वंदे मातरम् पर हल्ला मचाने वाले BJP प्रवक्ता को जैसे ही वंदे मातरम् सुनाने बोला, वो डिबेट छोड़कर भाग खड़े हुए। 15 मिनट बाद याद करके जुड़े तब भी पूरा वंदे मातरम् नहीं सुना पाए।
ये दिमागी नक्सली दूसरों का राष्ट्रप्रेम नापने चले है!
एंकर भी हंसी नहीं रोक पा रहे है।
(कमेंट में वो विडियो देख सकते है, जहाँ वो 4 लाइन याद करके बोल रहे है मगर उसके बाद का पूरा नहीं सुना पा रहे)
मध्य प्रदेश के मंडला का एक से पांचवी कक्षा तक के बच्चों का ये सरकारी स्कूल देखिए।
स्कूल की ना कोई पक्की इमारत है,ना बैठने के बेचें हे।
एक झोपड़ी जैसी आकृति से भारत का भविष्य पढ़ रहा है।
#TrimmersKaBaap#AvaadaDeshKiMitti
Amorim
#astrosumitbajaj
अभी थोड़ी देर पहले भाजपा के गुंडे स्कूल में घुस आए और हमारे टीम के लोगों के साथ मारपीट की। बच्चों के सामने।
और यह सब जब हुआ, तब थानागाजी के SHO ने अपनी पूरी टीम पीछे कर ली।
भाजपा के गुंडो से हम डरने वाले नहीं है। स्कूल तो हम ठीक कराकर ही मानेंगे।
•यह तो बिल्कुल किसी फिल्मी दृश्य जैसा है😎
•13 अगस्त को राहुल गांधी ने कहा था कि नरेंद्र मोदी प्रेस कॉन्फ्रेंस इसलिए नहीं करते, क्योंकि वे 5 मिनट तक भी ठीक से बात नहीं कर पाते
•ठीक 36 घंटे बाद 😭
•15 अगस्त को नरेंद्र मोदी भाषण के दौरान कई बार शब्दों में उलझते हुए दिखाई दिए और टेलीप्रॉम्प्टर न होने के कारण उन्हें बोलने में कठिनाई का सामना करना पड़ा
इसे ही कहते हैं बिल्कुल नास्त्रेदमस वाली भविष्यवाणी!
एकदम सरकारी स्कूलों के छात्रों को एक दिन भी बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। कितने साल से रिपोर्ट आ रही है कि दसवीं में पहुंच गए, छठी का गणित नहीं बना सकते। इन छात्रों को जल्दी ही अच्छे शिक्षक और निरंतर पढ़ाई की मांग करनी होगी। बच्चे रोज़ स्कूल जाते हैं, मेहनत करते हैं मगर स्कूल उन्हें ख़राब कर देता है।
मोदी के लिए
जंतर मंतर के युवा/प्रदर्शनकारी /आंदोलनकारी 'दिमागी नक्सल' हैं .
सरकार की नीतियों की आलोचना करने वाला विपक्ष 'दिमागी नक्सल' है .
सवाल पूछने वाले पत्रकार और बुद्धिजीवी 'दिमागी नक्सल' हैं .
NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्र 'दिमागी नक्सल' हैं .
सरकार के दावों और वादों पर घेराबंदी करने वाले किसान 'दिमागी नक्सल' हैं.
सरकार की शिक्षा और परीक्षा नीति के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लाखों बेरोजगार युवा 'दिमागी नक्सल' हैं .
सरकार के मुनादी ब्रिगेड में जो भी शामिल नहीं हैं, सब 'दिमागी नक्सल' हैं.
आज़ादी की 80वीं सालगिरह के मौके पर मोदी ने अपने आलोचकों और विरोधियों के लिए नया शब्द गढ़ा है
'दिमागी नक्सल'
कई सालों तक अर्बन नक्सल के तमगे के बाद नया तमगा है 'दिमागी नक्सल '
मोदीजी, बुरा वक्त आता है तो सब साथ छोड़कर भागते हैं।
आपके चीयर लीडर रहे रामदेव भी आंदोलन करने की धमकी दे रहे हैं।
भ्रष्टाचार ख़त्म करने के लिए वार्निंग दे रहे हैं।
अब तो समझ जाइए हवा का रुख बदल चुका है,
या अभी भी युवाओं के आंदोलन को हल्के में ले रहे हैं?
सब छोड़िए ये बताइए, बाबा रामदेव आपको अर्बन नक्सल लग रहे हैं कि नहीं लग रहे हैं।