यह भाजपा और अन्न�� दोनों के हित में है। यह प्लान ऊपर से हरी झंडी के लिए पेंडिंग है। अन्ना के नाराज़ या बगावत की बातें ग़लत हैं। जो नाराज़ या बागी होता है वो सीधे ताल ठोंक देता है, उसे पार्टी के बड़े नेताओं से मिलने की क्या ज़रूरत है।
अन्नामलाई ने कुछ दिनों पहले भाजपा नेतृत्व को एक प्लान साझा किया था। तर्क दिया गया कि यह प्लान एक लॉन्�� टर्म प्लानिंग का हिस्सा है, जो “हाई रिस्क, मैक्सिमम रिवार्ड” टाइप है। अन्ना, भाजपा नेतृत्व को भरोसे में लेकर ही अगला क़दम उठाने जा रहे हैं।
ममता बनर्जी ने कहा कि वे इस्तीफा नहीं देंगी।
संभवत ऐसा पहली बार है जब चुनाव हारने के बाद कोई मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से इनकार करे
भारत के लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि यहां सत्ता का हस्तांतरण बिना किसी शोर-शराबे या ड्रामे के, शालीनता से होता आया है
चाहे एक वोट से ही क्यों न हारें, कोई प्रधानमंत्री हो या मुख्यमंत्री इस बात पर नहीं अड़ा रहता कि वह इस्तीफा नहीं देगा
चु���ाव हारने वाली ममता बनर्जी अकेली मुख्यमंत्री नहीं हैं
एम के स्टालिन भी चुनाव हार गए
आज लोक भवन जाकर इस्तीफा दे आए।
वहीं पिनाराई विजयन ने कल परिणाम आने के कुछ ही घंटे बाद इस्तीफा दे दिया था
ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देना चाहती हैं तो आगे क्या होगा
विधानसभा का कार्यकाल सात मई को समाप्त हो रहा है
उससे पहले चुनाव आयोग राज्यपाल को निर्वाचित विधायकों की सूची सौंप देगा
इसे गजट में प्रकाशित करते ही अगली विधानसभा अस्त��त्व में आ जाएगी
इसके बाद राज्यपाल नई सरकार के गठन की प्रक्रिया प्रारंंभ कर देंगे
इसी दौरान बीजेपी विधायक दल की बैठक होगी और नेता का चुनाव होगा
विधायक दल का नेता राज्यपाल से मिल कर सरकार बनाने का दावा पेश करेगा
राज्यपाल उन्हें शपथ लेने के लिए आमंत्रित करेंगे
नए मुख्यमंत्री के शपथ लेते ही नई सरकार काम प्रांरभ कर देगी
यह ममता बनर्जी पर होगा कि वे शपथ ग्रहण समारोह में आएं या न आएं
ममता ब��र्जी इस्तीफा न देना चाहें तो न दें
हमारे संविधान निर्माताओं ने ऐसी व्यवस्था की हुई है कि इस तरह के हालात आने पर भी कभी संवैधानिक संकट न हो
भारत में सत्ता के हस्तांतरण में संविधान का ब्रेकडाउन कभी नहीं हुआ है
"राहुल गांधी अर्बन नक्सल हैं।
राहुल गांधी के संबंध विदेश में बैठे देशद्रोहियों से हैं।
राहुल गांधी की सदस्यता रद्द होनी चाहिए और इन्हें भविष्य में चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।"
: निशिकांत दुबे, सांसद, भाजपा
कुछ लोग शोर मचाकर ताक़त दिखाते हैं,
और कुछ लोग खामोशी से इतिहास लिख देते हैं।
पिछले कुछ समय से दुनिया ने एक अजीब दृश्य देखा।
��भी सीज़फायर का श्रेय लेने की बेचैनी,
कभी तेल न खरीदने की धमकी,
कभी टैरिफ का डर दिखाना,
कभी बार-बार फोन कर दबाव बनाने की कोशिश।
दूसरी ओर भारत का प्रधानमंत्री -
न कोई ट्वीट-वार,
न कोई बयानबाज़ी,
न कोई भावनात्मक प्रतिक्रिया।
बस पूर्ण मौन।
दरअसल यह मौन कमज़ोरी नहीं था,
यह रणनीति थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंतज़ार कर रहे थे…
इंतज़ार इस बात का कि सामने वाला अपनी सारी आवाज़,
अपनी सारी चालें और
अपनी सारी “धमकी वाली ऊर्जा” खुद ही खर्च कर दे।
एक छोटी-सी कहानी
मान लीजिए एक गाँव में एक कारीगर रहता था।
शांत स्वभाव, मजबूत कद-काठी और तेज़ दिमाग़ वाला।
एक शाम वह काम से लौट रहा था।
उसके पास मेहनत की कमाई थी।
रास्ता सुनसान था।
अचानक सामने एक बदमाश आ गया।
कद में छोटा, पर हाथ में हथियार।
बदमाश बोला –
“जो है दे दे, वरना अंजाम बुरा होगा।”
कारीगर ने बिना बहस सब सौंप दिया।
लेकिन जाते-जाते उसने कहा –
“एक एहसान और कर दो,
मेरे कपड़ों पर निशान बना दो,
ताकि लोग समझें कि मुझ पर ज़ोर-जबरदस्ती हुई है।”
बदमाश ने घमंड में वैसा ही किया।
एक-एक कर उसने अपनी सारी गोलियाँ खर्च कर दीं।
जैसे ही आख़िरी आवाज़ थमी,
कारीगर मुस्कुराया…
और बोला –
“अब तुम्हारे पास सिर्फ़ खाली हथियार है,
और मेरे पास ताक़त भी है और समझ भी।”
अगले पल सच्चाई पलट चुकी थी।
यही अंतर है
प्रधानमंत्री मोदी ने भी यही किया।
उन्होंने न उकसावे में जवाब दिया,
न दबाव में निर्णय बदला,
न किसी धमकी से भारत का रास्ता बदला।
वे जानते थे -
जो देश सिर्फ़ बयान देता है,
वह एक दिन खुद अपने शब्दों के बोझ से थक जाता है।
आज न वो दावे सुनाई देते हैं,
न वो चेतावनियाँ,
न वो टैरिफ की आवाज़ें।
भारत अपने हित में आगे बढ़ रहा है,
निर्णय अपने अनुसार ले रहा है,
और दुनिया चुपचाप यह बदलाव देख रही है।
यही नेतृत्व होता है
प्रधानमंत्री मोदी ने यह साबित किया कि
सच्ची ताक़त ऊँची आवाज़ में नहीं,
संतुलन और आत्मविश्वास में होती है।
जहाँ कुछ नेता सुर्ख़ियों के पीछे भागते हैं,
वहीं भारत का प्रधानमंत्री
देश के भव���ष्य की नींव मजबूत करने में लगा है।
आज भारत की अंतरराष्ट्रीय साख बढ़ रही है,
और भारत को नज़रअंदाज़ करना
अब किसी के लिए आसान नहीं रहा।
मोदी को समझना आसान नहीं…
और शायद यही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।
🇮🇳 एक भारतीय होने का गर्व 🇮🇳
जब नेतृत्व शांत होता है,
तो राष्ट्र निडर बनता है।
और जब राष्ट्र निडर होता है,
तो इतिहास दिशा बदलता है।
श्री शरद राय जी✍️
आज कांग्रेस का यह ट्वीट साझा कर रहा हूँ।
हमारी बात तो शायद उन्हें चुभती है,
कम से कम पंडित जवाहरलाल नेहरू जी ���ी ही सुन लें।
मनरेगा में जो बदलाव हुए हैं,
वे अधिकार छीनने के लिए नहीं,
भ्रष्टाचार रोकने, पारदर्शिता बढ़ाने
और मज़दूर के पसीने का पूरा मूल्य दिलाने के लिए हुए हैं।
अज्ञानतावश इसका विरोध ना करें
आ गयी वो मूवी जिसने दिलों में आग जला दी है!
आस्था का बल… शासन का गर्व!
संन्यासी का तप… और मुख्यमंत्री का तेज!
एक साधु से शासक तक का अद्भुत सफ़र!
#Ajey: The Untold Story of a Yogi
पत्रकार- आपके पास ब्लैक-वाइट पुख़्ता सबूत है तो कोर्ट जाएँगे ??
राहुल - मेरा काम लोकतंत्र बचाने का नहीं है
मतलब - कोर्ट नहीं जाना, फिर तो तेरे आरोप ग़लत है
ये पनौती का काम केवल जनता को भ्रमित करना है
अब ये बंदा पूरी तरह बे���क़ाब हो चुका है 🤣