9⃣4⃣ runs
2⃣9⃣ balls
🔟 fours
8⃣ sixes
Vaibhav Sooryavanshi was at his brutal best in the #TriNationSeries Final 👏🫡
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#SLAvINDA
@anusharavi10@DKShivakumar@INCKarnataka When the NDA lost an MLC election in Karnataka due to cross-voting, no problem
When the NDA secured a Rajya Sabha victory in Jharkhand through a similar political dynamic,
Democracy ka murder ho gaya.
परवल एक समय शाकाहारी वर्ल्ड में वही रुतबा रखता था जो आज पनीर का है। किसी भी कार्यक्रम में परवल का होना मतलब कार्यक्रम के उच्च कोटि के होने का परिचायक था। आलू परवल के कॉम्बो का वही रुतबा था जो आज मटर पनीर का है।
अधिक उत्पादन ने इसे घर-घर का सब्जी बना दिया। फिर हर कोई भोज में इसे अफ़्फोर्ड करना लगा।
तबतक मार्केट में पनीर नाम की बीमारी भी आ गई और परवल की प्रतिष्ठा अब कुलीन वर्ग से पतित होकर सर्वहाराओं को श्रेणी में आ गई।
आज भी कोई जब यह कहता है कि “बाप के नाँव साग-पाँत आऽ बेटा के नाम परोर ख़ाँ” तो वह अनजाने ही महान परवल राज के श्रेष्ठता का तस्दीक कर रहा होता है।