🚨 Dhruv Rathee is in Delhi, ready for tomorrow’s protest!
He came all the way from Germany. What a guy! 🔥🇮🇳
ALL EYES WILL BE ON DHRUV RATHEE TOMORROW! 👀✊
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ध्रुव राठी कल के प्रदर्शन के लिए दिल्ली पहुँच चुके हैं! अब सवाल है—आखिर सत्ता को जनता की आवाज़ से इतना डर क्यों लग रहा है?
जंतर-मंतर पर एक दिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन से अगर किसी सरकार की नींव हिलने लगती है, तो समस्या प्रदर्शनकारियों में नहीं, सत्ता के अहंकार में है!
दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों को रात 9 बजे से बंद किए जाने की खबरें, प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिशें और सोशल मीडिया पर हिंसा की धमकियाँ—आखिर यह सब किस बात का संकेत है? क्या अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाना अब लोकतंत्र में गुनाह बन गया है?
सुन लो सत्ता के संरक्षण में लोकतंत्र को लाठी तंत्र बनाने का सपना देखने वालों! जनता कोई तुम्हारी जागीर नहीं है और संविधान तुम्हारी निजी संपत्ति नहीं है!
जो लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को धमका रहे हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि सोशल मीडिया पर दी गई धमकियाँ भी कानून के दायरे में आ सकती हैं। हिंसा का आह्वान करने वालों पर निष्पक्ष जाँच और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए—चाहे उनका राजनीतिक रसूख कितना भी बड़ा क्यों न हो।
सत्ता हमेशा नहीं रहती, कुर्सियाँ हमेशा नहीं रहतीं, लेकिन संविधान और कानून का शासन किसी सरकार की मर्ज़ी का मोहताज नहीं होना चाहिए।
लोकतंत्र में सरकार जनता से डरती नहीं, जनता के सवालों का जवाब देती है!
कल जंतर-मंतर पर आवाज़ उठेगी तो उसका जवाब धमकी से नहीं, संवाद से देना होगा। असहमति को कुचलने की हर कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों पर चोट है।
हम सवाल पूछेंगे, जवाब माँगेंगे और अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से खड़े रहेंगे।
लोकतंत्र है, किसी की जागीर नहीं—जनता की आवाज़ दबेगी नहीं!
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