इंसान हमेशा जिंदगी में तीन चीजों के लिए मेहनत करता है मेरा नाम अच्छा हो,मेरा लिबास अच्छा हो,मकान खूबसूरत हो और मरने के बाद तीनों बदल जाती है
नाम- महरूम
लिबास -कफन
मकान- कब्र
जब कोई अच्छा काम करे तो खुलकर उसकी सराहना करनी चाहिए…
बुर्क़ा में बाराबंकी कि नाजनीन हैं, इनका छोटा बेटा लंबे समय से बीमार है. दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है। इलाज के लिए लाखों रूपये का खर्चा बताया गया.
वो BJP नेता और मंत्री सतीश चन्द्र शर्मा के पास पहुंची, मंत्री जी ने नाजनीन के बेटे के लिए 9 लाख रूपये का इंतजाम किया है।
अब नाजनीन के बेटे का इलाज हो सकेगा। अब भला कोई मंत्री जी का कैसे धन्यवाद ना करे…
दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के भाई शाह आलम समेत राशिद सैफी, मोहम्मद शादाब, हबीब, इरफान, सुहैल, सलीम उर्फ आशू, इरशाद और अजहर उर्फ सोनू- इन 9 लोगों को ‘संदेह का लाभ’ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि गवाहों ने झूठी गवाही दी थी।
गुजरात के कच्छ में गौहत्या के आरोप में मुस्लिम समाज के दो युवकों की गिरफ्तारी के बीच, 85 वर्षीय रबारी समाज के एक बुजुर्ग एसपी कार्यालय पहुंचे और उन्होंने कहा कि दोनों युवक निर्दोष हैं, उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। साथ ही निष्पक्ष जांच कर उन्हें रिहा करने की मांग भी की।
10 दिन की अंतरिम ज़मानत के बाद शरजील ईमाम वापस तिहाड़ लौटे।
उनके चाचा ने कहा "हम इस मौके के लिए अदालत के शुक्रगुज़ार हैं। फ़ैसला चाहे जो भी हो, हम उसका सम्मान करते हैं।
शरजील बेकसूर है एक दिन सब को पता चलेगा।
14 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया है क्यूंकि उन्होंने वाराणसी में गंगा के बीचो-बीच नाव पर बैठकर इफ्तार पार्टी कि, बताया जा रहा है कि इस इफ्तार पार्टी में उन्होंने चिकन बिरयानी खाई और हड्डियां गंगा में फेंक दीं, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचा है।
दहाड़े मारकर विलाप करते ये बेबस लोग आमिर के परिजन हैं। आमिर ट्रक चालक थे। राजस्थान के भिवाड़ी में गौ आतंकियों ने आमिर की गोली मारकर हत्या कर दी। आमिर अपने परिवार में इकलौते कमाने वाले थे। इस देश की पुलिस, अदालत, सरकार इन मज़लूमों के साथ इंसाफ करेगी?
मोहम्मद इमरान ट्रेन से लातूर जा रहे थे। हाफ़िज़पेट स्टेशन के पास, ट्रेन में सवार 20 लोगों ने उनकी धार्मिक पहचान, जिसमें उनकी टोपी और दाढ़ी शामिल थी, को देखकर उनकी पिटाई कर दी। उनके साथी, जो उनकी मदद के लिए आए, उन्हें भी पीटा गया..!
ग़ुल्फ़िशा फातिमा 5 वर्ष बाद तिहाड़ जेल से रिहा।
दिल्ली दंगों मामले में UAPA के तहत तिहाड़ जेल में बंदी ग़ुल्फ़िशा फातिमा सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद रिहा हो चुकी है, इस बच्ची का दिल खोलकर स्वागत किया जाए।
नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में कपिल मिश्रा ने दंगे भड़काए थे, लेकिन वह आज बाहर है और लॉ मिनिस्टर है: उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत ख़ारिज होने पर सोशल एक्टिविस्ट आसिफ मुज्तबा ने कहा.
@MujtabaAasif#SupremeCourt#India
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सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम और उमर खालिद की ज़मानत याचिका खारिज कर दी है।
हालांकि 5 अन्य मुस्लिम एक्टिविस्ट मीरान हैदर, गुल्फिशा फातिमा, शिफा उर रहमान, मुहम्मद शकील खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी है।
शर्जील और उमर कि गलती शायद गुरमीत राम रहीम और आसाराम से भी अधिक है🤔
बड़ौदा मुस्लिम असोसिएशन ने बहुत ही अच्छी पहल की है
इस से मुस्लिम लड़के और लड़कियां #BLT जैसे फितना से बच जाएंगी और दीनी माहौल में रह कर अच्छी तालीम हासिल कर सकेंगे ये काबिले तारीफ कम किया है
ऐसे काम हर शहर में करना चाहिए जिसमे हमारे भाई और बहने गुमराह बद दीन और फ़ितनो से बच सकेंगे
तस्वीर में आप जिस शख्स को देख रहे हैं ये कोई फकीर नहीं बल्कि सखावत का शहंशाह हैं जी हां इस शख्स का नाम अब्दुल शकूर छीपा हैं और ये पेशे से एक आम पत्थर का काम करने वाला दिहाडी मज़दूर हैं l ये तस्वीरे जोधपुर में अभी कुछ दिन पहले हुए माहे तैबा अवार्ड फंक्शन के बाद ली थी जिसमे इस शख्स को सम्मानित किया गया था। इस शख्स की सादगी देखिये प्लास्टिक की थैली में अवार्ड लिए जमीन पर बैठ नाश्ता कर रहा हैं जबकि इसने वो किया जो बड़े बड़े करोड़पति नहीं करते।
इन्होंने अपनी मां नसीबन को हज करवाने के लिए पैसा जमा किया था लेकिन कुदरत को ये मंजूर नही था और एक बड़ी बीमारी की वजह से वो चल बसी। शकूर ने अपनी खाली पड़ी ज़मीन को मां की याद में अस्पताल के लिए दान कर दिया। उनका कहना है कि जिन ग़रीब मरीज़ों को इलाज के लिए रूपये नसीब नहीं होते हैं उनको मां की याद में बनाई हुई डिस्पेंसरी में चिकित्सा उपलब्ध होगी तो मां को कब्र में सवाब और मग़फिरत का ज़रिया समझूंगा। उनकी दान की गई ज़मीन पर सरकारी सहयोग से आज डिस्पेंसरी खड़ी है और ग़रीबों का निशुल्क इलाज हो रहा है।
फटे पुराने कपड़ों में मजदूरी करने वाले शकूर ने पिछले दिनों अपनी दो ज़मीनें मस्जिद और समाज के भवन व मदरसे के लिए भी दान कर दी हैं इसके अलावा ये एक जमीन को सरकारी लैबोरेटरी के लिए देना चाहते हैं।
युवा आलिम-ए-दीन और हमारे सम्मानित भाई मुफ़्ती शमाइल नदवी को दिल की गहराइयों से मुबारकबाद।
ख़ुदा के वजूद के मौज़ू पर जावेद अख़्तर के साथ हुई बहस में उन्होंने न सिर्फ़ उम्मत-ए-मुस्लिमा बल्कि उन तमाम लोगों का सिर फ़ख़्र से ऊँचा कर दिया, जो ख़ुदा के वजूद पर ईमान रखते हैं।
आज मैं खुद वहाँ मौजूद था और मैंने देखा कि मुफ़्ती शमाइल नदवी पूरी तैयारी के साथ आए थे। वे पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ हर सवाल का बेहतरीन जवाब दे रहे थे। उन्होंने जावेद अख़्तर की हर बात का सीधा और ठोस जवाब दिया। यहाँ तक कि जावेद अख़्तर के लिए उनकी बातों का खंडन करना और जवाब देना कठिन हो गया।
दूसरी ओर जावेद अख़्तर मूल विषय से बचते हुए नज़र आए। वे बार-बार बहस की दिशा बदलने की कोशिश कर रहे थे और ख़ुदा के बारे में वही सामान्य आपत्तियाँ दोहरा रहे थे, जो आमतौर पर नास्तिक विचारधारा से जुड़ी होती हैं। लेकिन मुफ़्ती शमाइल नदवी ने इन सभी आपत्तियों का भी पूरे आत्मविश्वास और मज़बूत तर्कों के साथ जवाब दिया।
मैंने यह भी महसूस किया कि जावेद अख़्तर के समर्थन में आए कई लोग भी मुफ़्ती शमाइल नदवी के जवाबों से मुत्मइन दिखाई दिए और कई मौकों पर तालियाँ बजाकर अपनी सहमति व्यक्त की।
एक बार फिर मुफ़्ती शमाइल नदवी को मुबारकबाद। उम्मीद है कि वे इसी तरह उम्मत-ए-मुस्लिमा की प्रभावी प्रतिनिधि आवाज़ बने रहेंगे।
सौरभ द्विवेदी को भी बधाई, जिन्होंने ईमानदारी और संतुलन के साथ बहस की निष्पक्ष और सुंदर संचालन (नियंत्रण) की ज़िम्मेदारी निभाई और किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं किया।
शम्स तबरेज़ क़ासमी
एडिटर, मिल्लत टाइम्स
@muftishamail
#DoesGodExists
मुफ्ती इस्माइल साहब के सामने जावेद अख्तर टिक नहीं पा रहे हैं।
दोनों का डिबेट चल रहा है कि Allah एक्जिस्ट करता है या नहीं। जावेद अख्तर ठहरे नास्तिक डिफेंड नहीं कर पा रहे हैं।
मैं तो कहता हूं लगे हाथ प्रतीक सिन्हा को भी बुला लो....
मुफ्ती शमाइल नदवी और नास्तिक जावेद के बीच ईश्वर को लेकर हुए डिबेट विडियो का निचोड़ देखिये
मुफ्ती साहब ने नास्तिक जावेद की बोलती बंद कर दी और नास्तिक जावेद के हर सवाल का जवाब तार्किक रूप से दिया … 🔥🔥🔥
इस 9 मिनट की वीडियो को आपने नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा 🔥
कुछ स्टूडेंट्स ऐसे होते हैं के इंस्टीट्यूशन उन पर नाज़ करते हैं। यही मिसाल नदवा के तालिब ए इल्म मुफ्ती शमाइल नदवी ने पेश की है। उन पर आज सिर्फ इंस्टीट्यूशन को ही नाज़ नहीं है बल्कि तमाम मुसलमानों को नाज़ है। दुश्मन ए इस्लाम ने जो इमेज मुसलमानों और मदरसों की खराब की है उनकी 100 साला मेहनत पर उन्होंने एक तमाचा रसीद किया है। अल्लाह उनकी ज़बान को मज़ीद सलाहियत से नवाज़े। आमीन।