा है. इसी कारण उनके मन में सरकार या पुलिस का डर नही है.
जब कोई व्यक्ति किसी लॉबी या सिस्टम का हिस्सा बन जाता है तो उसके लिए ज्यादा चिंता और दुबला होने की जरूरत नही है.
नेहा एक परिपक्व, संघर्षशील और स्पष्ट विचारधारा वाली लड़की है। भारत की हर लड़की को अपने अधिकारों के प्रति ऐसे ही जागरूक, तर्कशील और अपने विचारों पर मजबूती से खड़ा होना चाहिए।
जंतर मंतर 1.0 का क्रेडिट कॉकरोच जनता पार्टी के ���िस्से में गया था.
सोनम वांगचुक ने जब अपना अनशन खत्म कर लिया और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से पीछे हट गए, तब
अभिजीत दीपके और उनकी टीम आख़री तक धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी रही.
इस बार अगर ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हुआ तो जंतर मंतर 2.0 का सबसे बड़ा क्रेडिट नेहा बोरा को मिलेगा.
काफी चोटिल होने के बावजूद दिल्ली ही हीट में वो आंदोलन को लीड कर रही है. युवा तबका नेताओं से ज्यादा अभिजीत दीपके और नेहा बोरा का संघर्ष देखकर इस शांतिपूर्ण ढंग से चलने वाले आंदोलन से जुड़ रहा है.
डीसीपी सचिन शर्मा मेरे पास प्रेस कार्ड है.
डीसीपी सचिन शर्मा मेरे पास प्रेस कार्ड है.
ड���सीपी सचिन शर्मा मेरे पास प्रेस कार्ड है.
स्वतंत्र पत्रकार हर्ष यादव यह कहते हुए बार बार चिल्ला रहा था. पहले तो न्यूज़ देखकर मुझे लगा कोई फ़िल्म की शूटिंग चल रही शायद.
आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच आखिर इतना कोई जोर जोर से क्यों चिल्ला रहा है.
हर्ष यादव इंडिपेंडेंट जॉर्नलिस्ट हैं, सुबह से आज के आंदोलन को कवर रहे हैं. दिल्ली पुलिस के एक बड़े अधिकारी ने भूल से इन्हें आंदोलनकारी समझकर बस में ब���ठाने लगे.
हर्ष यादव के अनुसार उन्होंने बार बार पुलिस को बताया वो एक पत्रकार हैं. इसके बावजूद उन्हें बस में बिठाया जा रहा था. तब हर्ष यादव ने अपना प्रेस कार्ड निकालकर चिल्लाना शुरू किया. उसके बाद उन्हें जाने दिया गया और साथी पत्रकार हर्ष यादव को घटनास्थल से दूर ले गए.
पुलिस को भी चाहिए आंदोलनकारी और पत्रकार के बीच अंतर किया जाए. जैसे पुलिस अपना काम कर रही है, उसी तरह पत्रकार भी अपना काम कर रहे हैं. लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी को खबर दिखाने या रिपोर्टिंग करने पर रोका नही जा सकता.
आम आदमी पार्टी में मेरे पसंदीदा नेता संजय सिंह हैं.
फ़िल्म इंडस्ट्री में जो स्थान सनी देओल की ताकत और आवाज का है, राजनीति में वो स्थान संजय सिंह का है.
आज संजय सिंह ने गर्दा उड़ा दिया. दिल्ली पुलिस ने एक सब इंस्पेक्टर ने उन्हें जंतर मंतर की ओर जाने से रोका.
संजय सिंह ने कहा, क्या आप एक MP को Parliament में जाने से रोकोगे और क्या एक सांसद जंतर मंतर पर आंदोलन करने नही जा सकता.
संजय सिंह जंतर मंतर की ओर कूच कर गए. रास्ते में उन्हें रोकने के लिए दिल्ली पुलिस को भारी पुलिस बल लगाना पड़ा. संजय सिंह को डिटेन करने में पुलिस के पसीने छूट गए.
संजय सिंह ने कहा दो अक्टूबर को बापू की जयंती पर लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है. सरकार और पुलिस शांतिपूर्ण तरीके से आन्दोल भी करने नही दे रही है. यह आंदोलन यह भीड़ चीफ इलेक्शन कमिश्नर के लिए किसी बुरी खबर से कम नही है. अब तो इस्तीफा होकर रहेगा.
दिल्ली पुलिस और मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली में साफ अंतर आज नजर आया.
जहां एक तरफ दिल्ली पुलिस किसी आम आदमी को भी जंतर मंतर के आसपास खड़े होने नही दे रही है.
वहीं मुंबई पुलिस ने ज्ञानेश क���मार के खिलाफ CJP के आंदोलन को रोकने की कोशिश नही की. मैदान में नही, सड़क पर बड़ा आंदोलन खड़ा करने में अभिजीत दीपके और उनकी टीम कामयाब रही.
CJP के आंदोलन को नसीरुद्दीन शाह और म्यूजिक डायरेक्टर विशाल ददलानी ने समर्थन दिया. अगर नसीरुद्दीन शाह और विशाल ददलानी दिल्ली गए होते जंतर मंतर पर तो पुलिस दोनों को डिटेन कर लेती.
मुंबई पुलिस ने दिल्ली पुलिस की तरह बर्बरता नही बरती. इसका श्रेय शिवाजी पार्क पुल���स स्टेशन के चीफ सीनियर इंस्पेक्टर प्रमोद गोरक्ष पवार, ACP प्रवीण तेजाले, DCP Zone-3 महेंद्र पंडित और मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती.
ने���ा बोरा किसी पार्टी की विधायक नही है.
नेहा बोरा किसी पार्टी की सांसद नही है.
नेहा बोरा किसी बड़े राजनीतिक पद पर नही है.
इसके बावजूद नेहा बोरा राजनीति में सबसे बड़ी आवाज बनते जा रही हैं.
SIR कांड और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सबसे बड़ी आवाज नेहा बोरा बनकर उभरी हैं. नेहा ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की है.
नेहा बोरा किसी राजनीतिक विचारधारा की प्रतीक नही, वो स्टूडेंट राजनीति की प्रतीक हैं. नेहा बोरा को कांग्रेस पार्टी के टिकट से 2029 का लोकसभा चुनाव ल���़ना चाहिए.
नेहा बोरा जैसी युवा महिला नेता कांग्रेस पार्टी से जुड़ेगी तो इससे पार्टी को काफी फायदा होगा.
प्रधानमंत्री वही बनेगा इस देश में जिसके साथ उद्योगपति, मीडिया और जनता तीनों होंगे.
OBC SC ST समाज का PM बनने के लिए अभी 100 साल लगेंगे.
जब तक OBC SC ST समाज से कोई अडानी अंबानी जैसा उद्योगपति नही बनता बहुजन समाज से किसी का PM बनना मुश्किल है.
मीडिया भी अब पत्रकार नही, उद्योगपति ही कंट्रोल करते हैं.
OBC SC ST समाज को नौकरी के अलावा बिजनेस में भी ध्यान देना चाहिए. 4 ट्रिलिय�� की अर्थव्यवस्था में 80% अर्थव्यवस्था पर बहुजनों का आधिपत्य होना चाहिए.
#WamanMeshram
परीक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं के कारण देशभर में अनेक विद्यार्थियों के भविष्य और मानसिक तनाव को लेकर गंभीर चिंताएँ सामने आ रही हैं। एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदायों के विद्यार्थियों के लिए पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।
इन्हीं मुद्दो��� को लेकर भारतीय विद्यार्थी मोर्चा द्वारा “ईवीएम हटाओ, शिक्षा ��चाओ” अभियान के अंतर्गत प्रदेशव्यापी आक्रोश महामोर्चा आयोजित किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से पेपर लीक, परीक्षा में पारदर्शिता, विद्यार्थियों के अधिकार तथा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाया जाएगा।
सभी संबंधित कार्यकर्ताओं और विद्यार्थियों से अपील है कि वे कार्यक्रम की जानकारी को शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ और निर्धारित कार्यक्रम में भाग लें।
Bamcef Org. II Bharat Mukti Morcha II Bhartiya Vidyarthi Morcha