भ्रष्टाचार,कुशासन, अत्याचार और वंशवाद के अंत का संकल्प लेकर सेवा,सुशासन और विकास को अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले भारत के कुशल नेतृत्वकर्ता तथा यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी का अपार स्नेह एवं मित्र रूपी संबोधन पाकर मानवसेवा की मेरी दृढ़ इच्छा को और अधिक बल मिला ह���।
My resolve to serve humanity has been greatly strengthened by receiving immense affection and a friendly address from our esteemed Prime Minister, world’s most popular leader committed to ending corruption, misgovernance, oppression, and dynastic rule, and dedicating everything to service, good governance, and development of Bharat.
@narendramodi
@BJP4India @JPNadda
@AmitShah @blsanthosh
@LKBajpaiBJP
“संगत से गुण आत है, संगत से गुण जात।”
जिस पूजा सिंघल के मामले को कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का प्रतीक बताया गया, आज वही सत्ता के मंच पर दिखाई दें, तो सवाल उठना लाज़िमी है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ पूजा सिंघल और राजीव बक्शी की मौजूदगी क्या संदेश देती है? क्या यही है भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई, या फिर अब नारा बदल चुका है?
लगता है ‘स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन’ में सबसे बड़ा स्टेक झारखंड की नैतिकता ही है।
जनता तस्वीरें भी देखती है और संदेश भी समझत��� है।
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अनुबंध कर्मियों के साथ हेमंत सरकार बंधुआ मजदूर जैसा व्यवहार कर रही है। चुनाव के समय नियमित करने, वेतनमान बढ़ाने जैसे लुभावने वादे कर बरगलाने का काम करती है, लेकिन सत्ता मिलते ही प्राथमिकता पूरी तरह से बदल ��ाती है।
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत लगभग 58 हजार अनुबंध कर्मियों को पिछले पांच महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। ट्रेजरी में करीब 170 करोड़ रुपये के बिल लंबित पड़े हैं, जिससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में स्वीकृत बजट का केवल 4.92% खर्च होना सरकार की वित्तीय अक्षमता और लापरवाही को दर्शाता है।
@HemantSorenJMM जी, लंबित मानदेय का भुगतान सुनिश्चित कराएं तथा भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए स्थायी और पारदर्शी व्यवस्था लागू करें। स्वास्थ्यकर्मियों का सम्मान केवल भाषणों से नहीं, बल्कि उनके परिश्रम का समय पर उचित भुगतान करने से सिद्ध होगा।
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श्री अमरनाथ जी की प��वन यात्रा सनातन संस्कृति के प्रति अट��ट आस्था, अदम्य साहस, संयम और अटल संकल्प का दिव्य प्रतीक है। आज से प्रारंभ हो रही इस पवित्र यात्रा के अवसर पर बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए प्रस्थान करने वाले सभी श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संपूर्ण यात्रा मार्ग पर मल्टी-लेयर सुरक्षा व्यवस्था, QR कोड आधा���ित पंजीकरण, बेहतर आवास, स्वास्थ्य सेवाएँ तथा आपदा प्रबंधन की व्यापक तैयारियाँ सुनिश्चित की हैं, ताकि प्रत्येक श्रद्धालु की यात्रा सुरक्षित, सुगम और मंगलमय हो।
बाबा अमरनाथ से सभी श्रद्धालुओं की सुखद, सुरक्षित एवं सफल यात्रा की कामना करता हूं।
हर-हर महादेव!
बाबा बर्फानी के दर्शन से जुड़ी ��्री अमरनाथ यात्रा हमारी आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक एकता का शाश्वत अध्याय है। मेरी कामना है कि शिवभक्तों की यह यात्रा हर तरह से सुरक्षित और मंगलमय हो! इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए पांच संकल्पों से जुड़ा मेरा यह पत्र…
जमशेदपुर में पुलिस गाड़ी से ख���ंचकर युवक की हत्या किए जाने के मामले में एसपी/एसएसपी को सस्पेंड कर मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी दिखावे की कारवाई कर रहे हैं।
यदि मुख्यमंत्री वास्तव में हत्याकांड के दोषियों को सजा दिलाने के लिए गंभीर हैं तो उन पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज कराएं, जिनकी मौजूदगी में हत्या हुई है।
जानकारी मिली है कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात ASI अजय सिंह के सामने डीजीपी तक नतमस्तक हैं। पुलिस अधिकारियों के तबादले से लेकर अवैध वसूली तक के कार्य उनके इशारे पर ही हो रहे हैं।
जब तक यह परंपरा चलती रहेगी, तब तक प्रदेश की कानून व्यवस्था सुदृढ़ नहीं हो सकती।
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जिन मामलों में झारखंड पुलिस और राज्य की अन्य ���ांच एजेंसियों से तत्परता एवं जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है, उन मामलों में हमारे राज्य की पुलिस अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन से बचती हुई और जवाबदेही से डरती हुई नजर आती है।
ऐसा ही एक अत्यंत गंभीर मामला रामगढ़ जिले से सामने आया है, जहाँ 11 वर्ष की एक बच्ची के साथ तीन व्यक्तियों द्वारा दुष्कर्म किए जाने की व्यथित कर देने वाली सूचना मिली। घटना की जानकारी मिलने के बाद पीड़िता के परिजनों ने प्राथमिकी दर्ज कराई और मामला पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज किया गया।
घटना के कुछ ही दिनों बाद लगभग सवा लाख रुपये लेकर तीन आरोपियों में से एक को छोड़ दिया गया। एक मासूम बच्ची से दरिंदगी करने का आरोपी खुलेआम घूम रहा है। यह समाज के लिए घातक भी है और उदाहरण भी कि कैसे सुरक्षा व्यवस्था को ताक पर रखकर खतरनाक अपराधियों को सरंक्षण दिया जा रहा है। पुलिस के इस मनमाने रवैये का मुख्य कारण है राज्य सरकार की लापरवाही और ख़मियाज़ा आम जनता को ���ुगतना पड़ रहा है।
संवेदनशील मामलों में समय पर और निष्पक्ष न्याय न मिलने की उम्मीद खत्म होती जा रही है।
झारखंड पुलिस के कुछ अधिकारियों और उनके कार्यों के कारण न्याय प्रणाली पर जनता का विश्वास कमजोर पड़ता है तथा पूरी व्यवस्था की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लग जाता है। राज्य की वर्तमान व्यवस्था में व्यापक सुधार, जवाबदेही और संवेदनशील मामलों में जीरो टॉलरेंस की आवश्यकता है।
@RamgarhPolice एसपी इस मामले में ��त्काल उच्चस्तरीय जांच कराएं व सुनिश्चित करें कि इस प्रकरण में किसी भी दोषी व्यक्ति को किसी प्रकार की राहत न मिले तथा उन सभी अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो, जिनके कार्यों या निर्णयों के कारण इस प्रकार के आरोप सामने आए हैं।
जांच के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाए कि आरोपी को किस आधार पर छोड़ा गया, किन परिस्थितियों में यह निर्णय लिया गया, और यदि प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता प���ई जाती है तो संबंधित जांच अधिकारी तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ऐसे मामलों में पारदर्शी और कठोर कार्रवाई ही न्याय व सुरक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास पुनः स्थापित कर सकती है।
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आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू हु�� डिजिटल इंडिया पहल के 11 वर्ष सुशासन, डिजिटल समावेशन और नागरिक सशक्तिकरण की एक महत्वपूर्ण यात्रा के प्रतीक हैं।
इस पहल ने तकनीक को जन-जन तक पहुंचाकर सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुगम और प्रभावी बनाया तथा करोड़ों नागरिकों को नए अवसरों से जोड़ने का कार्य किया है।
#11YearsOfDigitalIndia #DigitalIndia
क्या केवल तबादला ही न्याय है?
जमशेदपुर में करणी सेना के नेता हिमांशु सिंह को पुलिस की गाड़ी से खींचकर, पुलिस के सामने चाकुओं से गोद-गोदकर हत्या कर दी गई। यह केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि झारखंड की कानून-व्यवस्था, पुलिस व्यवस्था और शासन की विश्वसनीयता पर सीधा हमला है। यदि पुलिस की गाड़ी में बैठा व्यक्ति भी सुरक्षित नहीं है और उसे पुलिस के सामने ही मौत के घाट उतार दिया जाता है, तो आम नागरिक अपनी सुरक्षा की उम्मीद आखिर किससे करे?
घटना के बाद कुछ अधिकारियों का तबादला कर दिया गया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ तबादला ही जवाबदेही है? क्या केवल कुर्सियाँ बदल देने से कानून-व्यवस्था सुधर जाएगी? क्या इससे अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा होगा?
वर्षों से यही होता आया है। कोई बड़ी घटना होती है, जनता में आक्रोश फैलता है, सरकार कुछ अधिकारियों का तबादला कर देती है, जांच का आश्वासन दे दिया जाता है और कुछ महीनों बाद मामला ठंडा पड़ जाता है। फिर वही अधिकारी किसी न किसी जुगाड़, प्रभाव या सिस्टम के सहारे पहले से भी बेहतर पोस्टिंग पा लेते हैं। यदि हर गंभीर लापरवाही का परिणाम सिर्फ तबादला ही होगा, तो जवाबदेही आखिर तय कब होगी?
इस पूरे मामले में यह भी कोई मायने नहीं रखता कि अपराधी किस राजनीतिक दल, जाति या धर्म से जुड़े हैं। अपराधियों की न कोई जाति होती है, न धर्म और न कोई राजनीतिक पार्टी। उनकी सिर्फ एक पहचान होती है—वे अपराधी हैं। इसलिए कानून का व्यवहार भी सभी के साथ समा�� होना चाहिए।
इस जघन्य अपराध के पीछे जो भी लोग शामिल हैं—चाहे वे हमलावर हों, साजिशकर्ता हों, संरक्षण देने वाले हों या अपने कर्तव्य के निर्वहन में घोर लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारी एवं कर्मी—सभी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोष सिद्ध होने पर कठोरतम दंड मिलना चाहिए। केवल तबादले से न अपराध रुकेगा और न ही जनता का विश्वास लौटेगा।
आज आम जनता के मन में एक और गंभीर सवाल उठ रहा है। क्या पुलिस ���ा मूल दायित्व कानून का राज स्थापित करना है, या फिर उसका बड़ा हिस्सा बाल��, पत्थर, कोयला, लोहा जैसे अवैध कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय केवल घटनाओं के बाद औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रह गया है? कई लोगों के बीच यह धारणा भी बनी है कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाने वालों को ही तरह-तरह से परेशान किया जाता है। ऐसी धारणाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जहां भी तथ्य सामने आएं, वहां कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
झारखंड की जनता केवल तबादले नहीं, बल���कि जवाबदेही, निष्पक्ष जांच और कठोर दंड चाहती है। क्योंकि जब पुलिस की गाड़ी से किसी नागरिक को खींचकर पुलिस के सामने ही चाकुओं से गोद-गोदकर मार दिया जाए, तब यह केवल एक हत्या नहीं रहती, बल्कि पूरे कानून-व्यवस्था तंत्र की विफलता का प्रतीक बन जाती है।
सरकार को यह तय करना होगा कि वह केवल तबादलों से व्यवस्था चलाना चाहती है या ऐसी मिसाल कायम करना चाहती है कि भविष्य में कोई अपराधी पुलिस के सामने किसी की हत्या करने का साहस ही न कर सके।
याद रखिए, व्यवस्था तबादलों से नहीं, बल्कि जवाबदेही, निष्पक्ष न्याय और कठोर दंड से बदलती है। यदि आज भी केवल तबादले ही समाधान माने जाएंगे, तो कल किसी और हिमांशु सिंह की जान जाएगी और ��िर वही पुरानी कहानी दोहराई जाएगी। यह केवल एक परिवार का नहीं, पूरे समाज और कानून के राज का प्रश्न है।
#JusticeForHimanshuSingh #Jharkhand #Jamshedpur #LawAndOrder #PoliceAccountability #RuleOfLaw #ZeroToleranceToCrime #Justice #JharkhandPolice #Accountability
झारखंड भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री श्री @bjpkarmveer जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
बाबा बैद्यनाथ से आपके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु जीवन की कामना करता हूं।
Today, we mark 11 years since the Digital India initiative was launched. This initiative has redefined governance, empowered citizens and accelerated all-round development. It has touched every aspect of life. From seamless digital payments and direct benefit transfers reaching beneficiaries with transparency to the expanding digital public infrastructure, technology has become a powerful instrument for furthering ‘Ease of Living.’
Digital India has taken the wave of innovation to all parts of India, especially villages, Tier-2 and Tier-3 cities. Young entrepreneurs, StartUps and innovators from every corner of the country are creating solutions to the pressing challenges that our planet faces. This initiative has strengthened education, healthcare, agriculture, commerce and public service delivery, making governance more transparent, efficient and accessible.
Our strides in the digital world have ensured that India is making rapid progress in emerging technologies such as AI, semiconductors, quantum computing and more. This too will open new avenues for growth and opportunity. Our focus will remain on creating a future where technology serves humanity, empowers every citizen and drives sustainable development.
#11YearsOfDigitalIndia
डिजिटल इंडिया विकसित और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त नींव है। बीते 11 वर्षों में इसने गरीबों और वंचितों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ ही देशवासियों के जीवन को आसान बनाया है। ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के विस्तार से लेकर डिजिटल ट्रांजैक्शन तक इस अभियान की अभूतपूर्व सफलता ने दुनियाभर का ध्यान भारत की ओर खींचा है।
#11YearsOfDigitalIndia
हूल दिवस मातृभूमि के लिए मर-मिटने वाले हमारे आदिवासी समाज के अद्भुत जज्बे का सशक्त प्रतीक है। भारतीय इतिहास के इस गौरवशाली अवसर पर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो जैसे उन सभी वीर-वीरांगनाओं को मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि, जिन्होंने विदेशी शासन के अन्या�� का डटकर मुकाबला किया। जनजातीय गरिमा और मान-सम्मान की रक्षा के लिए उनके संघर्ष और बलिदान की कहानी देशवासियों ��ें नई ऊर्जा का संचार करती रहेगी।
जमशेदपुर में पुलिस की मौजूदगी के दौरान करणी सेना के नेता हिमांशु सिंह की ���ाकू मारकर हत्या की खबर बेहद दुखद और झकझोर देने वाली है। इस घटना ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की तत्परता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। एक परिवार ने अपना बेटा हमेशा के लिए खो दिया, जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं है।
पिछले वर्ष करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। लगातार ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम नागरिक स��वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
पुलिस से अपेक्षा होती है कि वह कानून का निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से पालन कराए तथा संकट की घड़ी में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। यदि पुलिस की मौजूदगी में ही ऐसी घटना घटती है, तो इसकी निष्पक्ष और गहन जांच होना अत्यंत आवश्यक है।
@HemantSorenJMM जी, आपसे आग्रह है कि इस जघन्य हत्या की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, घटना के समय मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका, उनकी प्रतिक��रिया तथा संभावित लापरवाही की भी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि जनता का कानून पर विश्वास बना रहे।
@Jsr_police @JharkhandPolice @BJP4Jharkhand
1855 के हूल उलगुलान के माध्य�� से सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष कर उन्हें अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य किया था। इसके बाद संताल परगना क्षेत्र में भूमि बंदोबस्ती की जिम्मेदारी स्थानीय प्रधान व्यवस्था को सौंपने की परंपरा स्थापित हुई, जो लंबे समय से चली आ रही है।
लेकिन दुर्भाग्यवश, पिछले कुछ वर्षों में कथित अबुआ सरकार के कार्यकाल में आदिवासी भूमि को लूटा जा रहा हैं। घुसपैठि��ों को राज्य सरकार का संरक्षण मिल रहा है। रिम्स-2 के नाम पर आदिवासियों की उपजाऊ भूमि अधिग्रहण के प्रयास कर सरकार अंग्रेजों वाली मानसिकता का परिचय दे रही है।
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हूल दिवस के पावन अवसर पर रांची के सिद्धो-कान्हू पार्क स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। जनजातीय अस्मिता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए उनके अद्वितीय योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।
हूल क्रांति के सभी अमर बलिदानियों का संघर्ष और त्याग आज भी समाज को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने तथा अपने अधिकारों और संस्कृति की रक्षा के लिए प्रेरित करता है।
@BJP4India@BJP4Jharkhand
संथाल परगन��� की वीरभूमि से वर्ष 1855 में ब्रिटिश शासन की दमनकारी और शोषणकारी नीतियों के विरुद्ध हूल आंदोलन का ऐतिहासिक बिगुल फूंका गया। सिदो मुर्मु, कान्हू मुर्मु, चांद मुर्मु, भैरव मुर्मु तथा वीरांगनाएं फूलो मुर्मु और झानो मुर्मु के नेतृत्व में संथाल समाज ने जल, जंगल, जमीन और अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए अभूतपूर्व संघर्ष का परिचय दिया।
अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देने वाला यह आंदोलन स्वतंत्रता, स्वाभिमान और अधिकारों के लिए जनजागरण का प्रतीक बना। हूल दिवस के अवसर पर उन सभी अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि, जिनका त्याग, पराक्रम और राष्ट्���भाव आज भी हम सभी को अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने की प्रेरणा देता है।
@BJP4India @narendramodi @AmitShah @NitinNabin @blsanthosh @BJP4Jharkhand
जनजातीय अस्मिता और मातृभूमि के लिए संथाल क्र���ंति में अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले सभी बलिदानियों को 'हूल दिवस' के अवसर पर स्मरण कर नमन करता हूँ।
जनजातीय स्वाभिमान और स्वतंत्रता संग्राम के महानायक सिदो-कान्हू मुर्मु, चांद-भैरव तथा वीरांगनाओं फूलो-झानो ने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष का ऐसा शंखनाद किया, जिसने पराधीनता के विरुद्ध जन-जन में प्रतिरोध की चेतना का संचार किया।
झारखंड की जल, जंगल और जमीन राज्य की अमूल्य संपत्ति हैं, लेकिन ��ेमंत सरकार ने इन्हें लूटने की कसम खा रखी है।
साहिबगंज जिले के नींबू पहाड़ में 1000 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध खनन मामले को लेकर पहले भी गंभीर सवाल उठ चुके हैं। इस मामले में सत्ताधारी दल के शीर्ष नेताओं की संलिप्तता, न्यायालय की कार्यवाही और सीबीआई जांच तक की स्थिति सामने आने के बाद भी अवैध खनन को लेकर चिंता समाप्त होती नहीं दिख रही है।
अब जिले के बड़हरवा क्षेत्र में लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में फिर से अवैध खनन की जानकारी सामने आ रही हैं। हमारे कार्यकर्ताओं ने अवैध खनन का वीडियो भी उपलब्ध कराया है। इसमें जिले के डीसी, एसपी, डीएमओ, स्थानीय पुलिस प्रशासन भी समान रूप से जिम्मेवार है।
पिछले 7 वर्षों में खदानों की नीलामी प्रक्रिया और खनन प्रबंधन को शिथिल कर हेमंत सोरेन अपने करीबियों के माध्यम से जल जंगल जमीन को लूट रहे हैं।
@dir_ed @CBIHeadquarters संज्ञान लेकर शीघ्र कारवाई करें।
@PMOIndia @HMOIndia @ANI @PTI_News @ians_india @AHindinews @BJP4Jharkhand
There are substantive outcomes in this Seychelles visit. Key MoUs have been signed. These include an MoU for the implementation of UPI in Seychelles, MoU on Jan Aushadhi and more.
We will keep working in futuristic sectors like climate action, green hydrogen, energy, the Blue Economy and more.
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने वर्ष 2015 में खनन प्रभावित जिलों के समग्र और सतत विकास के उद्देश्य से DMFT की स्थापना की थी, ताकि इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और आधारभूत सुविधाओं को मजबूती मिल सके।
लेकिन चाईबासा को पिछले लगभग 10 वर्षों में DMFT के माध्यम से करीब 3700 करोड़ रुपये तथा प्रतिवर्ष औसतन 300 करोड़ रुपये प्राप्त होने के बावजूद जिले में अपेक्षित विकास दिखाई नहीं देता।
मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी के स���रक्षण में इस फंड का दुरुपयोग और बंदरबांट हुआ, जिसका परिणाम यह है कि आज भी ऐसी संवेदनशील घटनाएं सामने आ रही हैं जहां एक पिता को अपने मृत बच्चे के शव को झोले में ले जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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