डॉक्टर साहब लोगों को गरीब आदमी के बारे में सहानुभूति पूर्वक सोचना चाहिए। गरीब आदमी के पास बीमारी के लिए कोई सेविंग नहीं होती। जब भी वह बीमार होता है तब उसे उधार लेना पड़ता है। आप 7 हजार के बदले 2 हजार लेंगे तब भी आपको 900 रुपए का फायदा होगा। लेकिन आप मूल धन का 6 गुना सिर्फ कमीशन खा रहे।
फिर आपकी सैलरी भी एक लाख से ज्यादा होती है डॉक साहब। क्या ही करिएगा इतना पैसा? पाप-पुण्य मानते हैं कि नहीं? इस तरह की लूट का असर बच्चों पर पड़ता है। वह जीवन में कुछ कर नहीं पाते।
खबर पढ़िएगा। डॉक्टरों के प्रति नफरत हो जाएगी।
राजा और तजुर्बा के लिए दिल्ली आए थें।अफसर बनने का सपना देखा था।कोचिंग में 3 लाख दिया ,कमरा का 20 हजार का महीना देते हैं।बदले में आपके बच्चे मारे जाते हैं। फिर पुलिस मारती है।फिर विद्यार्थियों को खींच के ले जाती है! कोचिंग संस्थान क्यों नहीं कुछ बोलती। कितना बेरहम है कोचिंग का मालिक।20 लड़कों को थाने ले गयी। हालांकि उन्हें छोड़ देगे। प्रोटेस्ट खत्म हो गया।
एक बार श्रद्धांजलि तक कोई कोचिंग संस्थान नहीं दिया ।।।
धिक्कार है।
मैं अपने हिस्से का काम बहुत ईमानदारी से करता हूं। दैनिक भास्कर इसलिए यकीन भी करता है। आप पाठकों का भरोसा बनाए रखना ही हमारी जिम्मेदारी है। चार ट्वीट में मैंने आपको बताया कि कैसे-कैसे लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पहली नजर में लगता है कि इनकी क्या ही गलती हो गलती हो सकती है।
क्या भीड़ मैनेज करने की जिम्मेदारी बाबा के अनुभवहीन बुजुर्ग सेवादार की थी? इतनी भीड़ के बीच पुलिस का तो होना चाहिए था न? मान लीजिए कि अनुमति 80 हजार की थी, दो लाख लोग आ गए। अब इतने लोगों को देखने के बाद क्या ये जिम्मेदारी नहीं बनती कि और फोर्स उतारी जाए?
पिछले 6 दिन से हम और रवि सर हाथरस, कासगंज, अलीगढ़, फिरोजाबाद, मैनपुरी जा-जाकर रिपोर्ट निकाल रहे हैं। आपने हर रिपोर्ट पढ़ी। आगे भी हम लगातार रिपोर्ट लाते रहेंगे।
#HathrasStampede
ये मैनपुरी की अनुपम यादव हैं। इनके 61 साल के पिता राम लड़ैते यादव भोले बाबा से जुड़े थे। 3 कमरे का जर्जर घर है। खेती-किसानी करते हैं। हाथरस सत्संग के आयोजक नहीं थे। वहां जाकर सुरक्षा में खड़े रहते हैं।
2 जुलाई को घर आ गए। एक दिन बाद सुबह 4 बजे पुलिस पहुंची और गिरफ्तार करके ले गई। अब हाथरस की जेल में डाल दिया है। परिवार इस स्थिति में नहीं कि वकील करके केस लड़ सके। सवाल अभी भी यही है कि क्या राम लड़ैते जैसे बुजुर्ग इस घटना के जिम्मेदार हैं?
पूरी रिपोर्टः https://t.co/kWMtgFqPcf
अब आम आदमी केवल वोटिंग करें और पेपर आउट करा कर धन्नासेठों के लड़के नौकरी पाये। उत्तर प्रदेश में सिविल जज की अभ्यर्थियों की कापी बदलने का ताजा मामला। https://t.co/qkLWCm7mL8
क्रिकेट के ओवरडोज़ ने युवाओं की बुद्धि ख़राब कर दी है…
ग्लैडिएटर फ़िल्म देखी है?
जब भी बड़ा घोटाला करना होता था, रोम में बड़े-बड़े खेलों का आयोजन किया जाता था.
जनता अपनी बर्बादी और दुख भूलकर खेलों में डूबी रहती थी और इधर खेला हो जाता था.
देश का भी वही हाल कर दिया गया है…
इस देश में नेता कब महंगाई,बेरोजगारी, भ्रष्टाचार रहित सरकारी सेवाएं,बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं,सबके लिए सर्वसुलभ शिक्षा,सबके लिए सर्वसुलभ परिवहन पर बात करेंगे?
"मेरा दोस्त यूपी पुलिस भर्ती की तैयारी करने प्रयागराज आया। मेरे पास ही रहकर तैयारी करने लगा। किसान परिवार से था तो परिवार से तीन-साढ़े तीन हजार रुपए महीने मिलते थे। जब पेपर लीक हो गया तो उसे खर्च मिलना लगभग बंद हो गया। उसने लाइब्रेरी भी छोड़ दी। मजबूरी में उसे घर वापस जाना पड़ा।"