भूल सा गया हुं आवाज तुम्हारी
क्यों ना एक दिन बात कर ले
थोड़ी कम हो गई है सरारते मेरी
क्यों ना एक दिन खुराफात कर ले
जनता हु बिगड़े है हालात कई
चाहो तो सही सब हालात कर ले
जब भी गुजरती है यादों की हवाएं
दिल करता थाम लूं, थोड़ी सी इन्हें
अब तो अरसा हो,गया तुमको देखे
चलो ना एक दिन,