पप्पू यादव जैसा लीचड़ आदमी आपको पूरे ब्रह्माण्ड में नहीं मिलेगा।
इसका कहना है कि नेताओं के कमरे में जाए बिना 90% महिलाएं राजनीति कर ही नहीं सकतीं — ये बयान सीधा-सीधा महिलाओं का अपमान है।
क्या सोनिया गांधी, डिम्पल यादव, मायावती, राबड़ी देवी, प्रियंका गांधी और ममता बनर्जी भी महिला नहीं हैं? क्या उनकी मेहनत, संघर्ष और काबिलियत का कोई मतलब नहीं?
ऐसे घटिया और शर्मनाक बयान देकर ये सिर्फ इन नेताओं का नहीं, बल्कि हर उस महिला का अपमान कर रहा है जो अपनी मेहनत से आगे बढ़ना चाहती है।
ऐसे इंसान पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए— इसके सांसद की सदस्यता रद्द करके इसे जेल भेजा जाना चाहिए।
@KiranChauhanIND@Bebakjai57 सही कहा है मोनालिसा ने ।बढ़ती उम्र मे concive ना करना बहुत से हार्मोनल परेशानी का करना होता है ।इस संवेदनशील विषय उन्होंने अपनी बात तो कही।
कभी सोचा आपने कि आधुनिक विज्ञान ने कैंसर का इलाज क्यों नहीं ढूंढा ??
आप हैरान होंगे कि आधुनिक विज्ञान ड्रग माफिया के दुष्चक्र में फंस कर इसके सहज सरल भारतीय इलाज को सामने ही नहीं आने देना चाहता।
ऋषि कपूर की मृत्यु हो गई और इरफ़ान ख़ान की भी,
दोनों में एक बात कॉमन थी, दोनों को कैन्सर था। दोनो विदेश गए। ऋषि कपूर अमेरिका गए। इरफ़ान लंदन गए। फिर भी बच नहीं पाए। मनोहर पर्रिकर जी,सुषमा जी की भी ये ही कहानी थी।
बड़ी गंदी बीमारी है ये। डबल्यूएचओ कहता है की विश्व में 9.6 मिल्यन लोग मरते हैं एक साल में इस बीमारी से, 96 लाख लोग । 8 लाख लोग हर महीने मारे जाते हैं। 27 हज़ार रोज़ ये दुनिया छोड़ देते हैं।
भारत में 14-15 लाख लोग इसके शिकार होते हैं इस बीमारी से हर साल। 1.16 लाख हर महीने। 3 हज़ार 900 हर रोज।
कुल मिला के भारत का योगदान 8-9 प्रतिशत का है।
बहुत बड़ी मार्केट है। वैसे अब लोग ठीक भी होने लगे हैं पर पैसा बहुत लग जाता है।
जापान के “योशिनोरी ओसुमी” को मेडिसिन के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया था। उनकी थेरेपी ऑटोफैगी (autophagy) के लिए। जो कैन्सर के लिए बहुत उपयोगी है। वैसे तो ऑटोफैगी बहुत पुरानी थेरेपी है। मगर इन्होंने सिद्ध किया होगा तो नोबेल इन को मिल गया।
ऑटोफैगी का मतलब होता है :- ऑटो मतलब ख़ुद को, फ़ैगी मतलब खाना। ख़ुद को खाना या ख़ुद को खा जाना।
इस ऑटोफैगी में ज़्यादा कुछ नहीं करना केवल उपवास रखना है। योशिनोरी ओसुमी ने 72 घंटे का उपवास बताया था। मतलब 3 दिन। केवल पानी पीना है खाना कुछ नहीं।
तो योशिनोरी ओसुमी की ऑटोफैगी थेरेपी बहुत सी बीमारी के आने से पहले का इलाज है। मगर दवाई मार्केट भी बहुत बड़ा है इसलिए इसके बारे में कम ही बात होती है। फिर विवाद जोड़ा गया की ये तो भारत में हज़ारों साल से होता आया है एकादशी का व्रत ये ही तो है।
कैन्सर के सेल सब के शरीर में होते हैं। फिर जब ये किसी कारण वश बिगड़ जाते हैं तो बीमारी का रूप ले लेते हैं।
ऑटोफैगी के उपवास से हमारी स्वस्थ कोशिका इन बीमार कोशिका को खा जाती है जिस से इस के फैलने के चांस कम होते हैं। बस इतना सा है ऑटोफैगी, इतनी सी बात के लिए नोबेल मिल गया।
भारत में रविवार की छुट्टी जैसा कुछ नहीं था। यहाँ के स्त्री पुरुष स्वस्थ रहते थे हफ़्ते के सातों दिन काम करते थे। मगर महीने की छः छुट्टियाँ मिलती थी।
3 पूर्णमासी को, तीन अमावस्या को। पूर्णमासी से एक दिन पहले एक पूर्णमासी को एक उस से अगले दिन। ऐसे ही अमावस्या को भी।
ये तीन दिन छुट्टी मिलती थी जिस में आप उपवास करो। शरीर का विषहरण (detoxification) करो और स्वस्थ रहो। पृथ्वी में ज्वार भाँटा भी इन ही दिनो में आता है। कहा गया है “यत् ब्रह्माण्डे तत् पिण्डे” अर्थात जो ब्रह्माण्ड में है वो ही शरीर में है। अब पृथ्वी के जल में ज्वार भाँटा आता है तो शरीर के जल में भी आता है। इसलिए इन तीन दिन उपवास करने की बात कही गयी है। तीन दिन मतलब 72 घंटे, ऑटोफैगी।
चलिए छोड़िए। आप भी 24, 36 और 72 घंटे का उपवास करे साल में एक दो बार फिर अमेरिका लंदन क्या पड़ोस के डॉक्टर के पास जाने की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी। ध्यान रहे अगर 72 घंटे का नहीं कर सकते तो 15 घंटे से शुरुआत करे केवल पानी ले अन्न नहीं।
इस भूलोक में हम केवल यात्री हैं थोड़ी देर विश्राम करने के लिए रुके हैं यात्रा बहुत लम्बी है ये भूलोक केवल एक धर्मशाला है मंज़िल नहीं।
साभार : आलोक भारती जी।
@jpsin1 डॉ. आइदा रोस्तमी, 36 वर्षीय ईरानी डॉक्टर, विरोध प्रदर्शनों के दौरान घायलों का इलाज कर रही थीं। उनकी संदिग्ध मौत को परिवार ने दुर्घटना मानने से इंकार किया और निष्पक्ष जांच की मांग की।
राजस्थान के निकम्मे RTO अधिकारी ने एक ग़रीब चालक की टक्कर मारकर आँख फोड़ दी।
उस ग़रीब चालक की बस इतनी गलती थी,उसने इस भ्रष्ठ अधिकारी को रिश्वत नहीं दी।
@BhajanlalBjp जी लात मारकर बाहर करिए ऐसे निकम्मे अधिकारी को।
The true story of Gao Rongrong: A young Chinese woman brutally tortured by her own government. Her scarred face became a global symbol of persecution, shocking the world.
इस लड़के का नाम अरुण है...
आपने हर तीसरी चौथी रील में इसे खिलखिला कर हँसते हुए देखा ही होगा..
अरुण एक अनाथ...
चौथी क्लास में भाग निकला
फिर फुटपाथ घर बन गया.... आवारगी जिंदगी..
फिर आया वो एक लम्हा जिंदगी का...
एक इंस्टा वीडियो में उसकी वो बिंदास हँसी रिकॉर्ड हुईं.... और फिर भारत क्या पूरी दुनियाँ में अरुण की हँसी मशहूर हो गयी
किसी ने उसे चाय दिया
चाय स्टील के कप में थी जो काफी गर्म था खिलखिला कर हंसते हुए गर्म चाय से जब हाथ जले तब उसी समय उसका हाथ बदलने का अंदाज लोगों को बहुत पसंद आया...
पर अरुण गुमनाम रहा...
हालांकि उस वीडियो के चलते अरुण को सही लोगों द्वारा पहचाना गया.... वो स्कूल वापस लौटा... पढ़ाई की और अब अरुण जल्द अपनी ग्रेजुएशन आरम्भ करेगा
तो जिंदगी का सिर्फ एक लम्हा... पूरी जिंदगी भी बदल सकता है!
शाहिद मिया देहरादून में इस खाली जगह में बैठ गए न@माज पढ़ने...
जगह के मालिक ने मना किया
न माने तो ल@तिया के भगाया...
अब वही विक्टिम कार्ड....
पहली बात भाई में अपने प्लॉट, खेत, घर, जमीन पर आपको आपकी मज़हबी एक्टिविटी काहे करने दूँ??
सीधी बात है आपको किसने ये हक़ दे दिया मेरी प्रॉपर्टी में घुसपैठ कर ये सब करें
क्या ये मेरी निजता का उलंघन नहीं?
दूसरी बात आज तुम ये करो.... कल और तुम्हारे 4 भाई बंध आएं... परसों 10
...फिर बीस....
और उसके बाद में रोकूं तो तुम पत्थर चलाओगे..... कोई वोट बैंक का भूखा नेता तुम्हारा साथ देने खड़ा हो जायेगा.
मेरी जमीन पता चले कि वक़्फ़ हो ली
मेरी तो रही ही नहीं...
तो भईया में वो पेड़ काहे लगाऊं... जिसपर कल उल्लू बैठें...
सीधी बात है आपको आपकी इबादत से कोई न रोकता.... न मुझे आपके मज़हब से कोई लेना देना
बस जो करना है नियत स्थान पर करो
मेरी प्रॉपर्टी पर आपको बिलकुल भी हक़ नहीं कि ये सब करो
करोगे तो मुझे भी संविधान हक़ देता है अपनी सुरक्षा तय करने का!!
हाँ शर्मा जी को पुलिस को सूचना देना चाहिए था.... ये जरूरी है!!
गोरखपुर एम्स में नागालैंड की रहने वाली रेजिडेंट डॉक्टर जो ओरियन मॉल से अपने हॉस्टल जा रही थी
मॉल में ही तीन लफंगों ने उसे पर अभद्र टिप्पणी किया उसके नॉर्थ ईस्ट लूक पर नस्लीय टिप्पणी किया
और करीब 1 किलोमीटर तक उसका पीछा किया और एक ने अपना शर्ट भी उतार दिया
युवती ने तुरंत गोरखपुर पुलिस नागालैंड के मुख्यमंत्री और योगी जी को टैग करते हुए इस घटना के बारे में बताया तुरंत गोरखपुर पुलिस हरकत में आई
सभी सीसीटीवी फुटेज की जांच हुई और उन तीन लफंगों में से दो लफंगा सूरज गुप्ता और अमित विश्वकर्मा गिरफ्तार कर लिए गए हैं
जबकि तीसरे लफंगा की पुलिस खोज कर रही है
इनके ऊपर तमाम धाराओं के अलावा एससी एसटी एक्ट भी लगाया गया है जो लगाना बहुत जरूरी था क्योंकि नागालैंड की लड़की ट्राईबल कम्युनिटी से है
इन्हें ऐसी खतरनाक सजा मिलनी चाहिए जिससे फिर यह इस तरह किसी लड़की के साथ हरकत नहीं करेंगे
गोरखपुर जैसे शहर जो मुख्यमंत्री का शहर है उसकी छवि बिगाड़ने की सजा इन दरिंदों को बहुत खतरनाक मिलेगी
राघव चड्ढा की बात से सहमत हो तो रीट्वीट करते जाओ, अगर उठाई गई आवाज कानों तक पहुंच गई तो सिम बंद होने की धमकी मिलना बंद हो जाएगी।
बात में इतना दम है जब सबकुछ अपना है
रिचार्ज करना है नहीं करना है ये फैसला भी अपना होना चाहिए।