बाबासाहेब अंबेडकर जी ज्ञान, समानता और न्याय के प्रतीक उन्होंने हमें सिर्फ संविधान नहीं दिया बल्कि शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करों का भी मार्ग दिखाया है...!
- ग्लोबल अंबेडकराईट फोरम
बाबासाहेब अंबेडकर जी द्वारा लिखा संविधान सिर्फ़ एक किताब नहीं जीने का तरीक़ा है स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व ही असली इंडिया हमारे देश के हर नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन का हक़ है...!
- ग्लोबल अंबेडकराईट फोरम
जिसने हमें सिर्फ संविधान नहीं बल्कि सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिया बाबासाहेब अंबेडकर जी का जीवन ज्ञान, संघर्ष और समानता की प्रेरणा है उनके विचारों को जानिए, समझिए और आगे बढ़ाइए...!
- ग्लोबल अंबेडकराईट फोरम
Equality, Dignity aur Social transformation therefore do not measure Ambedkarism by your own limited Standards it is not merely a concept of Liberation for a Single identity but for the Entirety of Humanity.
- Global Ambedkarite Forum
Ambedkarite cannot be Confined to a single Political Party restricted to a specific Caste or Bound within a particular region Ambedkarism is a Liberation-Oriented philosophy that stands against Injustice and Advocates for
बिना उनके भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन केवल "Agitation for Transfer of Power" रहता जबकि उनकी वजह से यह "Agitation for Independence" हों पाया उनको व सभी महान स्वतंत्रता सैनानियों और अमर शहीदों को नमन है...!
- ग्लोबल अंबेडकराईट फोरम
संविधान निर्माता बाबासाहेब अंबेडकर जी को अगर भारतीय इतिहास से हटा देंगे तो क्या होगा इसका उत्तर यह कि जो "Agitation for Independence" हुआ उसमें से "Independence" शब्द भारतीय इतिहासकारों को हटाना पड़ेगा क्योंकि
अंबेडकर जी सामाजिक लड़ाई पैरेरल रूपसे "Transfer of Power" के साथ लड़ते रहे उन्होंने सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक को "Independence" होने का एहसास दिलवाया इसलिए यह कहना उचित कि
राजा ही अंग्रेज सरकार के साथ मिलकर अपने बंगले और जमींदारी बचाने ��ें कामयाब रहे आज सत्ता के वही दलाल लोग मतलब मुगलों के मातहत और ब्रिटिशों के सहयोगी हमारे बहुजन समाज को देशभक्ति का पाठ पड़ा रहे है...!
- ग्लोबल अंबेडकराईट फोरम
तीन कालों का सत्ता संघर्ष या परिवर्तन वैसे मध्यकाल से पूर्व सत्ता संघर्ष में जीते हुए समूह ने हारे हुए समूह को पूरी तरह कुचल दिया जिससे कि भविष्य में हारा हुआ समूह दुबारा मुँह ना उठा सके यही कारण रहा ��ै इस दौर की अधिकतर जातियां आज दलित-आदिवासी और पिछड़े वर्ग में शामिल
देश में अंग्रेजों के आगमन से मानी जाती है इस दौर में उन्होंने हारे हुए पूर्व के र��जाओं के सहयोग से ही मुगलकाल को उखाड़ फेंका 1857 के संग्राम को दबाने में उन राजाओं नेही ब्रिटिश साम्राज्य का साथ दिया है इस संग्राम के दमन के साथ ही मुग़ल शासन ख़त्म हों गया