@Miss_Niyati जब जीवन का लक्ष्य केवल 'शौक' और 'दिखावा' बन जाए, तो नैतिकता सबसे पहले नीलाम होती है। यह आर्थिक गरीबी नहीं, मानसिक दरिद्रता है। जहाँ संतोष और विवेक नहीं, वहाँ पैसा कभी चरित्र नहीं बचा सकता। असली संकट कम आय नहीं, बल्कि बेकाबू लालच है। #Acharya_Prashant#Truth
@Rudhrayadav001 जिसे हम आधुनिक 'फन' कहते हैं, वह अक्सर केवल बेकाबू वासना होती है। एम्बुलेंस को अय्याशी का अड्डा बनाना यह सिद्ध करता है कि समाज में चेतना का स्तर कितना गिर चुका है। जब तक जीवन का कोई ऊँचा उद्देश्य नहीं होगा, मानवीय प्रवृत्तियाँ ऐसे ही पाश्विक रास्तों पर भटकेंगी। #Acharya_prashant
@CommonBS786OM करोड़ों फॉलोवर और अरबों की दौलत किस काम की, अगर ज़मीर देश की समस्याओं पर गूंगा बना रहे? विज्ञापन करना आसान है, लेकिन जलते मुद्दों पर बोलना रीढ़ माँगता है। सफलता का पैमाना पैसा नहीं, बल्कि वह प्रभाव है जो समाज में बदलाव लाए। फॉलोवर भीड़ हो सकते हैं, विवेक नहीं। #Acharya_prashant
@shivaxind शिक्षा के अभाव में अंधविश्वास का बाज़ार सजता है। 'नौवीं फेल' का दरबार और 'चमत्कार' का दावा समाज के मानसिक दिवालियेपन का प्रमाण है। धर्म को धंधा बनाने वालों की जय-जयकार करना अपनी ही बुद्धि की हत्या करना है। सत्य किसी मंत्र में नहीं, स्वयं के विवेक में है। #Acharya_prashant
@KraantiKumar जब जीवन का केंद्र केवल 'फन' और 'मौज-मस्ती' हो, तो रिश्ते गहरे नहीं, केवल सतही और व्यापारिक रह जाते हैं। जिसे यह तबका आधुनिकता कह रहा है, वह दरअसल जिम्मेदारी से भागने वाला एक खोखलापन ह। जहाँ बोधनहीं होतावहाँ प्रेम केवल समय बिताने का एक साधन मात्र बनकर रह जाता है। #Acharya_prashant
@mauryvanshibeti जिस समाज में बच्चों के साथ ऐसी दरिंदगी हो, उसे खुद को सभ्य कहने का हक नहीं। स्कूल और डिग्रियाँ इंसान नहीं बनातीं, असली शिक्षा वह है जो क्रोध को देखना सिखाए। प्रतिशोध की यह आग दिखाती है कि हम 'इंसानियत' से कोसों दूर एक विक्षिप्त भीड़ बन चुके हैं। #Acharya_prashant
@CommonBS786OM अक्सर नफरत को राष्ट्रवाद का मुखौटा पहना दिया जाता है। किसी समुदाय विशेष से नफरत करना समस्याओं का समाधान नहीं है। असली सवाल उस व्यवस्था से होना चाहिएजो नागरिकों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। नफरतअंधेरे की तरह हैजो केवल बोध और निष्पक्ष जांच के प्रकाश से मिटतीहै। #Acharya_prashant
@Shubhamydv24 घटिया सवाल पूछना और उस पर 'आपका क्या कहना है' जैसी चर्चा करना समय की घोर बर्बादी है। जब तक समाज गपशप को मनोरंजन मानेगा, तब तक विवेक की बातें कभी प्राथमिकता नहीं बन पाएँगी। रिश्तों की मर्यादा पर कीचड़ उछालना बंद करें और स्वयं के भीतर झाँकें। #AcharyaPrashant
@AnilYadavmedia1 स्वयं को "हजार गुना बड़ा हिंदू" कहना ही सिद्ध करता है कि धर्म आपके लिए बोध नहीं, बल्कि अहंकार को पुष्ट करने का ज़रिया है। धर्म दूसरों को नीचा दिखाने के लिए नहीं, स्वयं के विकारों को सुधारने के लिए होता है। तुलना छोड़िए, आत्म-निरीक्षण कीजिए। #AcharyaPrashant
@Shoonya_ydv डिमांड और सप्लाई का खेल है—समाज को सत्य नहीं, उत्तेजना चाहिए। देह दिखाकर पैसा कमाना और उसे देखना, दोनों ही एक अर्थहीन और खोखले जीवन के लक्षण हैं। जब मनोरंजन का आधार केवल वासना बन जाए, तो समझ लीजिए कि समाज अपनी रीढ़ खो चुका है। #AcharyaPrashant
@LegalAdvisour कल तक जो मछली खाने को धर्म का अपमान बता रहे थे, आज वही चुनावी थाली सजाकर बैठे हैं। यह न तो सनातन का प्रेम है और ना ही बंगाल का सम्मान, यह केवल सत्ता का लालच है। जो धर्म राजनीति की दासी बन जाए, वह धर्म नहीं केवल एक व्यापारिक नीति है। जागिए! #AcharyaPrashant
@premkumarcbn01 होश में जीना ही वीरता है, नशे में डूबना तो कायरता और अज्ञानता है। शराब की बोतल को छूना साहस नहीं, बल्कि बुद्धि का दिवालियापन है। समाज को 'गलती किसकी' के विवाद से बाहर निकलकर यह देखना होगा कि हम नई पीढ़ी को बोध दे रहे हैं या केवल उपभोग की अंधी दौड़। #AcharyaPrashant
@jpsin1 अगर चर्चा केवल पहनावे और दिखावे की हो रही है, तो यह 'इवेंट मैनेजमेंट' की जीत है, शासन की नहीं। एक जागरूक नागरिक को व्यक्तित्व पूजा के बजाय ठोस आंकड़ों और परिणामों पर बात करनी चाहिए। जब सवाल छोटे हो जाते हैं, तो बड़ी कमियां पर्दे के पीछे छिप जाती हैं। #AcharyaPrashant
@jpsin1 कैमरा, कुर्ता और खान-पान—ये सब मनोरंजन हैं, विकास नहीं। अगर 12 साल बाद भी विमर्श इन्हीं तुच्छ बातों पर टिका है, तो यह देश की सामूहिक चेतना की विफलता है। व्यक्तित्व के विज्ञापनों से बाहर निकलकर यथार्थ के संकटों पर बात करना ही सच्ची राजनीति है। #AcharyaPrashant
@WasimAkramTyagi धर्म का अर्थ जोड़ना और सत्य की खोज है, न कि 'हिफाज़त' या 'तोड़ने' के नाम पर हिंसा की प्रतिस्पर्धा करना। जब राजनीति और धर्म का केंद्र केवल ईंट-पत्थर की इमारतें बन जाएं, तो समझ लीजिए कि मनुष्य का विवेक मर चुका है। असली मंदिर और मस्जिद आपके भीतर का बोध होना चाहिए। #AcharyaPrashant
@WasimAkramTyagi इबादतगाहों के नाम पर आमने-सामने आने की ये जिद केवल अज्ञानता है। जब तक समाज इमारतों को इंसान की जान और शांति से ऊपर रखेगा, तब तक नफरत का यह बाज़ार गर्म रहेगा। राजनीति को धर्म से और धर्म को हिंसा से अलग करना ही एकमात्र समाधान है। जागिए! #AcharyaPrashant
@mrjethwani1 सिर्फ सरनेम लगाने से कोई पंडित नहीं हो जाता। जो स्वाद के लिए हिंसा करे, वह धार्मिक कैसे? जब तक हमारे भोजन में मासूम जीवों का खून शामिल है, तब तक हमारी सारी पूजा और कर्मकांड केवल एक ढोंग हैं। धर्म को अपनी थाली से पहचानिए, अपनी जाति से नहीं। #AcharyaPrashant
@mrjethwani1 ब्राह्मण या पंडित होना केवल जन्म की पर्ची नहीं, बल्कि एक चेतना और अहिंसक जीवनशैली है। जब 'पंडित' कहलाने वाला व्यक्ति अपनी जिव्हा के स्वाद के लिए किसी जीव की हत्या का समर्थन करे, तो वह केवल नाम का पंडित है। धर्म केवल जनेऊ पहनने में नहीं, करुणा में होता है। #AcharyaPrashant
@JaikyYadav16 जिसे हम प्रेम कहते हैं, वह अक्सर केवल दूसरे पर कब्ज़ा करने की वासना और मानसिक बीमारी होती है। "प्रपोज़ल" के नाम पर हत्या यह दिखाती है कि मन जब अहंकार और असुरक्षा से भर जाता है, तो वह हिंसक हो जाता है। प्रेम स्वतंत्रता देता है, बंधन या हिंसा नहीं। #AcharyaPrashant