CEC ज्ञानेश कुमार जी ने एक बार फिर एक नाकाम वंशवादी नेता को उसकी औ...कात दिखा दी, और वह भी बिना किसी कैमरे के सामने नौटंकी किए!
रागा (RaGa) के लिए साफ़ संदेश: यह भारत है,तुम्हारे परिवार की जागीर नहीं🔥
आज पर्दे के पीछे क्या हुआ👇
👉शाम 4 बजे तक, किसी भी पार्टी ने उस 'अधिकृत चैनल' (authorised channel) के ज़रिए मीटिंग की मांग नहीं की जिसे ECI ने 2025 में तय किया था और सभी पार्टियों को इस्तेमाल करने के लिए कहा था।
👉रागा बस ECI ऑफिस में बिना बुलाए घुसना चाहते थे।
👉ECI ने कहा: प्रक्रिया का पालन करें।
👉बाद में दिल्ली पुलिस के DCP ने बताया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल अंदर आकर ज्ञापन सौंपना चाहता था। लेकिन निर्वाचन सदन में नहीं।
👉वह वंशवादी नेता चाहते थे कि CEC और ECs संसद भवन एनेक्सी (Parliament House Annexe) आकर विपक्ष के 240 सांसदों से मिलें।
👉यह कोई अनुरोध नहीं था। यह एक नाकाम वंशवादी नेता का हुक्म था कि जगह, लोगों की संख्या और प्रक्रिया को मौके पर ही बदल दिया जाए।
👉प्रोटोकॉल कहता है कि ये बैठकें कमीशन के ऑफिस में ही होती हैं, कहीं और नहीं।
👉ECI ने इस मांग को अजीब बताया और ठुकरा दिया। लेकिन फिर भी ECI ने शालीनता दिखाई।
👉ECI ने फिर कुछ ऐसा प्रस्ताव दिया जो अपने आप में अभूतपूर्व था: अपने सबसे वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी को वहां ज्ञापन लेने के लिए भेजना जहां सांसद मौजूद थे। लेकिन उस 'हक जताने वाले' वंशवादी नेता ने उसे भी ठुकरा दिया।
तो घटनाक्रम सीधा है। प्रक्रिया को छोड़ो। पुलिस के ज़रिए आओ। कमीशन के बाहर बड़ी बैठक की ज़िद करो। बीच का रास्ता अपनाने से इनकार करो। फिर ऐसे संस्थान के सामने पीड़ित होने का नाटक करो जो किसी एक पार्टी की सुविधा के लिए अपने नियम नहीं तोड़ेगा।
कोई भी पार्टी समय मांग सकती है। कमीशन एक समय तय करता है। यही वह सामान्य प्रक्रिया है जिसे नोट के आखिर में फिर से बताया गया है। कांग्रेस सामान्य प्रक्रिया नहीं चाहती थी। वह अपवाद, भीड़ और मंच चाहती थी, और चाहती थी कि रेफरी चलकर उनके पास आए। संस्थान कोई प्रॉप (props) नहीं होते। खासकर वे संस्थान जो संवैधानिक निकाय हैं।
संक्षेप में 👉 CEC ज्ञानेश कुमार जी ने एक नाकाम वंशवादी के रवैये और अहंकार के आगे झुकने से इनकार कर दिया और उन्हें उनकी औकात दिखा दी।
इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि कांग्रेस CEC ज्ञानेश कुमार जी से नफरत करती है, क्योंकि उन्होंने भारत के संविधान के प्रति "अपना काम किया" और शाही परिवार के आदेशों को नहीं माना, जैसा कि पहले होता था।
इसे ज़्यादा से ज़्यादा फैलाएं और राहुल गांधी की कांग्रेस प्राइवेट लिमिटेड की असलियत सामने लाएं।
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