आदित्यनाथ बिष्ट जी।
जनता के बीच जाइए तो सही, ये मंचों से एकतरफा भाषण पेलने से जनता के मन की बात आपको पता ही नहीं चल पाएगी।
जनता तो आगामी चुनाव में भाजपा को अच्छा सबक सिखाएगी।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश के यशस्वी पूर्व मुख्यमंत्री, लोकसभा में सपा संसदीय दल के नेता आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
हम ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हैं।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय श्री @yadavakhilesh जी को जन्म दिवस की अनंत शुभकामनाएं एवम् बधाई।
ईश्वर आपको स्वस्थ रखें
@mediacellsp@vkyBHU
🎂❤️🙏
बिहार के हजारों करोड़ के रिशु श्री महाघोटाले पर 21 साल की एनडीए सरकार हमारे सवालों के जवाब दें:-
1. एक मामूली सा ठेकेदार (रिशु श्री) कई विभागों के टेंडरों को अपनी मर्जी से कैसे मैनेज कर रहा था? सरकार का निगरानी तंत्र इतने वर्षों तक क्या कर रहा थी? या अधिकारियों द्वारा निजी लाभ के लिए सब कुछ नजरअंदाज किया जा रहा था?
2. ED की जांच में सामने आए चैट्स से पता चलता है कि रिशु श्री कई वरिष्ठ IAS अधिकारियों के प्रभावशाली कॉकस को सत्ता और सर्वोच्च अधिकारियों का संरक्षण कैसे प्राप्त था? वह अधिकारियों को निर्देश किसकी शह पर देता था?
3. चार्जशीट में बड़ी मछलियों को छोड़ दिया गया है? क्या ऐसा करने में देरी के पीछे क्या कोई राजनैतिक दबाव है अथवा सत्ता में बैठे लोगों को खुद पकड़े जाने का डर है?
4. दो IAS अधिकारियों को निलंबित किया गया लेकिन चार्जशीट में उनका नाम नहीं है? उनकी तत्काल गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?क्या सरकार को उनसे सबके पत्ते खोल देने की धमकी मिली है? सत्ता संरक्षित और पोषित भ्रष्टाचारियों को सजा से इम्यूनिटी क्यों दिया हुआ है?
5. वित्त विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव, जल संसाधन, भवन निर्माण विभाग के इंजीनियरों की गिरफ्तारी के बाद, क्या सरकार ने इस बात की समीक्षा की है कि इन्होंने अब तक कुल कितने करोड़ के सरकारी फंड को डायवर्ट किया? और अगर हां तो इस राशि को सार्वजनिक करने में देरी क्यों की जा रही है?
6. आरोपी रिशु श्री पहले से तय करता था कि ठेका किसे मिलेगा और उसी हिसाब से विभागीय टेंडर की शर्तें (क्राइटेरिया) बदलवा देता था। क्या इस सिंडिकेट के सरगना मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय व निवास में बैठे अधिकारी थे और है?
7. जांच में सामने आया है कि सरकारी विभागों में बिल पास कराने और टेंडर देने के बदले 2% से 3.5% तक का फिक्स्ड कमीशन चलता था। क्या यह भ्रष्टाचार में नग्न सरकार के "जीरो टॉलरेंस" के दावों की धज्जियां नहीं उड़ाता?
8. क्या सरकार रिशुश्री और उनसे संबंधित कंपनियों को मिले सभी टेंडरों की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराएगी?
9. क्या यह संयोग है कि सारी Beneficiary कंपनियाँ गुजरात से है इसलिए उसे बचाया जा रहा है?
10. रिशु श्री द्वारा अधिकारियों और उनके परिवारों की विदेशी यात्राओं, एयर टिकट और महंगे गिफ्ट्स का खर्च उठाने की बात सामने आई है। गृह विभाग, EOU, निगरानी और खुफिया विभाग इस वित्तीय लेन-देन से बेखबर क्यों थे?
11. छापेमारी में रिशु श्री के पास से 99 संपत्तियों के डीड और करोड़ों की नकदी/जेवरात मिले हैं। बिहार की जनता जानना चाहती है कि एक ठेकेदार के पास राज्य के बजट का एक बड़ा हिस्सा कैसे चला गया?
12. सरकार केवल "छोटी मछलियों" और कुछ चुनिंदा अधिकारियों को बलि का बकरा बना रही है। इस सिंडिकेट के शीर्ष पर बैठे असली राजनैतिक आकाओं और "अमृत"पान करने वाले अधिकारियों के नाम कब सामने लाए जाएंगे?
13. जिन विभागों में यह महाघोटाला हुआ, उनके विभागीय मंत्रियों ने अभी तक अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा क्यों नहीं दिया है?
14. सरकार को सभी जानकारी उपलब्ध हो जाने के बाद भी एक साल से अधिक का समय लगा। ED के कहने के बावजूद भी बिहार पुलिस ने महीनों तक FIR क्यों दर्ज नहीं की थी? क्या यह देरी सबूतों को मिटाने, "अपनों" को बचाने और फाइलें दबाने के लिए की गई थी?
15. कुछ अधिकारी इस घोटाले को दबाने के लिए दूसरे माध्यमों का सहारा ले रहे है? बिहार सरकार के वकील रिशुश्री के ख़िलाफ़ कोर्ट में क्यों उपस्थित नहीं हुए?
16. कोसी बेसिन विकास परियोजना और गुजरात की कंपनी को कोसी बराज का ठेका दिलाने में टेंडर माफिया रिशु श्री ने मदद की। बिहार के बाढ़ नियंत्रण और सुरक्षा से जुड़े इतने संवेदनशील प्रोजेक्ट में इतनी आसानी से भ्रष्टाचार कैसे हो जा रहा है?
17. क्या सरकार का पूरा आंतरिक ऑडिट सिस्टम और विजिलेंस विभाग पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है जो इस स्केल के महाघोटाले को ससमय उजागर नहीं कर सकता या सभी इस भ्रष्टाचार में कहीं ना कहीं से लिप्त हैं?
18. जब राज्य में सब कुछ ई-टेंडरिंग के जरिए होता है, तो BJP-JDU सरकार के पाले-पोसे टेंडर माफिया का सिंडिकेट डिजिटल पोर्टल को कैसे मैनिपुलेट और मैनेज कर रहा था?
19. एसवीयू ने 4000 पन्नों की चार्जशीट में सिर्फ 7 मुख्य आरोपियों को नामजद किया है और कहा है कि अन्य के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। यह बाकी बचे रसूखदार अधिकारियों और नेताओं को "क्लीन चिट" देने की जल्दबाजी नहीं है तो क्या है?
20. यह NDA का संयोग कहिए या प्रयोग, सभी बड़े घोटालों में दबाब पड़ने पर अगर किसी प्रशासनिक अधिकारी की दिखावटी गिरफ़्तारी करनी-करानी है या उसे बलि का बकरा बनाना है तो वह दलित-पिछड़े और मुस्लिम समुदाय का ही अधिकारी क्यों होता है?
जब मुख्यमंत्री पर ही 7 हत्याओं के मुकदमे हों, तो वह बेटियों को बलात्कारियों और हत्यारों से कैसे बचाएगा? लेकिन मीडिया उससे यह सवाल नहीं पूछ सकती, क्योंकि वह भाजपा पार्टी का मुख्यमंत्री है।
भगवान राम के खजाने, पैसा, धन, चढ़ावा, हीरा सोना चांदी के जेवरात, बहुमूल्य शिलाएं, कई सौ किलो चांदी की बहुमूल्य ईंटें ये सब भाजपाइयों ने लूट लिया है।
बड़ी मछलियों को बचाने के लिए छोटे प्यादों को फंसा दिया गया है।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ बिष्ट अक्सर अयोध्या जाते थे, वहां से क्या क्या लाते थे बताएं?
कम से कम नोएडा के एक चैनल ने तो करोड़ों राम भक्तों की ओर से सीना ठोक कर चंदा चोरों से सवाल पूछने की हिम्मत की।
पत्रकार विपिन चौबे ने बहादुरी का परिचय दिया 👍 @TV9Bharatvarsh
आज कासगंज जाते हुए अलीगढ़ में नसीर सैफ, नाज़िम भाई (RBS Block), नवेंद्र जैन, सगीर एम.एस., इरफान खान, सलाउद्दीन, ज़ाकिर सैफी, पार्षद सुफियान, आमिर चौधरी, इना-उल-हक़, बॉबी भाई एवं सभी सम्मानित कार्यकर्ताओं द्वारा आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया गया।
इस स्नेह, सम्मान और अपनत्व के लिए आप सभी का हृदय से धन्यवाद एवं आभार।
झूठे वादों का दौर खत्म होगा।
अब मुद्दों की बात होगी।
PDA के संकल्प के साथ, आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में नई होगी नयी शुरुआत✊🚲
लगातार न्यायालय की अवमानना और आदेशों के उल्लंघन, कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन, पुलिस के गलत इस्तेमाल, पुलिस के राजनैतिक इस्तेमाल पर कड़ा रुख अपनाते हुए लगातार मा.न्यायालय उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार और प्रशासन को फटकार लगा रहे हैं।
लेकिन भाजपा सरकार और प्रशासन पूरी तरह से बेशर्म हैं, अराजक हैं, असंवैधानिक अलोकतांत्रिक एवं गैर कानूनी कार्य कर रहे हैं।
संविधान एवं कानून को यूपी में भाजपा सरकार और भाजपा नेताओं की गुलाम बन चुकी पुलिस ने बुलडोज कर दिया है।
जनता भी इस भाजपा सरकार और पुलिस के कारनामों से तंग आ चुकी है और चुनावों में सबक सिखाने को तैयार बैठी है।