आज का बहुजन इतिहास : 21-22 मार्च 1920 को महारा���्ट्र के कोल्हापुर ज़िले में दक्षिण महाराष्ट्र बहिष्कृत वर्ग परिषद का सम्मेलन हुआ था।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए बहुजन महानायक छत्रपति शाहू जी महाराज ने बाबा साहब डॉ आंबेडकर को वंचितों को सच्चा नेता कहा था। जय शाहू-जय भीम
"नाम नरेंद्र.. काम सरेंडर..नरेंद्र भी गायब..सिलेंडर भी गायब"
LPG संकट को लेकर विपक्षी दलों का अनोखा विरोध प्रदर्शन। महिला सांसदों के साथ प्रियंका गांधी भी शामिल।
बैटल ऑनर ऑफ कोहिमा "#द_चमार_रेजिमेंट के स्थापना दिवस 1 मार्च 1943 की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं।
हम @mygovindia से माँग करते है कि "आजाद हिन्द फौज" के साथ मिलकर ब्रिटिश सरकार को नाकों चने चबवाने वाली वीरता ,पराक्रम और शौर्य का आदर्श स्थापित करने वाली "#द_चमार_रेजिमेंट" को केन्द्र सरकार बहाल करें।
"जिसको भी दर्द है पानी कितने साल से पिने नहीं दिया साथ ही जाति आधारित प्रतिनिधित्व से"
आज शाम 7:30pm, 17 Feb 2026, Rational World Youtube लाइव में जुड़कर दर्द बयान करे।
#WamanMeshram
भारत के संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए तथा आरएसएस-बीजेपी के लोगों के द्वारा षड्यंत्रपूर्वक बामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन की परमिशन रद्द किए जाने के विरोध में
22 फरवरी, 2026 को आरएसएस मुख्यालय, नागपुर पर राष्ट्रव्यापी विशाल महारैली
Bamcef Org. II Bharat Mukti Morcha
मध्य प्रदेश राज्य के इन्दौर शहर में प्रदूषित पानी पीने से अनेक निर्दोष नागरिकों की मौत तथा अन्य अनेक लोगों के बीमार हो जाने की अति-दुखद एवं चौंकाने वाली ख़बर काफी चर्चा में है तथा ऐसी सरकारी ग़ैर-ज़िम्मेदारी व उदासीनता को लेकर लोगों में स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि पूरे देश भर में व्यापक आक्रोश भी स्वाभाविक है।
वैसे ��ो लोगों को ख़ासकर साफ हवा और पानी आदि मुहैया कराना हर सरकार की पहली ज़िम्मेदारी होती है, किन्तु यहाँ अपराध नियंत्रण व कानून व्यवस्था की तरह ही बुनियादी जनसुविधा के सम्बंध में भी सरकारी लापरवाही व भ्रष्टाचार आदि काफी घातक साबित हो रहा है तथा परिवार उजड़ रहे हैं, यह अति-दुखद व अति-चिन्तनीय।
इस प्रकार की नागरिकों के जान से खिलवाड़ करने की शर्मनाक घटना की रोकथाम के लिये राज्य सरकार को सख़्त से ���ख़्त क़दम उठाते रहने की ज़रूरत है। साथ ही, केन्द्र की सरकार को भी इसका उचित संज्ञान लेकर प्रभावी कार्रवाई ज़रूर करनी चाहिये ताकि देश के किसी अन्य राज्य में ऐसी दर्दनाक घटनायें ना होने पायें।
नये साल की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं। नव वर्ष में हम यह संकल्प करते ह�� की इस देश के शोषित, वंचित और बहुजन समाज के अधिकार व न्याय की लड़ाई को मंजिल तक पहुंचाकर,परम पूज्य बाबा साहेब का अधूरा सपना पूरा करेंगे। हमारा देश बेगमपुरा राष्ट्र बने। जय भीम, जय भारत, जय मंडल, जय जौहर,जय संविधान।
#HappyNewYear2026 #HappyNewYear
#2026newyear #नववर्ष_2026
लोकतंत्र में विरोध बेकार नहीं जाता—उत्तर प्रदेश लेखपाल भर्ती इसका जीवंत उदाहरण है। जब OBC को 27% की जगह 18% आरक्षण दिया गया, तब जागरूक नागरिकों ने सड़क से सदन तक आवाज़ उठाई। सोशल मीडिया, विपक्ष और जनदबाव का असर हुआ—नोटिफिकेशन वापस लिया गया और संशोधित भर्ती में OBC, SC और ST को उनका संवैधानिक हक़ मिला।
अ��र समाज चुप रह��ा, तो सैकड़ों पद लूट लिए जाते। यह संघर्ष सिखाता है कि अन्याय जितना बड़ा हो, विरोध उतना ही ज़रूरी है। आवाज़ उठाइए—यही नागरिक होने की शर्त है।
कुछ लोग सवाल करते हैं कि भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस के नाम पर आज़ाद भारत में अंग्रेज़ों की जीत का जश्न क्यों मनाया जाता है?
ऐसे लोगों को यह वीडियो ज़रूर देखना चाहिए क्योंकि यहीं से भ्रम टूटता है और सच सामने आता है।
भीमा कोरेगांव किसी साम्राज्य की विजय का उ��्सव नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक क्षण की याद है जब महार सैनिकों ने पेशवाशाही की ब्राह्मणवादी अत्याचार-व्यवस्था को चुनौती दी।
यह शौर्य सत्ता की नहीं, आत्मसम्मान की जीत का प्रतीक है। यही वजह है कि इसे श्रद्धा से याद किया जाता है क्योंकि यह लड़ाई बराबरी, इंसाफ़ और मानवीय गरिमा के लिए थी।
बाबा साहब डॉ. आंबेडकर ने भी भीमा कोरेगांव स्मारक को दलित स्वाभिमान का प्रतीक माना।
जो इसे ‘अंग्रेज़ों की जी��’ कहकर खारिज करते हैं, वे इतिहास के संदर्भ और सामाजिक सच्चाई दोनों को नज़रअंदाज़ करते हैं। यह वीडियो देखिए, सारे जवाब मिल जाएंगे। ✊
#शौर्य_दिवस #BhimaKoregaonShauryaDivas
समस्त देशवासियों तथा दुनिया भर में रहने वाले भारतीय नागरिकों एवं उनके परिवार वालों को आज न���वर्ष सन् 2026 की दिली मुबारकबाद एवं उन सबकी सुख, शान्ति, समृद्धि, सुरक्षा एवं आत्म-सम्मान व स्वाभिमान-युक्त जीवन की शुभकामनायें।
नया साल देश में सर्वसमाज के हर ग़रीब व मेहनतकश लोगों अर्थात��� समस्त बहुजनों की दिन-प्रतिदिन की ज़िन्दगी नित्य नये नियम-क़ानूनों की क़दम-क़दम पर जकड़नों से दूर सहज व सरल हो तथा यह साल आप सबके लिये बहुत सारी ख़ुशियाँ लाये, यही कुदरत से कामना ही नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक जीवन में बहुजन समाज का थोड़ा अच्छे दिन पाने के लिये यही संघर्ष भी है। अन्त में एक बार फिर सभी को नये साल की हार्दिक बधाई।