छात्रों पर बर्बरता के ज़िम्मेदार अमित शाह हैं!
या तो उन्होंने इस हमले का आदेश दिया - ऐसे में वो सीधे गुनहगार हैं।
या फिर उन्हें हमले की कोई जानकारी नहीं थी - ऐसे में वो नाकाबिल गृह मंत्री हैं।
आज संसद में मेरे भाषण के दौरान मैंने दिल्ली में छात्रों पर हुई बर्बरता का मुद्दा उठाया और इसके ज़िम्मेदार का नाम लिया - गृह मंत्री अमित शाह।
मुझे BJP ने बोलने नहीं दिया।
आज शाम 6 बजे - प्रेस कॉन्फ्रेंस करूंगा और वो सब कहूंगा जो सदन में कहने नहीं दिया गया।
माइक बंद कर सकते हैं - छात्रों की गूंज नहीं।
दिल्ली पुलिस का आदर्श वाक्य ‘शांति, सेवा, न्याय’ है, लेकिन कल जंतर-मंतर पर वर्दीधारी द्वारा मासूम बेटियों की अस्मिता पर किया गया हमला इस आदर्श वाक्य को विडंबना बना देता है।
छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।
प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वो बिना जवाब दिए, बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे - नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं।
मैं हर उस देशभक्त भारतीय से अपील करता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए - प्रधानमंत्री आवास के सामने हमारे धरने में शामिल हों।
भारत के छात्रों की आवाज़ को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
An attack on students is an attack on every Indian family.
PM Modi believes he can get away without answers, without consequences. He cannot. Not this time.
I ask every patriotic Indian who believes our students deserve justice - join us in dharna in front of the Prime Minister’s residence.
The voice of India’s students will not be ignored.
Ye gaaliyaan bhi de rahe the, sir. I have been at Jantar Mantar since last night aur hazaaron ki bheed me chedkhani toh maine expect ki thi. Par itna zyada safe feel hua. Kisi bhi ladki se pooch lijiye, chahe kahin ke bhi ladke ho, sab ke sab ek doosre ka khayal rakh rahe the. Aur phir aaj police ke naam pe in ladko ko dekha jo gandi gaaliyaan deke maar rahe the.
जंतर मंतर पर कल बच्चे पिट रहे थे और राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग छत पर खड़े–खड़े तमाशा देख रहा थे,
ऐसे आयोग को बंद कर देना चाहिए जो बच्चों की आवाज न सुन सके।
शांतिपूर्ण विरोध एक अटूट और मौलिक अधिकार है।
भारत के निर्दोष छात्रों पर हमला करने के आदेशों का आँखें बंद करके पालन करने वाले हर पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी ये बात ध्यान रखें:
संविधान ही आपका मालिक है।
सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती।
जवाबदेही ज़रूर तय की जाएगी।
Peaceful protest is a sacred and fundamental right.
Every police officer and govt official blindly following orders to attack India’s innocent students should keep in mind:
The Constitution is your master.
Power is not permanent.
Accountability will follow.
मैंने भी डिम्पल यादल को इतने गुस्से में नहीं देखा। डिम्पल जो बात कह रही हैं किसी का भी सब्र जवाब दे सकता है मगर वे आपे से बाहर नहीं हैं। अपनी बात मज़बूती से रख रही हैं। एक युवा लड़की जिस भरोसे के साथ महिला सांसद से शिकायत करती है, महिला सांसद उस भरोसे को बनाए रखती हैं।
“जल्दी निकल जाओ, वरना कपड़े फाड़कर तुम्हें नंगा भगाएंगे”
एक रोती हुई लड़की ने बताया कैसे कई पुलिसवाले सिविल ड्रेस में थे और मां-बहन की भद्दी गालियां देकर मार रहे थे
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ वालों की असलियत
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
दस मिनट पहले का हाल-
सीपी में बैंक ऑफ बड़ौदा और एलआईसी बिल्डिंग के पास बहुत सारे पुलिसवालों ने सिविल ड्रेस पहनी हुई है। रूमाल से चेहरे ढके हुए हैं और बच्चों पर लाठियां चला रहे हैं.
#संसद_मार्च
अघोषित एमजेंसी!
लोग जंतर मंतर न पहुँचे, इसलिए केंद्रीय सचिवालय जैसे बड़े बड़े स्टेशन को बंद करने का आदेश हुआ है,
शांतिपूर्ण आंदोलन की लोकतंत्र में जगह होनी चाहिए.