अनुष्ठान से आत्मशक्ति जागृत होती है। मंत्र में जितने अक्षर हैं, उतने लाख, उतने हजार, उतने सौ और उतने मंत्र होते तो एक अनुष्ठान सिद्ध होता। अच्छा, तो मंत्र एक बार जपते तो उसका एक फल होता है, लेकिन तुलसी के पौधे के आगे बैठ के जपते तो दस गुना होता। गौशाला में जपते, बैल नहीं बधां है। गौशाला में जपते सौ गुना फल होता है। शांत मंदिर में जपते अथवा गुरु की कुटिया है, गुरु ने कोई संत ने भजन किया है, उधर जप करते हजार गुना जप होता है, फल होता है। अमावस्या को जप करते, पूर्णिमा को जप करते, होली की रात, शिवरात्रि की रात, दिवाली की रात, जन्माष्टमी की रात को जप करते तो दस हज़ार गुना फल होता है।
#AsharamjiBapu
अनुष्ठान से आत्मशक्ति जागृत होती है। मंत्र में जितने अक्षर हैं, उतने लाख, उतने हजार, उतने सौ और उतने मंत्र होते तो एक अनुष्ठान सिद्ध होता। अच्छा, तो मंत्र एक बार जपते तो उसका एक फल होता है, लेकिन तुलसी के पौधे के आगे बैठ के जपते तो दस गुना होता। गौशाला में जपते, बैल नहीं बधां है। गौशाला में जपते सौ गुना फल होता है। शांत मंदिर में जपते अथवा गुरु की कुटिया है, गुरु ने कोई संत ने भजन किया है, उधर जप करते हजार गुना जप होता है, फल होता है। अमावस्या को जप करते, पूर्णिमा को जप करते, होली की रात, शिवरात्रि की रात, दिवाली की रात, जन्माष्टमी की रात को जप करते तो दस हज़ार गुना फल होता है।
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भगवान राम के गुरुदेव वशिष्ठ महाराज कहते हैं कि ये जो केंचुए पेट के बल से रेंग रहे हैं, साँप, केंचुए और दूसरे तुच्छ जीव कभी मनुष्य थे, लेकिन मनमानी करते-करते, करते-करते इस नीच गति को प्राप्त हुए और सहशस्त्र-नेत्रधारी जो इंद्र हैं, वे शास्त्र, सत्संग, सत्कर्म करते-करते, करते-करते देवताओं से सम्मानित हो गए।
इसीलिए हे राम जी! भाग्यवाद को दूर से ही त्याग दो। जो भाग्य में लिखा होगा, वो होगा। इस जीव को जैसे-जैसे कर्म, जैसा-जैसा संग, जैसा-जैसा पुरुष ऐसे-ऐसे फल को प्राप्त होगा।
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सत्संग में एक-एक क़दम चलकर आते हैं, यज्ञ करने का फल होता है, श्रद्धा भक्ति से बैठते हैं, तो भक्तियोग का फल होता है और सत्संग सुनते तो ज्ञानयोग तो स्वाभाविक मिलता है।
कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग तीन-तीन योग होता है सत्संग से।
#AsharamjiBapuQuotes
सत्संग में एक-एक क़दम चलकर आते हैं, यज्ञ करने का फल होता है, श्रद्धा भक्ति से बैठते हैं, तो भक्तियोग का फल होता है और सत्संग सुनते तो ज्ञानयोग तो स्वाभाविक मिलता है।
कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग तीन-तीन योग होता है सत्संग से।
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तो सुबह नींद में से उठो। प्रार्थना करो कि हमें झूठ, कपट, बेईमानी, भोग, संग्रह, शरीर और संसार की आसक्ति मिटाने की सत्बुद्धि दे, महाराज। इतना आप कर सकते हैं, इसमें कोई जोर नहीं आएगा। तेरे तरफ प्रीति दे दे, क्योंकि हम जीवात्मा चैतन्य परमात्मा के हैं। शरीर जड़ है, परिवर्तनशील है और हमारा नहीं है, महाराज, यह हम अब समझे हैं। शरीर मैं नहीं हूँ, शरीर मेरा नहीं है। अगर मेरा होता तो महाराज, मेरे कहने में चलता। अब खोपड़े में बात समझ आ गई। शरीर मेरा होता तो मेरे कहने में चलता। मैं चाहूंगा क्या बाल सफेद हो जाए, झुर्रियाँ पड़ जाए, बीमार हो जाए या मर जाए। कोई नहीं चाहता, तो शरीर हमारे कहने में नहीं चलता और शरीर हम नहीं हैं। फिर भी महाराज, आपकी माया आप ही हरिए हरि और आपकी कृपा आप ही भरिए, महाराज। हम अब आपके सन्मुख होना चाहते हैं। हमारी ताकत नहीं है, तुम्हारी कृपा और दया चाहते हैं। #AsharamjiBapu
तो सुबह नींद में से उठो। प्रार्थना करो कि हमें झूठ, कपट, बेईमानी, भोग, संग्रह, शरीर और संसार की आसक्ति मिटाने की सत्बुद्धि दे, महाराज। इतना आप कर सकते हैं, इसमें कोई जोर नहीं आएगा। तेरे तरफ प्रीति दे दे, क्योंकि हम जीवात्मा चैतन्य परमात्मा के हैं। शरीर जड़ है, परिवर्तनशील है और हमारा नहीं है, महाराज, यह हम अब समझे हैं। शरीर मैं नहीं हूँ, शरीर मेरा नहीं है। अगर मेरा होता तो महाराज, मेरे कहने में चलता। अब खोपड़े में बात समझ आ गई। शरीर मेरा होता तो मेरे कहने में चलता। मैं चाहूंगा क्या बाल सफेद हो जाए, झुर्रियाँ पड़ जाए, बीमार हो जाए या मर जाए। कोई नहीं चाहता, तो शरीर हमारे कहने में नहीं चलता और शरीर हम नहीं हैं। फिर भी महाराज, आपकी माया आप ही हरिए हरि और आपकी कृपा आप ही भरिए, महाराज। हम अब आपके सन्मुख होना चाहते हैं। हमारी ताकत नहीं है, तुम्हारी कृपा और दया चाहते हैं। #AsharamjiBapu
सौ काम छोड़कर भोजन कर ले, हज़ार काम छोड़कर स्नान कर ले, लाख काम छोड़कर दान, पुण्य, शुभ कर्म कर ले, लेकिन करोड़ों काम छोड़कर हरि का ज्ञान और हरि का ध्यान धर ले, इसी से तेरा मंगल है, इसी से तेरा कल्याण है।
#AsharamjiBapuQuotes
सौ काम छोड़कर भोजन कर ले, हज़ार काम छोड़कर स्नान कर ले, लाख काम छोड़कर दान, पुण्य, शुभ कर्म कर ले, लेकिन करोड़ों काम छोड़कर हरि का ज्ञान और हरि का ध्यान धर ले, इसी से तेरा मंगल है, इसी से तेरा कल्याण है।
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