इस्लाम पर ईमान लाने वाले लोगों को ऐसे जाहिलों के ख़िलाफ़ डटकर बोलना चाहिए, विरोध व बहिष्कार करना चाहिए ! ज़रा-ज़रा बातों पर फ़तवा देने वालों को इस वीभत्सता के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी करना चाहिए ! याद रखिए मेरे बोलने का वह असर नहीं होगा जो आपका होगा ! ऐसे मौक़ों पर ख़ामोशी गुनाह होगी👎
तिश्नलव सजदे में है होकर निहाल ऐ करबला,
तू शहादत की है इक ज़िंदा मिसाल ऐ करबला”
अश्क आँखों से छलक कर आ गये रुख्सार पर,
जब ज़हन में आ गया तेरा “ख़याल” ऐ करबला”
मौत का ज़हर है फ़िज़ाओं में
अब कहाँ जा के साँस ली जाए
बस इसी सोच में हूँ डूबा हुआ
ये नदी कैसे पार की जाए
दोस्ती जब किसी से की जाए
दुश्मनों की भी राय ली जाए
-राहत इंदौरी