इस तस्वीर में दिख रहे शख्स का ���ाम संदीप सिंह है। यह पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह जी के पोते हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में मंत्री हैं।
इन्होंने जबसे उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग का कार्यभार संभाला है एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है।
इनकी कार्यकुशलता पर कोई सवाल भी नहीं उठा सकता, धर्मेंद्र प्रधान की तरह इस्तीफा मांगना तो दूर की बात है।
जानते हैं क्यों?
क्योंकि जबसे इन्होंने कार्यभार संभाला है उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा में एक भी शिक्षक भर्ती ही नहीं आई है। 😀
और जब शिक्षक भर्ती नहीं आई तो लीक का सवाल ही नहीं उठता है जबकि प्रदेश में लाखों पद खाली हैं और अंतिम भर्ती 2018 में आई थी।
सरकार चाहती तो शुरुआत से ही संवाद स्थापित करके समाधान निकाल सकती थी।
सरकार सिर्फ़ चुनाव जीतने के बाद जनता से मुक्त नहीं हो जाती।
जनता का हर सवाल,
हर feedback,
हर चिंता…सरकार के लिए मायने रखनी चाहिए।
जनमत से ही सरकारें बनती हैं…
और उसी जनमत के भरोसे पर लोकतंत्र खड़ा रहता है।
लेकिन जब जनता की आवाज़ सुनी ही नहीं जा रही,
तो सबसे पहले सरकार पर से विश्वास कम होता है…
और जनमत भी।
अब नैरेटिव चलेगा कि पहले भी लाठियाँ चलती थीं।
पहले भी ऐसा होता था|
यही सुनने के लिए जनता ने आपको नहीं चुना था।
जनता ने इसलिए चुना था कि जो गलत पहले होता था, उसे आप रोकेंगे।
अगर वही सब करना था जो पहले होता था, तो बदलाव के नाम पर देश ने आपको क्यों चुना था?
लोगों ने सरकार सिर्फ़ चेहरे बदलने के लिए नहीं बदली थी, व्यवस्था बदलने के लिए बदली थी।
विपक्ष में थे तो कहते थे "ऐसा नहीं होना चाहिए।"
सत्ता में आए तो कह रहे हैं "पहले भी ऐसा होता था।"
यही बदलाव था ?
अभी जंतर-मंतर पर हूँ।
आँखों के सामने जो मंजर है, उसे देखकर रूह कांप रही है और मन पूरी तरह विचलित है।
पुलिस बच्चों को दौड़ा-दौड़ा कर लाठियों से ऐसे पीट रही है, आंसू गैस के ��ोले छोड़ रही है, जैसे ये देश के दुश्मन हों! आखिर ये बच्चे कर क्या रहे हैं? सिर्फ अपना हक़ ही तो मांग रहे हैं।
ये कैसी बर्बरता है? ये कैसी तानाशाही है? सरकार को सोचना चाहिए कि जिन युवाओं ने वोट देकर आपको चुनकर सत्ता के शिखर पर बैठाया है, आज आप उन्हीं पर लाठियां बरसा रहे हैं।
ये तानाशाही नहीं चलेगी! 💔
#jantarmantar
आखिर नौबत आई ही क्यों?
25 दिनों तक सत्ता के कानों पर जूँ तक क्यों नहीं रेंगी?
आज तक इतनी बर्बरता शायद ही कभी देखने को मिली हो, जितनी आज जंतर-मंतर पर देखने को मिली।
लोग कह रहे हैं कि बैरिकेड्स तक में करंट लगाया गया।
आखिर सत्ता के आदेश किस हद तक पहुँच चुके हैं?
जो भी वीडियो सामने आ रहे है........
उनमें सिर्फ़ एक चीज़ दिखाई दे रही है
क्रूरता… बर्बरता… और संवेदनहीनता।
हाथों में किताबें थीं, हथियार नहीं...
सपनों की बात करने निकले थे, अपराधी बनने नहीं।
अगर कोई छात्र अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखना चाहता है, तो उसकी आवाज़ सुनी जानी चाहिए, दबाई नहीं जानी चाहिए।
लाठी की चोट सिर्फ शरीर पर नहीं पड़ती, वह लाखों युवाओं के भरोसे पर भी पड़ती है।
आज सवाल सिर्फ एक प्रदर्शन का नहीं है, सवाल यह है कि क्या इस देश के युवाओं की आवाज़ सुनी जाएगी?
हर छात्र की एक ही मांग है—न्याय, पारदर्शिता और सम्मान।
याद रखिए, जब युवा बोलना छोड़ देते हैं, तब देश का भविष्य भी खामोश हो जाता है।
हम किसी हिंसा का समर्थन नहीं करते, लेकिन यह ज़रूर कहते हैं कि छात्रों की बात का जवाब संवाद से होना चाहिए, डंडे से नहीं।
#Students #StudentVoice #Aspirants #JusticeForStudents #jantarmantar #delhiprotest
लोग जंतर-मंतर न पहुँच सकें, इसके लिए बड़े पैमाने पर बैरिकेडिंग कर दी , कई प्रमुख सड़कों पर आवाजाही सीमित कर दी है और राजीव चौक, पटेल चौक, जनपथ व केंद्रीय सचिवालय जैसे प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के Entry -Exit भी बंद कर दिए ।
अगर लोगों की नाराज़गी और दर्द को देखने की हिम्मत है नहीं आप में और समस्याएँ ख़त्म नहीं कर��ी और नहीं कुर्सी छोड़नी है - तो ये कैसा लोकतंत्र है कि जनता के आप तक पहुँचने के रास्ते बंद करना जानते है आप।
बुज़दिल और डरपोक है ।
शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। लोगो को बैरिकेड से रोका जा सकता है, लेकिन उनके आवाज,सवालों को कब तक रोक लोगे ?
पूरा देश देख रहा है। न्यायपालिका भी देख रही है। इतिहास भी गवाह रहेगा कि छात्रों के सवालों का जवाब में संवाद तक नहीं किया गया ।।
Reality about Genz
ये जो नई Generation है ना… इस पर आप अपनी पुरानी रूढ़िवादी सोच नहीं थोप सकते ।।
कितनी भी कोशिश कर लो, हर बात पर धर्म, आस्था और भावनाओं में उलझाकर इन्हें नहीं उलझा सकोगे ।
ये सवाल पूछेगी, हर बात पे इनको logic चाहिए और हर बात का प्रमाण चाहिये ।
ये अपने माँ बाप के ग़लत होने पर मुंह पे सवाल कर देते है ।
genz अंधभक्ति करते ही नहीं चाहे सामने माँ बाप हो ।
इनकी बातें आपको कितनी भी बुरी लगें, इन्हें इससे ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता।
इन्हें अच्छे बनने का शौक नहीं है किसी के सामने ।।
आने वाला देश इन्हीं का है।
स्वीकार कीजिए… या मत कीजिए।
69000 भर्ती में पीडीए समाज के साथ हुए अन्याय की लड़ाई ��ें जो हमारे साथ नहीं है, अब उन सबके ऊपर से अभ्यर्थियों का विश्वास पूरी तरह से उठ गया है। आंदोलित युवा शक्ति को अब इस संवेदनहीन और हृदयहीन भाजपा सरकार से कोई उम्मीद नहीं है। न उनसे जो ‘मुख्य’ होकर भी मुख नहीं खोल रहे हैं और न उनसे जो ‘उप’ हैं पर चुप हैं।
भाजपा के एजेंडे में नौकरी है ही नहीं।
भाजपा जाए तो नौकरी आए!
SSC की गड़बड़ियों पर सवाल उठाना अपराध नहीं, ज़िम्मेदारी है। लेकिन भाजपा सरकार का रवैया देखिए गड़बड़ियों को सुधारने के बजाय आवाज़ उठाने वाले अध्यापकों पर FIR किया जा रहा है।
ये व्यवहार न सिर्फ़ लोकतंत्र का अपमान है, बल्कि देश के गुरुजनों का भी घोर अपमान है।
#SSC_System_Sudharo #SSCVendorFailure #BJP_ShameOnYou #sscprotest
SSC Chairman ने कहा कि यह एक new system है और naturally इसे settle होने में time लगेगा। उन्होंने कहा कि system day by day improve हो रहा है।
तो क्या इन exams को experimental trials की तरह treat किया जा रहा है? Lakhs of candidates एक single post के लिए compete कर रहे हैं,
और आप अभी भी system को “test” कर रहे हैं? क्या students को day one से एक foolproof और fair exam का हक नहीं है? क्या actual exams से पहले सारी technical glitches को fix नहीं करना चाहिए था?
यह pattern खतरनाक है हर बार promise किया जाता है कि future exams बेहतर होंगे, लेकिन already हुए exams को “improvement” के नाम पर ignore कर दिया जाता है। क्या यही एक fair selection process होना चाहिए?
#SSC_System_Sudharo
#SSCVendorFailure
#SSCReforms
एक ईमानदार शिक्षक का हाथ तोड़ा गया, लेकिन साथ ही तोड़ी गई हजारों छात्रों की उम्मीदें
कसूर?
उन्होंने #SSC में हो रहे भ्रष्टाचार पर सवाल उठाया
मैं पूंछना चाहता हूँ पार्लियामेंट में बैठे उन तमाम दिग्गजों से क्या यही है अच्छे दिन?
क्या इसी को कहते हैं लोकतंत्र?
और अगर इसी को कहते है तो युवा बदल देगा ऐसे system को !
सोशल मीडिया पर कुछ लोग अभिनय सर को विपक्ष की बात कहने को लेकर ट्रॉल कर रहे हैं,
अभिनय सर वो टीचर हैं जो हमेशा से खुलकर छात्रों के हक़ में आए हैं, जहाँ हर कोई ED और CBI से डरता है, वहीं
अभिनय सर सरकार की आँखों में आँखें डालकर सवाल पूछते आए हैं, और यही नहीं
इस प्रोटेस्ट को भी उन्होंने ही आगे आकर लीड किया था, और रही बात विपक्ष से उम्मीद न रखने की तो
बताओ कितने विपक्षी नेताओं ने छात्रों के हक़ में आवाज़ उठाई है? छात्रों के हक़ में आवाज़ उठाना जितना अभिनय सर का कर्तव्य है उतना ही विपक्षी नेताओं का है,
अभिनय सर सरकार से सवाल पूछने और सरकार को जवाबदेह ठहराने से कभी भी नहीं हिचके तो आज विपक्ष से बोल दिया तो उसमें क्या ग़लत किया?
नवीन सर और संजीव ठाकुर सर राकेश यादव सर नीतू मैम व अन्य टीचर पर लाठीचार्ज किया गया ���र प्रशाशन के द्वारा गिरफ्तार किया गया आखिर जब देश के सुधारक, शिक्षक समाज को नहीं बक्सा जाएगा तो फिर प्रशाशन से क्या उम्मीद की जाए
समय आ गया है अब हम सब को अब एक आवाज बनना होगा
#SSC_System_Sudharo
#SSCVendorFailure #sscReforms2025
भाजपा सरकार को चेतावनी है... युवाओं की अनदेखी, भर्ती परीक्षाओं में धांधली और शिक्षकों का अपमान सिर्फ वर्तमान नहीं, भारत के भविष्य को भी अंधकार की ओर ले जा रहा है।
अगर अभी भी आंखें नहीं खोली गईं तो इसका जवाब आने वाली पीढ़ियां अपने वोट से देंगी।
#SSC_System_Sudharo वरना युवाओं का सब्र अब जवाब देने लगा है।