सीतापुर का शिक्षक प्रकरण बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।शिक्षक श्री बृजेंद्र वर्मा जो कि कर्मठ,ईमानदार और नियमित विद्यालय जाने वाले शिक्षक थे।उनको इस हद तक प्रताड़ित किया गया कि उन्होंने अपना आपा खो दिया।मात्र 20 सेकंड की वीडियो क्लिप के आधार पर शिक्षक को एकतरफा दोषी ठहरा देना न्याय उचित नहीं है। बीएसए ऑफिस में प्रवेश करने से लेकर के अंत तक की सारी सीसीटीवी फुटेज के अवलोकन के आधार पर जो भी दोषी हो उस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।आखिर वो कौन सी परिस्थितियों उत्पन्न हुई जिससे एक शिक्षक यह कृत्य करने पर मजबूर हुआ जिसकी सच्चाई सामने आना चाहिए।
इस संबंध में मेरी वार्ता बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह जी से हुई है उन्होंने आश्वस्त किया है कि घटना की निष्पक्ष जांच होगी और प्रकरण में जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी ।
आज लोक भवन, लखनऊ में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के संबंध में पत्रकार बंधुओं से संवाद किया।
@UPGovt की नीति स्पष्ट है कि 1 किमी से अधिक दूरी होने पर अथवा 50 या उससे अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालय मर्ज नहीं किए जाएंगे।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु हम प्रतिबद्ध हैं।
उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को स्ट्रेचर पर भेजने वाले किसी भ्रम में न रहे, माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी के नेतृत्व में प्रदेश के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु हम हर संभव कदम उठाएंगे।
आज लखनऊ स्थित आवास पर @basicshiksha_up के वरिष्ठ अधिकारियों संग बैठक कर विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा की।
हर बालक-बालिका को समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने हेतु हम संकल्पबद्ध है।
#डाॅ०दिनेशचन्द्रशर्मा_जिन्दाबाद
शिक्षक हित सदैव सर्वोपरि की भावना के साथ आदरणीय प्रांतीय अध्यक्ष जी ने ऑनलाइन उप० देने से पूर्व half CL,EL,and द्वितीय शनिवार के साथ राज्य कर्मचारी का दर्जा & कैशलेश चिकित्सा की सुविधा देने की माँग की।
@DrDCSHARMAUPPSS@UPPSS1921@dileepuppss
शिक्षकों पर विश्वास करने से ही अच्छी पीढ़ी जन्म लेती है।
कोई शिक्षक देर से स्कूल नहीं पहुँचना चाहता है लेकिन कहीं सार्वजनिक परिवहन देर से चलना इसका कारण बनता है, कहीं रेल का बंद फाटक और कहीं घर से स्कूल के बीच की पचासों किमी की दूरी क्योंकि शिक्षकों के पास स्कूल के पास रहने के लिए न तो सरकारी आवास होते हैं, न दूरस्थ इलाकों में किराये पर घर उपलब्ध होते हैं। इससे अनावश्यक तनाव जन्म लेता है और मानसिक रूप से उलझा अध्यापक कभी जल्दबाज़ी में दुर्घटनाग्रस्त भी हो सकता है, जिसके अनेक उदाहरण मिलते हैं।
यदि किसी आकस्मिक कारणवश शिक्षकों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य या फिर घर, परिवार और समाजिक कारणों से दिन के बीच में स्कूल छोड़ना पड़े तो पूरे दिन के अनुपस्थित होने की रिपोर्ट भेज दी जाएगी। देर से स्कूल पहुँचने या जल्दी स्कूल से वापस जाने के अनेक कारण हो सकते हैं। यहाँ तक कि विद्युत आपूर्ति के बाधित होने या तकनीकी रूप से भी कभी इंटरनेट जैसी सेवाओं के सुचारू संचालन में समस्या आती है। इसीलिए ‘डिजिटल अटेंडेंस’ का विकल्प बिना व्यावहारिक समस्याओं के पुख़्ता समाधान के संभव नहीं है। सबसे पहले ये अन्य सभी विभागों के प्रशासनिक मुख्यालयों में लागू किया जाए जिससे उच्चस्थ अधिकारियों को इसके व्यावहारिक पक्ष और परेशानियों का अनुभव हो सके, फिर समस्या-समाधान के बाद ही इसे लागू करने के बारे में कालांतर में सोचा जाए।
सबसे बड़ी बात ये है कि इससे शिक्षकों को भावनात्मक ठेस पहुँचती है, जिससे उनके शिक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बोधपरक शिक्षण के लिए शिक्षकों का भावात्मक रूप से जुड़ना आवश्यक होता है। स्कूल में केवल निश्चित घंटे बिताना ही शिक्षण नहीं हो सकता।
हम इस मुद्दे पर शिक्षकों के साथ हैं!
दिल्ली : यूपी में शिक्षकों की ऑनलाइन अटेंडेंस के आदेश का मामला
➡प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने एक्स पर पोस्ट किया
➡सरकार ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने पर लगी
➡30 EL, आधा CL देने की मांग नहीं मानी गई
➡अध्यापकों की स्थिति दयनीय होती जा रही
➡शादी के लिए भी टीचर को मेडिकल लीव लेनी पड़ती है
➡CM योगी से अनुरोध है कि आदेश वापस लिया जाए.
#Delhi @proframgopalya1
विभिन्न माननीय प्रतिनिधियों को शिक्षको की पीड़ा दिख रही पर उनको नही दिख रही जोAC में बैठकर तानाशाही आदेश जारी करते है ।
शिक्षक पर विश्वास न करना बेवजह के कामों में फंसाकर रखना । दुःखद है । कृपया हमें शिक्षक ही रहने दें 🙏
#BoycottOnlineAttendance#UPbasiceducation
उत्तर प्रदेश सरकार अध्यापकों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज कराने को आमादा है। जबकि सरकार अध्यापकों की वर्ष में 30 EL and half CL देने की माँग मान नहीं रही है।अध्यापकों की स्थिति इतनी दयनीय है कि अपनी शादी के लिए भी टीचर को मेडिकल लीव लेनी पड़ती है।अध्यापकों की कमी के कारण किसीकिसी विद्यालय में एक ही टीचर को दर्जा एक से लेकर पाँचवीं तक सारे दिन पढ़ाना पड़ता है। मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि ऑनलाइन अटेंडेंस के आदेश को वापस लेकर पहले टीचर्स की समस्याओं का निराकरण करने का कष्ट करें।@myogiadityanath
यूपी सरकार ने शिक्षकों के लिए स्कूल में जाकर बायोमेट्रिक अटेंडेंस लगाना अनिवार्य किया है, जिसका शिक्षक विरोध कर रहे है। तर्क है सड़क, पुल, नेटवर्क जैसी सुविधाएं नहीं है। शिक्षक किसी दुर्घटना का शिकार हो गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? सरकार,विभाग या अधिकारी? #boycottऑनलाइनहाज़िरी
UP में शिक्षकों के लिए स्कूल जाकर बायोमेट्रिक लगाना अनिवार्य किया है,जिसका शिक्षक विरोध कर रहे है।
तर्क है सड़क,पुल जैसी सुविधाएं नहीं है।
शिक्षक किसी दुर्घटना का शिकार हो गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
Yogi जी,विभाग या अधिकारी? #boycottऑनलाइनहाज़िरी
हमारी_मांग_पूरी_करो_फिर_देंगे_डिजिटल_उपस्थिति #boycottऑनलाइनहाज़िरी#BasicEducation#UpBasicSchool
1. 15 CL
1. 15 हॉफ CL
2. 30 EL
3. राज्यकर्मचारी का दर्जा
4. 30km की परिधि में हर किसी को विद्यालय
5. कैशलेस चिकित्सा सुविधा परिवार सहित
6. प्रमोशन