यूपी रेरा के वसूली आदेशों के बावजूद, मैस॰ आइडिया बिल्डर प्राइवेट लिमिटेड गाज़ियाबाद (मंजू जे ग्रुप) के खिलाफ जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं, घर खरीदारों में भारी नाराजगी https://t.co/doDI9kW9f0
दिल्ली हाईकोर्ट ने भी 2025 के अपने एक ऑर्डर में कहा है किसी भी विवाद के चलते बच्चों का दस्तावेज स्कूल द्वारा नहीं रोके जा सकते , शिक्षा का अधिकार बच्चों का कानूनी अधिकार है परंतु ये विद्यालय , अधिकारी सब कानून से ऊपर है जहां मामला उनके अधिकार क्षेत्र का होकर भी बच्चों को शिक्षा
नहीं दिए गए है l न ही स्कूल द्वारा, न ही जिलाधिकारी द्वारा अभिभा��क से संपर्क किया गया है बच्चों की वार्षिक रिपोर्ट और स्थानांतरण प्रमाणपत्र बच्चों को दिया जाना बच्चों का कानूनी अधिकार है जहां विद्यालय अपनी जांच नहीं होने दे रहा आयोग को भी 6 माह से ज्यादा समय से गुमराह कर रहा ,
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में मेरी शिकायत पिछले सत्र 2024-25 की थी नया सत्र भी आधा जा र���ा है अभी तक न डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और न ही जिला शिक्षा अधिकारी सेज इंटरनेशनल स्कूल, भोपाल की जांच कर पाए है स्कूल आयोग को भी गुमराह कर रहा है @CMMadhyaPradesh @EduMinOfIndia @India_NHRC
ये ����� बच्चों की समस्या नहीं है बात है स्कूल व्यवस्था की, आज के समय में स्कूल का प्रबंधन गायब रहता है,कुछ स्कूल जो व्यवसाई चला रहे वह तो अपना नाम ही सामने नहीं आने देते, स्कूल जब फीस की बात करता है तो समस्याएं कौन एड्रेस करेगा ? ये एकतरफा प्रणाली जो बढ़ रही है , साथ ही अनियमित फीस
वृद्धि , खतरनाक परिवहन,अनुचित फाइन, अनियमित शैक्षिक सत्र , अनियमित परीक्षा प्रणाली, बच्चों में भय का वातावरण बनाना, शिकायत करने पर बच्चों को प्रताड़ित करना उनपर झूठे आरोप लगाना ,ये हर व्यवसाई के स्कूल में है,ये सब सिर्फ एक स्कूल की समस्या नहीं है, हर प्रदेश और जिले की समस्या है,
इस तरह से स्कूल सैकड़ों बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करते है ,जब मानवाधिकार आयोग की लोकल एडमिनिस्ट्रेशन नहीं सुन रहा तब आम आदमी की सुनवाई पर क्या ही कार्यवाही होगी?
जारी करना है,उन आदेश का पालन हो रहा है या नहीं उन्हें अधिकारी अपने काम का हिस्सा नहीं मानते , शिकायत आएगी तो देखा जाएगा और शिकायत कोई क्यों करेगा जबकि चोरी और भ्रष्टाचार से विद्यार्थियों का भला हो रहा हो...
सार ये है कि डमी स्कूल को बं�� करने की बात पर बात करना ही बेकार है...😀😀
डमी स्कूल को रोकने का कानून सिर्फ चोरी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला है, कारण
सी.बी.एस. ई. ११ वी और १२वीं पाठ्यक्रम को इतना निम्न स्तर का कर दिया गया है कि उससे पढ़कर जॉइंट एंट्रेस एग्जाम इत्यादि प्रतियोगी प्रवेश परीक्षा को उत्तीर्ण नहीं किया जा सकता है l
उसकी प्रतिभा का बेहतर उपयोग हो और प्रतिभानुसार उचित वेतन वह प्राप्त कर सके l
अतः क्यों विद्यार्थी अपना बहुमूल्य २ वर्ष स्कूली शिक्षा में बर्बाद करना चाहेगा सिर्फ बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए? जाहिर है वह चोरी और भ्रष्टाचार के रास्ते ढूंढेगा जहां सिस्टम का काम सिर्फ आदेश