अपनी निजता को किसी कीमत पर खोना मत। कोई सौदा मत करना कोई समझौता मत करना सिर्फ अपने ढंग से जीना जैसा तुम जीना चाहते हो, टूटना हो टूट जाना मगर झुकना मत।
हंसो खेलो और ध्यान करो, हंसते खेलते ध्यान करो वैसे भी लोग बहुत उदास है और तुम और उदासीन होके बैठ गए। अब और उदासीनो को ये पृथ्वी नहीं सह सकती।
अब इस पृथ्वी को चाहिए नाचते हुए, गाते हुए, मुस्कराते हुए ध्यानी लोग जो कि जीवन को ही उत्सव बना दें, ज��� आंसुओं को भी गीत बना दें, जो इस टेंशन भरी दुनिया में ठसक के साथ जिए, एक विद्रोह के साथ जिए।
जीवन एक यात्रा है!!
चलते रहो, जागते रहो...🚶♂️
कभी-कभी लोग मुझसे आकर कहते हैं कि ज़िंदगी बहुत परेशान कर रही है, प्यार छोड़ गया, एग्ज़ाम्स नहीं निकल रहे, बहुत डिप्रेशन में हूँ।
उनसे मैं हमेशा एक ही बात कहता हूँ अ��र तुम्हारे पास थेरेपी का इंतज़ाम नहीं है, अच्छे साइकाइट्रिस्ट को नहीं दिखा सकते और अच्छे दोस्त भी नहीं हैं, सोशल लाइफ जीरो पर है, तो बस एक काम करो ओशो को सुनो।
दो से तीन महीने तक लगातार सुनो, ओशो तुम्हें भीतर से बदल देंगे। जितने भी वक्ताओं को मैंने सुना है, उनमें ओशो का सम्मोहन कुछ अलग ही है। लोग नहीं जानते कि उन्हें क्या सुनना चाहिए, लेकिन ओशो जानते हैं कि तुम क्या सुनना चाहते हो।
उनके डिस्कोर्स हर जगह उपलब्ध हैं यूट्यूब पर, उनकी वेबसाइट पर, वो में नीचे मेंशन कर दूंगा वहाँ तुम सुन भी सकते हो और पढ़ भी सकते हो। उनकी किताबें असल में उनके लाइव लेक्चर्स का संकलन हैं, इसलिए जब तुम उन्हें पढ़ोगे तो महसूस होगा जैसे कोई तुम्हारे सामने बैठकर बोल रहा है। मेरा मानना है कि 20वीं सदी के महानतम orator में से एक ओशो भी हैं।
ओशो को सुनने वाला एक चीज़ ज़रूर पा लेता है ज़िंदगी की समस्याएँ अब पहले जितना परेशान नहीं करतीं। वो जीवन को एंजॉयमेंट के साथ जीना सीख जाता है, थोड़ा मुस्कुराना, थोड़ा ठहरना, थोड़ा जीना यही वो सिखाते हैं।
लेकिन एक बात याद रखना उनका आकर्षण बहुत गहरा है। अगर लगातार सुनते रहोगे, तो उनका सम्मोहन तुम्हें उनकी आंधी में उड़ा ल��� जाएगा। इसलिए बीच-बीच में विराम लेना ज़रूरी है। दो-तीन डिस्कोर्स सुनने के बाद थोड़ा रुक जाना, खुद को संभालना साइंस और ह्यूमन ब्रेन पर लेटेस्ट रिसर्च पढ़ लेना जिससे ध्यान थोड़ा तार्किक हो जाए, रैशनल रहो। हर बात को दिल में उतरने मत दो, वरना तुम खो जाओगे। ओशो को सुनो, फिर जीवन को महसूस करो। धीरे-धीरे तुम्हारा thought process बदल जाएगा, भय, चिंता, डिप्रेशन सब पीछे छूट जाएगा, और तुम देखोगे ज़िंदगी अब उतनी भारी नहीं लगती, जितनी पहले लगती थी।
कुछ बातें जो मैने सीखी:
न बीता हुआ कल, न आने वाला कल, बस वर्तमान का यह पल ही सब कुछ है। जिंदगी अभी और यही है इसी क्षण में है इसी क्षण में परमात्मा भी है परमात्मा आपके अंदर है बाहर बैठा कोई व्यक्ति नहीं l
निडरता से जीना एक ठसक के साथ आचार्य प्रशांत भी यही बोलते है, आप जैसे हैं वैसे ही सर्वश्रेष्ठ हैं किसी की नकल ना करें l आप अपनी चिंता करें लोग क्या कहेंगे इसकी फिक्र ना करें मनुष्य जीवन अनमोल है इसे व्यर्थ ना गवाएं l
सुख-दुख कुछ भी नहीं ठहरता यह भी बीत जाएगा l
किसी से कोई गलती हुई है तो उसे माफ कर दें बीती बातों को पकड़कर नहीं बैठे रहे।
संसार में रहते हुए सन्यासी बनना है हर काम को होश पूर्वक करना है चले तो होश पूर्वक बैठे उठे सब कुछ होश पूर्वक करना चाहिए , होश पूर्वक किया गया हर काम ही ध्यान बन जाता है l
प्रेम ,ध्यान और आनंद पूर्वक साक्षी भाव के साथ जीवन को जीए l
और लास्ट में जीवन को बस एंजॉय करे ज्यादा लोड न ले, सब काम करे नाचे गाए खुशियां मनाए घूमे फिरे, जीवन को उच्चतम शिखर पर ले जाए, खूब विज्ञान पढ़े खूब गणित पढ़े और नई नई खोज करे, नदी की तरह बहते रहे पढ़ते रहे और अपने ज्ञान को बढ़ाते रहे। इंसान खोजी है खोज करते रहे and be rational किसी पर अंध विश्वास न करे।
जीवन यात्रा... 🚶♂️
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