#WamanMeshram
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, द्वितीय राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष यशकायी बी.पी. मण्डल जी के 108 वें जन्म जयन्ती के अवसर पर सभी मूलनिवासी बहुजनों को हार्दिक बधाइयां।
Bamcef Org. II Bharat Mukti Morcha
उत्तर प्रदेश के जिला चंदौली के नौगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत विशेषरपुर नई बस्ती भरदुआ में लगभग 50 वर्षों से निवास कर रहे अनुसूचित जनजाति के गोंड/मांझी समुदाय के लोगों के साथ हुई कार्रवाई बेहद गंभीर और चिंताजनक है।
पीड़ितों का कहना है कि 19 अगस्त को, स्थानीय भाजपा नेता के दबाव में प्रशासन ने उनकी खेती की भूमि पर खड़ी मिर्च व अन्य फसलों को ट्रैक्टर से नष्ट कर दिया, धान की रोपाई बर्बाद कर दी और खेतों में बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए। उनका आरोप है कि उक्त नेता के दबाव में इन परिवारों को पहले भी कई बार परेशान किया गया है।
पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया। महिलाओं को बाल पकड़कर घसीटा गया। ग्रामीणों पर मुकदमे दर्ज कर कुछ लोगों को जेल भेजा गया है। लगातार पुलिस दबिश से गांव में भय का माहौल है और कई परिवार घर छोड़ने को मजबूर बताए जा रहे हैं।
गांव का मुख्य रास्ता भी खराब कर दिया गया, जिससे लोगों को पानी भरी मेड़ से आवागमन करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, आदिवासी परिवारों और उनकी जमीन व फसल पर इस तरह की कार्रवाई वनाधिकार अधिनियम, 2006 का गंभीर उल्लंघन है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
@UPGovt तत्काल पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराए, महिलाओं और ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार के दोषियों पर कार्रवाई करे, नष्ट फसलों का उचित मुआवजा दे, मुकदमों की समीक्षा करे और वनाधिकार अधिनियम के तहत आदिवासी परिवारों के अधिकार सुनिश्चित करे।
@CMOfficeUP@ncsthq@India_NHRC@AntarsinghArya
आज डांगावास के पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए जयपुर में।
राजस्थान के नागौर के डांगावास हत्याकांड में वर्ष 2015 की इस जघन्य घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
11 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद 5 अगस्त 2026 को आए फैसले ने पीड़ित परिवारों को बेहद आहत किया है। उनका सवाल है कि यदि सभी 40 आरोपी बरी हो गए, तो उनके 5 परिजनों सहित कुल 6 लोगों की हत्या आखिर किसने की?
वर्ष 2015 की इस जघन्य घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इतने वर्षों बाद भी पीड़ित परिवारों को न्याय न मिलना बेहद गंभीर और चिंताजनक है।
पुलिस की यह कार्रवाई हमारी आवाज़ नहीं रोक सकती। हम डांगावास के पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाकर रहेंगे। न्याय की यह लड़ाई आख़िरी दम तक जारी रहेगी।
जनपद रामपुर, तहसील स्वार के रुस्तम नगर में स्कूली बच्चों द्वारा गोगा नदी पार कर स्कूल जाने का यह दृश्य भाजपा सरकार के विकास के दावों की जमीनी हकीकत दिखा रहा है। इसके अलावा रामपुर जिले में ही घूघा और पीलाखार नदी पर भी पुलों के अभाव में ग्रामीण लकड़ी और अन्य साधनों से बनाए गए अस्थायी पुलों के सहारे जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं।
बारिश आते ही ये अस्थायी पुल बह जाते हैं और कई गांवों का संपर्क टूट जाता है। किसान खेतों तक नहीं पहुंच पाते, बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और स्थानीय कारोबार भी प्रभावित होता है।
विकास के नाम पर भाजपा ने सिर्फ अपने इंजनों की संख्या बढ़ाई है।
“इंजन भरपूर, जनता मजबूर!”
ब्राह्मण और फेक न्यूज़ का चड्डी और दामन का साथ है।मुग़ल दरबार में नौ रत्न में शामिल, अल्लाह उपनिषद लिखने वाले चाटुकारो और अकबर को ब्राह्मण घोषित करने वालो की पुस्तों के पास कभी सही जानकारी नहीं होती।
फाँसी सिर्फ़ चार लोगों को दी गई थी:
राम प्रसाद बिस्मिल
अशफाक उल्ला खाँ
राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी
ठाकुर रोशन सिंह
राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को 17 दिसंबर 1927 तथा बाकी तीन को 19 दिसंबर 1927 को फाँसी दी गई।
इस तस्वीर में इससे कहीं अधिक क्रांतिकारी हैं। इसलिए इसे “फाँसी पाने वाले क्रांतिकारियों की तस्वीर” कहना साफ तौर पर गलत कैप्शन है।
एक और महत्वपूर्ण तथ्य: ठाकुर रोशन सिंह काकोरी ट्रेन लूट में प्रत्यक्ष रूप से शामिल भी नहीं थे, लेकिन मुकदमे में उन्हें मृत्युदंड दिया गया। सरकारी प्रसारक DD News/News on Air भी इसका उल्लेख करता है।
प्रश्न: काकोरी ट्रेन एक्शन में वास्तव में कितने लोग थे?
जवाब : National Book Trust के विवरण के अनुसार प्रत्यक्ष कार्रवाई में 10 क्रांतिकारी शामिल थे—राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, चंद्रशेखर आजाद, शचीन्द्रनाथ बख्शी, केशव चक्रवर्ती, मन्मथनाथ गुप्त, मुकुंदी लाल, मुरारी गुप्ता और बनवारी लाल।
इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने बहुत व्यापक कार्रवाई की। विभिन्न स्थानों से लगभग 40 लोगों को गिरफ्तार किया गया और काकोरी षड्यंत्र मुकदमे का दायरा प्रत्यक्ष ट्रेन कार्रवाई करने वाले दस लोगों से काफी बड़ा था।
इससे वायरल तस्वीर में 17 लोगों का होना समझ आता है—यह सिर्फ चार मृत्युदंड पाए लोगों की तस्वीर नहीं है।
“आज़ादी में ब्राह्मणों का 90% योगदान” — ❌ कोई प्रमाण नहीं
यही पोस्ट का सबसे बड़ा भ्रामक दावा है।
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन लगभग एक सदी तक फैला हुआ विशाल आंदोलन था—1857, किसान-आदिवासी विद्रोह, स्वदेशी आंदोलन, गदर आंदोलन, क्रांतिकारी संगठन, असहयोग, सविनय अवज्ञा, भारत छोड़ो आंदोलन, INA, मजदूर-किसान आंदोलन आदि।
और स्वयं काकोरी का उदाहरण ही “90%” वाली प्रस्तुति के लिए खराब सबूत है—इसके सबसे प्रसिद्ध नेताओं में अशफाक उल्ला खाँ मुस्लिम थे, जबकि विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक पृष्ठभूमियों के अन्य क्रांतिकारी भी HRA में शामिल थे।
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बामसेफ एवं राष्ट्रीय मूलनिवासी संघ का 41वाँ उत्तर प्रदेश राज्य अधिवेशन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
इस महत्वपूर्ण राज्य अधिवेशन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की
Bamcef Org.II Bharat Mukti Morcha
उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी दलित युवा नवप्रवर्तक रवि टम्टा जी का यह नवाचार वास्तव में अद्भुत, प्रेरणादायक और गौरवपूर्ण है। सुदूर पहाड़ में जन्मे रवि टम्टा जी ने साबित कर दिया कि उनके हौसले भी पहाड़ जैसे बुलंद हैं।
रवि टम्टा जी ने HAPIDA SKYNeX उड़ान वाहन (Flying Vehicle) के प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वे सुरक्षित एवं विद्युत चालित व्यक्तिगत उड़ान वाहन विकसित करने के उद्देश्य से कार्य कर रहे हैं। वर्षों के शोध, नवाचार और अथक परिश्रम के बाद प्रोटोटाइप की यह सफल उड़ान उनके सपने को साकार करने की दिशा में पहला बड़ा मील का पत्थर है।
यह उपलब्धि केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। ऐसे स्वदेशी नवाचार भारत की वैज्ञानिक क्षमता, युवाओं की प्रतिभा और आत्मनिर्भर भविष्य की मजबूत नींव रखते हैं।
रवि टम्टा जी को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए अनंत मंगलकामनाएं। हमें विश्वास है कि उनका यह प्रयास भारत को भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
हमें आप पर गर्व है!