मुंबई. सपनों के शहर में अपनों से मुलाकात. @divyapdubey भैया को ‘यार पापा’ के लिए बधाई.
संवाद-
“लोग बनारस क्यों आते हैं?”
“क्यों का पता नहीं, लेकिन ये पता है कब आते हैं?”
“कब आते हैं?”
“जब आगे कोई रास्ता नहीं दिखता.”
~ अक्टूबर जंक्शन (किताब)
#mumbai#yaarpapa
क्या एक पापा और बेटी का रिश्ता ऐसा हो सकता है कि वो सारी औपचारिकताएं छोड़कर पापा को ‘यार पापा’ बना पाए? इसी तरह के ज़रूरी सवालों का जवाब ढूंढती है चर��चित लेखक @divyapdubey की @hindyugm से प्रकाशित ‘यार पापा’. इस पुस्तक पर वरिष्ठ पत्रकार @jai_shiven की राय.
प्रैक्टिकल लोग शाय़द जो करते हैं वो प्यार होता ही नहीं, बिना थोड़ी सी बेवकूफी और पागलपन के प्यार थोड़े होता है । "प्रैक्टिकल लोग धंधा करते हैं सर जी प्यार नहीं"
@hindyugm#yaarpapa#nayiwalihindi
हमें ख़याल आता है कि हम इतने थके हुए इसीलिए हैं क्योंकि हम अपनी नहीं किसी और की मंजिल को अपना रास्ता समझ बैठे। विश्वास हो कि रास���ता सही है तो फिर चाहे कितना भी लंबा सफ़र हो थकान नहीं होती।
#yaarpapa
क़रीब दस साल पहले मेरी पहली किताब आयी थी। जब लिखना शुरू किया था तब उम्मीद नहीं थी कि इतना स��नेह इतना प्यार मिलेगा कि मैं नौकरी छोड़ कर लिखने लगूँगा। आया। सातवीं किताब अब आपके हवाले।
With love, peace & Hope
दिव्य प्रकाश दुबे
PS- यार पापा ऑनलाइन उपलब्ध है
#YaarPapa