@swatntra_anuj जिस देश में 78 साल से जाति के नाम पर कानून बनता हो
वहां पर हिंदू एकता की बात करना मूर्खता है,
इस्लाम मेरे बच्चे को नुकसान पहुंचाएगा या नहीं, ये तो मुझे नहीं पता।
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उस भाई को तो मै भी फॉलो कर रहा काफी दिन से..
केवल और केवल देश के बच्चों के लिए लड़ रहा..
इधर विदेशी कम्पनियां और डोमेस्टिक कंपनियां उसके खिलाफ और इधर प्रशासन भी उसका सहयोग करने के बजाए पूरा उसके ही खिलाफ हो
EWS यह लड़ाई किसी जाति,
धर्म या वर्ग विशेष की नहीं, बल्कि उन सभी असल हकदारों के अधिकारों की लड़ाई है,
आओ @RavindraBhati__ के साथ चलें..✊🏻🔥
#सरलीकरण#EWS_सरलीकरण
हर मुसीबत में देश,देश के लोगों के लिए सबसे आगे खड़ा होकर लड़ते ब्राह्मण
मुगलों अंग्रेजों कोंग्रेस से देश को मुक्ति दिलाने वाला ब्राह्मण,जान की परवाह किए बिना 174 लोगों और हिन्दुओं की इज्जत बचाता है
उसी ब्राह्मण के नरसंहार के नारे यहाँ गली में लगता है
देश से बाहर निकालने की बात
Yes,@neha_laldas, those who wrote such vicious lies in school text books, deserve severe punishment, preceded by a Nuremberg type trial!.
But you know very well that the writ of the @PMO runs in all such matters.
All his ministers, including the education minister, are lowly rubber stamps. And our PM himself is a grovelling rubber stamp for the Conversion Mafia.
Are you ready to take on PM Modi for his Desh and Drohi actions?
नमस्ते @IndiGo6E@airindia@AirIndiaX
हम इंडिगो एवं एयर इंडिया के फ्रीक्वेंट फ्लायर है, आपसे अनुरोध है की मुसलमानों को पायलट या क्रू मेम्बर में ना रखें,
ये जिहादी अब पूरे विश्व के लिए और मानवता के लिए खतरा बन चुके है।
चंद्रशेखर आज़ाद का जनेऊ परेशान करता था और स्मित माच्छर का कलावा चिढ़ा रहा है ⭕️
इतनी बड़ी घटना पर कांग्रेस, सपा समेत पूरे विपक्ष का ख़ामोश रहना शर्मनाक है
#FlyDubai
ग़ाज़ियाबाद पुलिस हर छोटी छोटी बात पर कूद कर जवाब देती है, पत्रकारों के घर पर आधी रात को कई थानों की फ़ोर्स भेज देती है लेकिन इस सांसद के खिलाफ NBW होने के बाद भी डर के मारे हाथ थर थर काँप रहे हैं ….
आज हम फिरोजाबाद जा रहे हैं बढ़िया चूड़ियों का सेट लेकर आते हैं….!!
जब तक पत्रकार और जनता नेताओं के मुँह ऐसे सवाल नहीं करेगी तब तक इनको फर्क़ पड़ेगा! #scstact (Modi Act) के खिलाफ सब लोग @BJP4India के नेताओं पर सवाल करे!
सवर्णों लिख नहीं सकते तो रीट्वीट तो कर सकते हो...
तुम्हारे हिस्से की लड़ाई लड़ रहे लोगों को संबल दो, साथ दो, यह लड़ाई छोटी नहीं है...भाई प्रीत सिंह जैसे राष्ट्रवादी लोग निरंतर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
हम समाज को टूटने नहीं देंगे....
घर घर जाकर जगाते रहेंगे और सिर्फ़ दो बात करेंगे।
SCST मोदी एक्ट के दुरुपयोग पर रोक...
#UGC_Rollback को रद्द होने तक...
गांधी जयंती पर गांधी की प्रासंगिकता को समझते हैं। आज की जातीय बहस को गांधी के माध्यम से भली भांति समझा जा सकता है।
पूरा लेख🖋️ज़रूर पढ़ियेगा।
गांधी के मुस्लिम विमर्श को एक समय के लिए अलग रखकर उनकी हिंदू समाज की समझ और आगे का रास्ता हमें आज के विमर्श को भी ठीक तरह से समझाता है।
जब गांधी ने कहा कि अब आज़ाद हो गए हैं, अब कांग्रेस पार्टी को ख़त्म कर देना चाहिए, तो ये बात एक मायने से भले ही तर्क संगत न लगे, क्यूँकि प्रजातांत्रिक व्यवस्था पार्टी और चुनाव के माध्यम से ही आगे बढ़ती है, पर गांधी के इस विचार के पीछे एक और सच्चाई थी जो कोई भी दल या समर्थक स्वीकार करने से कतराता है। या शायद उसकी समझ ही भौंडी है।
गांधी इस बात को भली भांति जानते थे कि भारतीय समाज विसंगतियों से भरा है। इसके अंदर कई तरह के फाल्ट लाइन हैं जिसे अंग्रेज़ों ने राजनीतिक और सामाजिक रूप से और भी बढ़ाया है। ऐसे में इस देश को बेहतर बनाने के लिए न सिर्फ सत्ता हासिल करनी होगी बल्कि एक आंदोलन की तरह ग़ैर-राजनीतिक रूप से ज़मीन पर लंबे समय तक काम करना होगा। तभी समाज बदलेगा और राजनीति सुचारू रूप से चल पाएगी।
गांधी पूना पैक्ट और बाद के राजनीतिक खींचतान को देखकर समझ गए थे कि सिर्फ़ स्टेट की एजेंसी मात्र से ही हिंदू समाज और भारत को एक नहीं रखा जा सकता। बल्कि आंदोलन का रूप लेकर ग़ैर-राजनीतिक तरीकों से सामाजिक और सांस्कृतिक एक जुटता लानी होगी। वो देख रहे थे कि कांग्रेस मात्र एक पार्टी का रूप लेती जा रही है और सिर्फ़ चुनाव एवं सत्ता केंद्रित हो रही है। इसीलिए उन्होंने ऐसा कहा कि कांग्रेस को भंग कर देना चाहिए। भले ही इस बात में तर्क न हो पर कारण में बहुत दम है।
हुआ भी वही। गांधी के बाद कांग्रेस एक पार्टी बनकर रह गई जो सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती थी। वो क़ानून, व्यवस्था, संविधान, आरक्षण और राजकीय नीतियों से समाज बदलना चाहती थी, पर स्टेट की रीच उतनी होती नहीं है। पार्टी और पॉवर के ज़रिए ऊपर से समाज बदलना ना-मुमकिन है क्यूंकि सत्ता के लिए समझौते करने पड़ते हैं। इसलिए आंदोलन के ज़रिए लंबे समय में ज़मीन पर काम करके समाज को नीचे से बदलने का प्रयास आवश्यक है। कांग्रेस आज़ादी के बाद पार्टी बनकर सिर्फ़ ऊपर से ऑपरेट करती रही। और अंत में फेल हुई तथा सत्ता से बाहर गई।
संघ-भाजपा के साथ मामला थोड़ा अलग सा दिखा। इन्होंने शुरुआत सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलन से किया और बाद में पार्टी का रूप धारण किया। बाद में ये दोनों स्वरूप समानांतर कार्य कर रहे थे। गांधी के चश्मे से देखें तो ये सबसे उपयुक्त फार्मूलेशन है। और बाक़ी लोगों को भी लगा कि इसी तरीक़े से, यानी ऊपर से बीजेपी-सरकार और नीचे से संघ-कार्यक्रम, समाज को सार्थक रूप में बदला जा सकता है ताकि राष्ट्र आगे बढ़े।
पर फिर ये मॉडल फेल होने लगा। एक व्यक्ति की महत्वाकांक्षा इस मॉडल पर हावी होने लगी। नीचे से समाज बदलने का काम दशकों का है, उसमे समय लगता है, संघ अपने तमाम दावों के बावजूद सफल नहीं हो पाया। वो दलित सांस्कृतिक पक्ष को न्यूट्रलाइज नहींकर पाया। संघ सत्ता पाकर भ्रमित हो चुका है। समाज को बदलने की जगह, ख़ुद को समझा रहा है और राजनीतिक सत्ता के लिए विचारधारा में बदलाव को सहर्ष स्वीकार रहा है। उसे भी सत्ता का स्वाद आ चुका है। वो अपना आंदोलन वाला स्वरूप खो रहा है और सत्ताधीश की तरह बर्ताव कर रहा है।
दूसरी ओर से सरकार बहादुर जातिगत राजनीति के दलदल में कूद चुकी है और धँसते जा रही है। विमर्श टॉक्सिक हो चुका है, नीतियाँ जात-पात की खूँटी पर टिक गई हैं। कुल मिलाकर संघ-भाजप का “आंदोलन/पार्टी” वाला दोहरा स्वरूप ख़त्म हो गया है और अब सिर्फ़ पार्टी रह गई है, या यूँ कहें कि अब पार्टी भी नहीं रही, सिर्फ़ एक व्यक्ति है।
ऐसे में गांधी के वो वाक्य जो कांग्रेस के लिए बोले गए थे वो प्रासंगिक होते जान पड़ रहे हैं। भले पार्टी भंग करने की बात तर्क संगत नहीं पर जो लोग इस भ्रम में हैं कि स्टेट की एजेंसी का प्रयोग कर आरक्षण और जातिगत फायदों का बंदरबांट करने से ये रिपब्लिक आगे बढ़ जाएगा, उनका भ्रम ज़रूर टूटेगा। आज टूटे या कल, टूटना निश्चित है।
गांधी समाज बदलना चाहते थे ताकि राजनीति सुचारू रूप से चले, आज के सत्ताधीश राजनीति बदलना चाह रहे हैं ताकि ख़ुद की सत्ता को सुचारू रूप से चला सकें,भले समाज कहीं भी जाये । सोचना जनता को है कि ये तो अपना कार्यकाल सुचारू रूप से चला लेंगे, पर इसके लिए जो असंतुलन ये समाज और राजनीति में देकर जायेंगे उससे वो कैसे निपटेंगे।
गांधी को खारिज करने वाले लोगों के पास भविष्य का कोई खाका नहीं है, सिर्फ 2047 का जुमला है। आप उस भ्रम में रहिए और मज़े कीजिए।
हमारे पंकज धवरैय्या को दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार
शांतिपूर्ण पदयात्रा को 21 वे दिन dcm चौक पर रोक लिया गाड़ी मोबाइल जब्त। मारपीट सवर्णों देखो इस मोदी दिल्ली पुलिस की गुंडागर्दी
#UGC#RollBack#bjp
पंकज धवरैय्या की पदयात्रा रोककर दिल्ली पुलिस ने की मारपीट सबकी गिरफ्तारी की गई पंकज धवरैय्या जी की नाक से खून निकला
जैसा जैसा 11 अक्टूबर पास आ रहा है दिल्ली पुलिस क्यूपीएन रंग दिखा रही हैमोदी जी ने फिर दिखा दी तानाशाही
21 वे दिन पंकज धवरैय्या की पदयात्रा करोलबाग DCM चौक पर रोकी गई
वाह दिल्ली पुलिस शर्म करो।
@DelhiPolice@CMRekhaGuptaFC
#UGCReservation
#SCSTएक्ट
#ReservationReform