दिल्ली विश्वविद्यालय गुंडों के द्वारा चलाई जाती है,
प्रोफेसर के रूम में कितनी देर जाकर बैठोगे उस हिसाब से नंबर दिए जाते है।
- चित्रा, DU छात्रा
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सामाजिक न्याय के संघर्षों का यादगाव ऐतिहासिक दृश्य. उत्तर भारत में दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों की आवाज़ को दिल्ली में ललकार कर पहुँचाने वाले लोग एक फ़्रेम में दिख रहे हैं. मरहूम नेताजी और लालू जी के साथ दिशोम गुरु शिबू दा.
सामाजिक न्याय की लड़ाई का बुनियादी सिद्धांत ही सांप्रदायिक नफ़रत की दंगाई राजनीति का विरोध और समता व न्याय है. मरहूम शिबू दा को ग़ौर से सुनिए. इस बहुजन एका को सलाम. यहाँ आईडिया ऑफ़ इंडिया की बुनियाद नज़र आएगी.
हमारी पीढ़ी के लोगों को अपने पुरखों के इसी संघर्ष को हर मुश्किल वक़्त में भी ज़िंदा रखना है. हमारे नायक हमारे संघर्षों में तनी मुट्ठियों में ज़िंदा रहेंगे. ये एक विचारधारा के लिए लड़े. इसका ख़ामियाज़ा भी भुगता, मगर न झुके और न समझौता किया.
जोहार दिशोम गुरु
जोहार हमारे वैचारिक अगुआ
बच्चों का नाम लगाकर नेहरू जी और गांधी जी पर सवाल उठा रहीं थीं ANI वाली साहिबा,
Khan Sir तो खान सर हैं... पढ़े लिखे आदमी हैं। एक वाक्य में सारा एजेंडा फेल कर दिया।
बेमिसाल हैं Khan Sir🔥🔥🔥
People don’t speak up against the government because of this bullying by platforms like @Meta !!
#MetaRestoreRantingGola
Itna bhi mat darao ki dar khatam hojaye!
जयपुर में PM Unity Mall प्रोजेक्ट के लिए 2,500 से अधिक पेड़ काटकर 100 एकड़ जंगल को उजाड़ा जा रहा हैं। हजारों पक्षी-जानवर को बेघर किया जा रहा हैं। और उधर आप लोगों को "एक पेड़ मां के नाम" जैसा अभियान दिखाकर मूर्ख बनाया जा रहा है। ये विकास नहीं, विनाश है।
नेतृत्व की एक मिसाल: अखिलेश यादव और एक संघर्षशील छात्रा की प्रेरणादायक कहानी
नेतृत्व केवल सत्ता में होना नहीं होता, बल्कि आम लोगों के संघर्ष और सपनों से जुड़ने की संवेदनशीलता ही सच्चे नेतृत्व की पहचान होती है। हाल ही में लखनऊ की एक चाय की दुकान पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव की एक साधारण-सी मुलाक़ात, असाधारण प्रेरणा का कारण बनी।
अखिलेश यादव किसी आम दिन चाय पीने के लिए लखनऊ की एक दुकान पर पहुँचे। चाय की चुस्कियों के बीच उन्होंने महसूस किया कि यह दुकान कोई साधारण दुकान नहीं है। जब उन्हें यह ज्ञात हुआ कि यह चाय की दुकान एक युवती चला रही है, जो स्नातक के अंतिम वर्ष में पढ़ाई कर रही है, तो वे बेहद प्रभावित हुए। उस लड़की ने शिक्षा और आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन बनाते हुए जिस तरह से अपना जीवन गढ़ा था, वह न केवल सराहनीय था बल्कि आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा भी है।
इस संघर्षशील छात्रा की मेहनत और आत्मसम्मान से प्रभावित होकर अखिलेश यादव ने उसे ₹21,000 का चेक भेंट किया, ताकि उसकी शिक्षा और आत्मनिर्भरता की राह और मजबूत हो सके। यह मात्र आर्थिक सहायता नहीं थी, बल्कि उस मेहनतकश युवती के हौसले को सलाम था। यह एक राजनेता की संवेदनशीलता, समझ और ज़मीनी जुड़ाव को दर्शाता है।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि राजनीति केवल भाषणों और नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जब कोई नेता आम जनता के साथ खड़ा होता है, उनके संघर्ष को समझता है और उन्हें आगे बढ़ाने में मदद करता है, तभी वह सच्चे अर्थों में जननेता कहलाता है। अखिलेश यादव की यह छोटी-सी पहल समाज को यह संदेश देती है कि शिक्षा, परिश्रम और आत्मनिर्भरता के रास्ते पर चलने वालों को प्रोत्साहित करना हम सबकी ज़िम्मेदारी है।
यह कहानी सिर्फ़ एक लड़की की नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं की है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने की हिम्मत रखते हैं। अखिलेश यादव जैसे नेताओं की संवेदनशीलता ही ऐसे युवाओं को अपने लक्ष्य तक पहुँचने की ताक़त देती है। यह घटना आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाती है कि यदि आप मेहनत और ईमानदारी से अपने रास्ते पर चलें, तो समाज भी आपको सम्मान और समर्थन देने को तैयार रहता है।
सच में, यही तो होता है सच्चा नेतृत्व — जो लोगों को देखता है, समझता है और आगे बढ़ने का हौसला देता है।
@yadavakhilesh
प्रयागराज के टिकरी में सत्यम शिवम शुभम फॉर्मेसी कॉलेज है। वीडियो में जो गुंडई करते और छात्र को मारते नजर आ रहे वह इसके प्रबंधक संजय शुक्ला हैं।
बी-फॉर्मा फर्स्ट ईयर के छात्र अपनी बात रखने इनके पास गए थे। क्योंकि उनके साथ धोखा हुआ है। 16 मई से परीक्षा है लेकिन एडमिट कार्ड ही नहीं डाउनलोड हो रहा। वजह यह कि छात्रों का AKTU में रजिस्ट्रेशन ही नहीं हुआ है।
छात्र को पीटने वाले प्रबंधक महोदय इलाके में बदनाम हैं। छात्र कहते हैं कि ये अक्सर नशे में रहते हैं। @AKTU_Lucknow को उचित कार्रवाई करनी चाहिए।