हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष
मुगल सेना गोगुन्दा में एक कैदी की तरह सिमट कर रह गई और उन्हें अन्न तक नसीब नहीं हो रहा था। इन सब परिस्थितियों से स्पष्ट है कि युद्ध में महाराणा प्रताप का ही पलड़ा भारी रहा।
#हल्दीघाटी_विजय_450वर्ष#MaharanaPratapJayanti
जम्मू कश्मीर की सीमा को तिब्बत व लद्दाख तक विस्तार देने वाले डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह का राज्याभिषेक 17 जून 1822 अखनूर के चिनाब नदी के तट पर महाराजा रंजीत सिंह किया।
#MataJijabai
महान शासक और योद्धा शिवाजी महाराज की माता जीजाबाई का निधन 17 जून 1674 को हुआ था. जब भी शिवाजी मुश्किल में आते, जीजाबाई उनकी मदद में खड़ी नज़र आती. उनका निधन शिवाजी के राज्याभिषेक के महज 12 दिन बाद हुआ। उनकी समाधि राजगढ़ किले के पचाड़ गांव में बनाई गई है।
मुगल सेना गोगुन्दा में एक कैदी की तरह सिमट कर रहगई, उन्हें अन्न तक नसीब नहीं हो रहा था। इन सब परिस्थितियों से स्पष्ट हैकि युद्ध में महाराणा प्रताप का ही पलड़ा भारी रहा।
संदर्भ पुस्तक:
डॉ.गौरीशंकर हीराचंद ओझा की पुस्तक,उदयपुर राज्य का इतिहास, पृष्ठ 443
#हल्दीघाटी_विजय_450वर्ष
नलिनीकान्त बागची / बलिदान दिवस
पुलिस ने मकान को घेर लिया क्रान्तिकारियों के पास सामग्री बहुत कम थी, अतः गोली चलाते हुए बाहर भागे। नलिनी गोली से घायल होकर गिर पड़े। 16 जून 1918 को नलिनीकान्त बागची ने भारत माँ को स्वतन्त्र कराने की अधूरी कामना मन में लिये ही शरीर त्याग दिया
For the past 100 years, the RSS has been working solely for the welfare and well-being of Bharat – Dr. Mohan Bhagwat Ji
No one is alien to the RSS, everyone is a Hindu; The purpose of RSS work, is to cultivate such individuals in every village
Thrissur (Keralam).
RSS is not working for political power or against anyone, said RSS Sarsanghchalak Dr. Mohan Bhagwat Ji. He stated that the organization is neither working for political power nor against any individual or group or religion. He said that for the past hundred years, the RSS has been working solely for the welfare and well-being of Bharat and, through that, the welfare of the world.
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#GalwanHeroes
मातृभूमि की रक्षा और सुरक्षा हेतु गलवान घाटी में अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले माँ भारती के वीर सपूत, वीरता, त्याग और बलिदान के परिचायक अदम्य साहसी वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि।
#RigadierSinghJamwal#ब्रिगेडियर_राज़ेन्द्रसिंह_ज़म्वाल
ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह जम्वाल - जन्म जयंती 14 जून
इन्हें सेवियर ऑफ दा कश्मीर भी कहा जाता है
“ब्रिगेडियर राजेंद्रसिंह को आदेश दिया जाता है, कि हर हाल में दुश्मन को आखिरी सांस और आखिरी जवान तक उरी के पास ही रोके रखें.”
रुद्रवीणा वादक उस्ताद असद अली ख़ाँ का निधन 14 जून 2011को हुआ था
उस्ताद असद अली ख़ाँ को पद्मभूषण से सम्मानित किया गया, संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता उस्ताद सादिक अली ख़ाँ से ग्रहण की। वे संगीत की प्राचीनतम शैली ध्रुपद की खण्डार बानी विधा के वर्तमान में एकमात्र संरक्षक थे
अहिंसा यात्रा के पथिक आचार्य महाप्रज्ञ
आतंकवाद, अशांति, अनुशासनहीनता और अव्यवस्था से विश्व को बचाने का एकमात्र उपाय अंिहंसा ही है। देश के दूरस्थ गांवों में लाखों कि.मी पदयात्रा कर यह संदेश फैलाने वाले जैन सन्त आचार्य महाप्रज्ञ का जन्म 14 जून, 1920 को हुआ था।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने आज अमृतपुरी (केरलम्) में माता अमृतानंदमयी देवी के दर्शन किये।
RSS Sarsanghchalak Dr. Mohan Bhagwat ji visited Mata Amritanandamayee Devi, in Amritapuri, Keralam.
देश के जाने माने खिलाड़ी पद्मश्री जसपाल राणा के असामयिक निधन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गहरा शोक व्यक्त करता है। वे अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित निशानेबाज़ होने के साथ-साथ उच्च कोटि के प्रतिष्ठित प्रशिक्षक भी थे जिसके लिए उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार भी मिला था। उन्होंने खेल के द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का सम्मान बढ़ाया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से यह प्रार्थना करता है कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। ॐ शान्ति:।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
#GaneshDamodarSavarkar
स्वतंत्रता सेनानी गणेश दामोदर सावरकर का जन्म 1879 में 13 जून को हुआ था.
सावरकर भाइयों में वे बड़े थे. उन्होंने राष्ट्रमिमांसा लिखी, जिसमें सबसे पहले हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र के तौर पर स्थापित करने की बात कही गई.
माणा — सीमा पर बसता भारत का प्रथम गांव
Mana उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत-तिब्बत सीमा के निकट स्थित वह ऐतिहासिक गांव है, जिसे “भारत का प्रथम गांव” कहा जाता है। बद्रीनाथ धाम से लगभग 3 किलोमीटर दूर बसे इस सीमांत गांव का सामरिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व बेहद खास है। सरस्वती नदी, भीम पुल और प्राचीन व्यापार मार्गों के कारण यह क्षेत्र सदियों से भारत की सीमा चेतना का प्रतीक रहा है। आज माणा केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सीमाओं पर बसते भारत के आत्मविश्वास, साहस और राष्ट्रभाव का जीवंत प्रतीक बन चुका है।
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