इन लोगों को बंगाल की जनता ने BJP के ख़िलाफ़ चुना था
तो जब पलटी मारी ही है तब थोड़ी हिम्मत भी दिखायें
संसद की सदस्यता से इस्तीफ़ा दें और जाकर चुनाव लड़ें
गद्दार जैसे मुँह लटकाये खड़े रहने से क्या होगा?!
आपका नाम अश्विनी वैष्णव है।
आप रेल मंत्री हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर “रील मंत्री” के नाम से ज्यादा फेमस हैं।
अब आपने भरोसा दिलाया है कि IRCTC की खराब वेबसाइट 30 दिनों में अपडेट हो जाएगी।
वही IRCTC, जहां टिकट से पहले यात्री CAPTCHA से कुश्ती लड़ता है।
वही IRCTC, जहां तत्काल बुकिंग 10 बजे शुरू होती है और उम्मीद 10:01 पर दम तोड़ देती है।
वही IRCTC, जहां लॉगिन फेल, OTP लेट, पेमेंट हैंग, पैसा कट और अंत में नतीजा - वेटलिस्ट या रिग्रेट।
पिछले 3,037 दिनों से यात्री वेबसाइट पर बुलेट ट्रेन नहीं मांग रहे।
वे बस इतना चाहते हैं कि टिकट बुक करते समय सिस्टम इंसानों जैसा काम करे , सरकारी दफ्तर जैसा नहीं।
डिजिटल इंडिया में एक ट्रेन टिकट बुक करना अगर UPSC प्रीलिम्स जैसा लगने लगे , तो समस्या यात्री की नहीं , सिस्टम की है।
छुट्टी का अर्थ क्या है?
विदेश यात्राएँ भी, मंदिर दर्शन भी, लक्षद्वीप के समुद्र तट भी देखे गए, समुद्र के भीतर की तस्वीरें भी आईं।
अगर विदेश यात्रा, धार्मिक यात्रा, समुद्र तट पर जाना, प्रकृति के बीच समय बिताना, अच्छा भोजन करना और आराम करना भी छुट्टी नहीं है,
तो फिर मुझे लगता है इस देश में कोई भी छुट्टी नहीं ले रहा।
हर आदमी काम ही कर रहा है - कोई मनाली में काम कर रहा है, कोई गोवा में, कोई परिवार के साथ, कोई दोस्तों के साथ।
2014 से 2026 के बीच प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हुए। असली बहस यह है कि इन दौरों से भारत को कितना निवेश मिला, कितने रोजगार बने और व्यापार हितों को कितना लाभ हुआ?
देश का आम आदमी नहीं देखता कि नेता ने कितने घंटे काम किया, वह देखता है कि उसके जीवन में क्या बदला।
जिस युवा का पेपर लीक हो गया, जिस किसान को फसल का दाम नहीं मिला, जिस मरीज को अस्पताल में बेड नहीं मिला, जिस परिवार की नौकरी चली गई - उसे 18 घंटे और 20 घंटे के से क्या फर्क पड़ता है?
18 घंटे काम करने का काम का परिणाम क्या निकला? शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, न्याय और नागरिक सुरक्षा के मोर्चे पर देश कहाँ पहुँचा।
युवा पूछ रहा है कि डिग्री के बाद नौकरी कब मिलेगी?
आम आदमी भी अपनी नौकरी में भी 12-14 घंटे खटता है, मजदूर धूप में पूरा दिन काम करता है, किसान बिना रविवार के खेत में उतरता है।
सवाल यह नहीं कि किसने कितने घंटे काम किया। सवाल यह है कि उस काम का परिणाम क्या निकला।
अगर काम का पैमाना सिर्फ घंटे हैं, तो इस देश का सबसे बड़ा कर्मयोगी शायद वह मजदूर है जो रोज़ दो वक्त की रोटी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देता है।
मीडिया पर भरोसा क्यों खत्म है?
ईरान भारत के नागरिकों की मौत का बदला क्यों लेगा?
भारत एक संप्रभु देश है। भारत इतना असहाय है? कि उसके नागरिकों का न्याय भी दूसरे देशों के भरोसे लिखा जाए।
अगर भारतीयों की जान गई है, तो सबसे पहले भारत की प्रतिक्रिया और भारत के हित की बात होनी चाहिए, न कि किसी दूसरे देश की कार्रवाई को भारतीयों के बदले के रूप में पेश करना।
4 मई को बंगाल इलेक्शन का रिजल्ट आता है
VVPAT की पर्चीयां एक दिन पहले कूड़े के ढेर पर मिलती हैँ
50+ सीट्स पर आये रिजल्ट पर विपक्ष आपत्ति जताता है.
कल ही Rajarhat सीट के रिजल्ट में गड़बड़ी पता लगती है.
आज 4000 ईवीएम जलकर राख़ हो जाती हैँ
ज्ञानेश कुमार की जय हो 🙏
मज़ाक चल रहा क्या?
Retail investor का मेहनत का कई हज़ार करोड़ के साथ भरोसा भी डूब गया -Rajesh Exports वाले मामले में SEBI ने company और उसके chairman rajesh मेहता को बाजार से ban कर दिया है |
मेरा सवाल है कि इतने महीने पहले शिकायत आने के बाद रेगुलेटर ने इतनी देर क्यों लगाई और क्या रिटेल इन्वेस्टर्स की हितों क़ी सुरक्षा के लिए System वाकई काम कर रहा है?
SEBI के 3 जून 2026 के इंटरिम ऑर्डर के मुताबिक, Rajesh Exports ने FY21–FY25 के बीच लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये की consolidated revenue गलत तरीके से रिपोर्ट की, जिसमें से 99.8% पर सवाल उठे हैं।
Rajesh Exports में लगभग 2 लाख retail shareholders हैं और LIC जैसी बड़ी संस्थाएं भी निवेशक हैं, जिनका हज़ारों करोड़ का exposure है
SEBI के ऑर्डर और मीडिया विश्लेषण के हिसाब से public wealth में अनुमानित 10–13 हजार करोड़ रुपये तक की erosion की बात हो रही है|
एक shareholder की शिकायत से शुरू हुई जांच ने दिखाया कि लगभग पूरा consolidated revenue ही सवालों के घेरे में है – क्या SEBI की routine surveillance इतनी कमज़ोर है कि इतना बड़ा “mess” बिना शिकायत के पकड़ में नहीं आता?
सिस्टम में किसकी जवाबदेही थी ये ? अगर 15.15 लाख करोड़ की revenue misreporting कई साल से चल रही थी, तो auditors, stock exchanges और SEBI के surveillance सिस्टम – तीनों की निगाहों से ये सब कैसे बचा रहा?
Retail investors से रोज़ कहा जाता है “do your own research” – लेकिन जब SEBI के ऑर्डर के मुताबिक 99.8% revenue ही सवालों के घेरे में हो, तो आम investor किस data पर भरोसा करे?
LIC जैसे public money वाले संस्थान भी इस कंपनी में exposed हैं; क्या संसद में ये सवाल नहीं उठना चाहिए कि regulator और PSU investors की risk oversight क्यूँ चूकी?
Rajesh Exports का केस सिर्फ एक कंपनी का नहीं, ये सवाल उठाता है: क्या हमारे बाजार में corporate fraud पकड़ने वाली व्यवस्था “proactive” है या सिर्फ शिकायत आने पर active होंगी और जब तक लोगो की गाडी कमाई स्वाहा हो चुकी होंगी!!
राजेश मेहता से भी इनका पुराना नाता है
ठीक वैसे ही जैसे आसाराम बापू, मेहुल चोकसी, नीरव मोदी से है
कोई भी जालसाज हो - महामानव का पुराना नाता निकल ही आता है!
सालों से नफ़रत और धर्म के नाम पर लड़वाने वाले अपना जमीर बेचकर पत्रकारिता को धंधा बनाकर देश के साथ हर मुद्दे पर छल और झूठ से जनता को गुमराह करने वालो की अब देश की जनता के सामने सच्चाई आने लगी है !
Main Stream मीडिया पर जनता की विश्वसनीयता ऐसे ही कम नहीं हुई !
एक दशक तक जनता के साथ विश्वासघात किया है ।
हर वक्त जब जब देश के लोगो चाहे किसान, छात्र मजदूर हो या आम जनता की परेशानी स्टूडियो में बैठे कुछ लोगो ने हमेशा इनकी पीड़ा का मजाक किया है !
जनता सच्चाई जान गई है और अब और सच्चाई आज भी जानेगी ।
देश बदलने की शुरूरात हो चुकी है - वो भी media और शिक्षा व्यवस्था पर गहरी चोट से।।
मिलते है आज रात 9:00 बजे असली #PrimeTime में
देश के असली मुद्दे के साथ ! जय हिन्द ! 🙏🏻
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