Kucch log badla Lene ke itne shaukeen hote hain ....
K kutta unhe kaat le..
To rabeez ka injection lagwane ki bajaye kutte Ko kaatne nikalte hain...
😅😅
Dear all I am reaching out to you once again with my fundraising campaign for my treatment against cancer. It's come back and relapsed for the 5th time. The only way out is an expensive drug, Talquetemab that needs to be imported quickly.Please contribute.
https://t.co/6msXqhjFbY
पहलगाम के लोकल मुस्लिम आतंकवादियों के समर्थन में थे,
ये अब पूरी तरह से सिद्ध हो चुका है।
टूरिस्ट के पीछे मुस्लिम व्यक्ति खड़ा है,
जब गोलियां चल रही हैं तब यह मुस्लिम व्यक्ति मुस्कुरा रहा है और अल्लाहु अकबर बोल रहा है।
ये गोलियां चलते देख रहा है फिर भी इसने टूरिस्ट को झूले पर भेज दिया, रोका तक नहीं।
ये पूरा खुलासा एक नए वीडियो के सामने आने के बाद हुआ है।
एक तरफ तुम, एक तरफ हम,
और तरफ ज़माने बैठे हैं,
कुछ आजमाकर निकल लिए,
बचे कुछ आजमाने बैठे हैं,
सोचते थे तुमसे जीतें, या तुमको जीतें,
भाई अब तो थक के हार माने बैठे हैं ।।
#JustNow#poetrylovers#WritersDen
@iTanwirr इश्क में जीतके आने के लिये काफी हूँ
मैं अकेला ही जमाने के लिये काफ��� हूँ
मेरी हर हकीकत को ख्वाब समझने वालों
मैं तेरी नींद उड़ाने के लिये काफी हूँ
एक अखबार हूँ औकात ही क्या मेरी
मगर शहर में आग लगाने के लिये काफी हूँ ।।😎🙏
राहत इंदौरी साहब
What if Kishore Kumar sung 'kaun tujhe yun pyaar karega, jaise main karta hun', enjoy my all mates @manojmuntashir@neelammuntashir
original creator not known to me 😇🙏
25 साल तक हर दिन अपने दिल में मेरे लिये थोड़ा और सब्र, थोड़ा और प्यार तलाशने के लिए Thank You @neelammuntashir !
आज हमारी शादी की सिल्वर जुबली है, बधाई! 🌹❤️🙏🏻
#Anniversary#valentineday
सिर्फ बेटियां ही नहीं साहब बेटे भी घर छोड़ जाते है, और वो बेटे फौजी कहलाते है...
ये फौजी भी कमाल के होते है, बटवे में परिवार छुपा लेते है और दिल में सारा हिंदुस्तान।
गणतंत्र दिवस की हार्दिक सुभकामनाये, जय हिंद।
🇮🇳 🇮🇳 🇮🇳
सिर्फ गुनगुनाहटों में इतनी विविधता ।
आपने जरूर इनका आनंद लिया होगा, आज सिर्फ गुनगुनाहट का आनंद लीजिए । 😃🙏
भाई @anuraagpandey द्वारा प्राप्त कृति आपसे साझा है ।
भाई मनोज,युगपुरुष गुरुदेव श्री राम भद्राचार्य जी का शुभाशीष प्राप्त आपको हुआ,और आशीर्वाद की महक यहां तक पहुंची,उनका अपनत्व यूं प्राप्त होता है जैसे स्वयं प्रभु आलिंगन में ले रहे हो, वास्तव में ही इससे बढ़कर पूंजी हमारी हो नही सकती,हमारी ही कहूंगा,क्योंकि हमारे हाथ हमेशा जुड़े हैं
हर दिल अजीज भाई जावेद मोहसिन , जिस कलेवर में आपने इस गीत को प्रस्तुत किया है उसकी तारीफ में लफ्जों की तलाश जारी रखते हुए साझा कर रहा हूं । 😊👍@javedmohsinMZK
*"जिहाल-ए-मिस्कीन मकुन बरंजिश,*
*बेहाल-ए-हिजरा बेचारा दिल है,*
*सुनाई देती है जिसकी धड़कन,*
*तुम्हारा दिल या हमारा दिल है..*"*
अर्थ-- मुझे रंजिश से भरी इन निगाहों से ना देखो क्योकि मेरा बेचारा दिल जुदाई के मारे यूँ ही बेहाल है। जिस दिल कि धड़कन, तुम सुन रहे हो वो तुम्हारा या मेरा ही द���ल है।
यह गाना गीतकार *'गुलज़ार'* ने लिखा था। *लक्ष्मीकांत -प्यारेलाल* ने Compose किया था और *लता मंगेशकर* और *शब्बीर कुमार* ने गाया था। लेकिन गाने कि पहली लाइन क्या है यह कभी समझ नहीं आया। इसके बाद की Lyrics हिंदी में थी, जो समझ आ जाती थी। कई साल तक इस गाने को मै *"जिहाले मस्ती मुकुंद रंजिश"* सुनती रही और गाती भी रही।
गुलामी 1985 में आयी थी। गीतकार गुलज़ार ने यह गाना *अमीर खुसरो* कि एक बेहतरीन सूफियाना कविता से प��रेरित होकर बनाया था, जिसकी पहली लाइन कुछ इस तरह है -
*"जिहाल-ए -मिस्कीन मकुन तग़ाफ़ुल,*
*दौड़ाए नैना बनाये बतियां*
*के ताब-ए-हिजरां न दरम ए जाना,*
*न लेहो काहे लगाये छतियां"*
मतलब- आँखे दौड़ा के और बाते बनाकर मेरी बेबसी को नज़रअंदाज़ (तग़ाफ़ुल) मत करो। मेरे सब्र की अब इन्तेहाँ हो गयी है, मुझे सीने से क्यों नहीं लगाते।
पहली लाइन *पर्शियन* में है और दूसरी *बृज-भाषा* में।
*"जिहाले मस्ती"* की मस्ती युँ ही बनी रहेगी, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का म्यूजिक ही कुछ ऐसा था। जिन्हे लिरिक्स पता है उनके लिए इस गाने का अलग ही मज़ा है।
◆ मनोरमा त्रिपाठी
*"जिहाल-ए-मिस्कीन मकुन बरंजिश,*
*बेहाल-ए-हिजरा बेचारा दिल है,*
*सुनाई देती है जिसकी धड़��न,*
*तुम्हारा दिल या हमारा दिल है..*"*
अर्थ-- मुझे रंजिश से भरी इन निगाहों से ना देखो क्योकि मेरा बेचारा दिल जुदाई के मारे यूँ ही बेहाल है। जिस दिल कि धड़कन, तुम सुन रहे हो वो तुम्हारा या मेरा ही दिल है।
यह गाना गीतकार *'गुलज़ार'* ने लिखा था। *लक्ष्मीकांत -प्यारेलाल* ने Compose किया था और *लता मंगेशकर* और *शब्बीर कुमार* ने गाया था। लेकिन गाने कि पहली लाइन क्या है यह कभी समझ नहीं आया। इसके बाद की Lyrics हिंदी में ���ी, जो समझ आ जाती थी। कई साल तक इस गाने को मै *"जिहाले मस्ती मुकुंद रंजिश"* सुनती रही और गाती भी रही।
गुलामी 1985 में आयी थी। गीतकार गुलज़ार ने यह गाना *अमीर खुसरो* कि एक बेहतरीन सूफियाना कविता से प्रेरित होकर बनाया था, जिसकी पहली लाइन कुछ इस तरह है -
*"जिहाल-ए -मिस्कीन मकुन तग़ाफ़ुल,*
*दौड़ाए नैना बनाये बतियां*
*के ताब-ए-हिजरां न दरम ए जाना,*
*न लेहो काहे लगाये छतियां"*
मतलब- आँखे दौड़ा के और बाते बनाक��� मेरी बेबसी को नज़रअंदाज़ (तग़ाफ़ुल) मत करो। मेरे सब्र की अब इन्तेहाँ हो गयी है, मुझे सीने से क्यों नहीं लगाते।
पहली लाइन *पर्शियन* में है और दूसरी *बृज-भाषा* में।
*"जिहाले मस्ती"* की मस्ती युँ ही बनी रहेगी, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का म्यूजिक ही कुछ ऐसा था। जिन्हे लिरिक्स पता है उनके लिए इस गाने का अलग ही मज़ा है।
◆ मनोरमा त्रिपाठी