तुम भी कभी छुप कर हमारी ओर नज़रें फेर लिया करो,
हाँ, बातें नहीं तो आंखों से ही सारी बातें बोल दिया करो,
और बैठें हैं हम अभी भी आस लगा के तेरी पु��ार के,
तुम ख़ाली पल दो पल प्यार से हमें देख लिया करो,
मैं खामोश हूं, मगर दिल में हलचल सी है,
तुम्हें देखने के बाद
तेरी नज़दीकियों की आज फिर तलब सी है।
लोग कहते हैं
खामोश तस्वीर क्या जवाब देगी,
उन्हें क्या पता हर खामोशी में तेरी आवाज़
बसती है..