भरत भूषण तिवारी की हत्या का जिम्मेदार सिर्फ प्रशासन नहीं , वह समाज भी है जो लोगों के हक और अधिकारों की आवाज उठाने वालो को जातिवाद , क्षेत्रवाद , भाषावाद के चश्मे से देखता है ।
अगर 5 दिन पहले यह समूह भरत तिवारी के साथ जुट जाता तो आज समाज को न्याय मिल जाता , भरत तिवारी जिंदा होता , उसे हथियार नहीं उठान��� पड़ता , और गरीब जनता को न्याय मिल जाता ।
बिहार में अभी जंगलराज चल रहा है: BJP विधायक
जब "जंगलराज यूनिवर्सिटी" के टॉपर को सत्ता के सर्वोच्च पद पे बिठाएंगे तो जंगलराज नहीं तो क्या 'मंगलराज़' आएगा विधायक जी?
#JusticeForBharatTiwari
एक माओवादी ने सरेंडर किया
> 39 लाख कैश, घर और नौकरी मिली
भरत तिवारी ने सरेंडर किया
> एनकाउंटर कर दिया गया
ये एक ही देश में दोहरे मापदंड की शर्मनाक मिसाल है।