Teachers Federation of India से सम्बद्ध संगठन प्राथमिक शिक्षक मण्डल गुजरात द्वारा सूरत में आयोजित अधिवेशन की अध्यक्षता की एवं #NoTetBeforeRteAct#Only_OPS तथा #OneNationOnePayFixation जैसे महत्त्व पूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की ।अधिवेशन के मुख्य अतिथि मा श्री सी आर पाटिल केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री रहे ।
टीएफआई के उपाध्यक्ष एवं प्राथमिक शिक्षक मण्डल के प्रमुख श्री राहुल अंकुश गव्हाने जी एवं उनकी टीम को अधिवेशन की सफलता हेतु हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ।
@TFI4India
#NoTetBeforeRteAct
माननीय श्री राजनाथ सिंह जी रक्षा मन्त्री भारत सरकार से भेंट करके टेट के प्रकरण पर विस्तृत जानकारी दी ।माननीय जी को वार्ता के दौरान स्मरण कराया कि जब वर्ष 1998 में उत्तर प्रदेश के शिक्षकों की 36 दिन की हड़ताल और 167 शिक्षकों की सेवा समाप्ति के बाद भी जिस समस्या का समाधान नहीं हुआ था,उसका समाधान आपने उत्तर प्रदेश में अपने मुख्य मंत्रित्व काल में किया था,जिसके चलते आज उत्तर प्रदेश के शिक्षक केन्द्र के समान वेतनमान लेते हैं ।
आज भी प्रधानमन्त्री जी के नेतृत्व में संसद द्वारा क़ानून पारित करा कर,आरटीई लागू होने से पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता सम्बन्धी अन्याय को समाप्त किया जा सकता ह��� ।देश के शिक्षकों को आप पर पूर्ण विश्वास है ।मेरे साथ teachers federation of india के उपाध्यक्ष श्री राधेरमण त्रिपाठी जी भी वार्ता में उपस्थित रहे ।
#NoTetBeforeRteAct
TET की अनिवार्यता समाप्त करने हेतु आरटीई में संशोधन सम्बन्धित ज्ञापन मा उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक जी को दिया गया ।@brajeshpathakup
#बिना_परीक्षा_माननीय_सुप्रीम_कोर्ट_में5_नये_जज_नियुक्त
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक्षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेक�� बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों ��ाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे कि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
@narendramodi
@AmitShah
@rajnathsingh
@RahulGandhi
@dpradhanbjp
@myogiadityanath
गत 10 वर्षों से कतिपय ऐसे लोग जो कोर्ट में टेट और नॉन टेट के मुक़दमे करके पदोन्नति फँसाये हुए हैं वे लोग 1 सितम्बर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद से ही अपने मनसूबे पूरे होते देख रहे हैं ।रिव्यू स्वीकार होने पर यही लोग कह रहे थे कि सेवा में बने रहने के लिए टेट से छूट मिलेगी लेकिन पद��न्नति में नहीं मिलेगी,13 की सुनवाई के बाद इनके सुर बदल गए और अब व्याख्या कर रहे हैं कि सेवा में बने रहने के लिए टेट करना होगा ।
राइट टू एजुकेशन एक्ट, 2009 बन���े के बाद से लेकर आज तक मूल अधिनियम हो या उसके बाद के संशोधन — कहीं भी “Teacher Eligibility Test (TET)” शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। हर जगह केवल “Minimum Qualification / न्यूनतम अर्हता” शब्द का प्रयोग हुआ है।
RTE Act की धारा 23(1) के अंतर्गत केंद्र सरकार ने NCTE को Academic Authority बनाया। इसके बाद NCTE ने 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना द्वारा पहली बार TET को “Minimum Qualification” का हिस्सा बनाया।
NCTE ने अपने राजपत्र में स्पष्ट किया कि—
• 23 अगस्त 2010 के बाद होने वाली नियुक्तियों की न्यूनतम अर्हता “with TET” होगी।
• 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त/कार्यरत शिक्षकों की न्यूनतम अर्हता “without TET” मानी जाएगी।
बाद में 2017 के संशोधन में यह कहा गया कि 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत शिक्षकों को Section 23(1) के अंतर्गत निर्धारित न्यूनतम अर्हता प्राप्त करनी होगी। अब यदि कोई शिक्षक 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त है, तो उसकी निर्धारित न्यूनतम अर्हता वही होगी जो उस सम�� लागू थी, अर्थात without TET।
जिस एनसीटीई को TET लागू करने की शक्ति है तो क्या उसे परिस्थितियों के अनुसार relaxation देने की शक्ति नहीं है? यह विषय अभी भी न्यायिक व्याख्या के अधीन है और आवश्यकता पड़ने पर पुनः न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।
यदि आरटीई में कहीं टेट प्रयोग हुआ है तो उपलब्ध करायें ।चाहे सुप्रीम कोर्ट से हो या संसद से एनसीटीई के राजपत्र 23अगस्त 2010 से टेट आया है उसी के आधार पर mimimum qualification decide होगी ।
श्री सुरेश कुमार त्रिपाठी जी निवर्तमान एम एल सी एवं प्रान्तीय संयोजक उ प्र शिक्षक ���हासंघ के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित रहकर कार्यक्रम को संबोधित किया ।कार्यक्रम में प्रोफ़ेसर के बी पांडेय पूर्व अध्यक्ष लोक सेवा आयोग,डॉ वी के सिंह ज���ला पंचायत अध्यक्ष प्रयागराज,प्रो गिरीश चंद्र त्रिपाठी पूर्व कुलपति बी एच यू,श्री अमरेन्द्र नाथ सिंह पूर्व अध्यक्ष बार एसोसिएशन इलाहाबाद उच्च न्यायालय,श्री के बी तिवारी अध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ प्रयागराज,श्री आर एस वर्मा सेवा निवृत्त आई ए एस,श्री देवेन्द्र श्रीवास्तव राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव टीएफआई एवं जिला अध्यक्ष प्रयागराज श्री अनुज पांडेय जिलाध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ प्रय��गराज सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे
माननीय मुख्यमंत्री जी के इस वक्तव्य से तमाम शिक्षकों को राहत मिलेगी ।मुख्यमंत्री जी ने जमीनी हकीकत को देख��� और जाना है ।हमआपके आभारी हैं 🙏
@myogiadityanath
@CMOfficeUP
@TFI4India
@UPPSS1921
@grok कृपया यह बताएँ कि माननीय Supreme court ke न्यायाधीश shri Deepanker Datta जी द्वारा हाईकोर्ट या Supreme court ke जज बनने ke लिए कभी कोई परीक्षा उत्तीर्ण की है अथवा नहीं
न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता जी (Deepanker Datta) ने हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जज बनने के लिए कोई परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
भारत में उच्च न्यायपालिका (HC/SC) के जजों की नियुक्ति Collegium प्रणाली से होती है, न कि किसी प्रतियो��ी परीक्षा से। बार से practicing advocate को सीधे हाईकोर्ट जज बनाया जा सकता है।
न्यायमूर्ति दत्ता जी 1989 में LLB पास कर advocate बने, ~16 साल वकालत की (कलकत्ता HC सहित)। 2006 में उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया (बार से elevation)। 2020 में बॉम्बे HC के Chief Justice और दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने।
यह सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है।
#NoTetBeforeRteAct
शिक्षकों के साथ वार्ता में जो बयान देते हैं ,संसद में उसके विपरीत बयान दे रहे हैं ।
तो फिर सभी राज्यों से जो आँकड़े और सूचना माँगी गई है क्या वो सब मिथ्या है ।यदि आप शिक्षकों के साथ है तो उत्तर में सभी राज्यों से सूचना माँगे जाने और विचार करने का उल्लेख आना चाहिए था ।आपके इस बयान की जितनी निंदा की जाये वो कम है ।ऐसा लगता है कि शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार ने कसम खा ली है,कि देश में किसी को शान्ति से नहीं बैठने देंगे ।देश के 20 लाख शिक्षक जो आपके ��्वारा निर्धारित योग्यता हासिल करके शिक्षक बने हैं उन्हें सेवा में आने के 20-25 वर्ष वर्तमान की योग्यता हासिल करने को बाध्य करना कितना न्यायोचित है?
20 वर्ष पहले पुलिस,सेना या अर्धसैनिक बलों में 10 किमी की रेस लगाकर भर्ती अधिकारी या सैनिक को यदि आज दौड़ा दिया जाए तो विभाग ख़ाली हो जाएगा ।
देश में कितने माननीय न्यायाधीश हैं जो आज CLAT EXAM में बैठने को तैयार हैं?50-55 वर्ष के शिक्षकों को आज परीक्षा में बैठन��� को मजबूर किया जा रहा है और शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार तमाशा देख रहा है ।
देश के नागरिक अपने सांसद इसलिए चुनते हैं कि संसद में उनके हितों की रक्षा करेंगे ।देश की संसद में सभी राज्यों से सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदो ने गत संसद सत्र में इस विषय को उठाया था लेकिन उसके बाद भी इस प्रकार का उत्तर देना यह सिद्ध करता है कि इनको किसी के हितों से कोई मतलब नहीं है ।
@PMOIndia
@narendramodi
@jayantrld
@dpradhanbjp