ठेकुआ कोई फाफड़ा भाकडी नहीं जो चाय नाश्ते में लिया जाता है,प्रसाद है छठ महापर्व का
अनर्गल बात करके COOL बनना है इनको।
बिहार में कोई ठेकुआ के साथ चाय नहीं पीता वो अलग मीठे खजूर होते हैं, गुजरात में बैठ कर लिखते हो क्या बे?@BJP4Bihar
यादव इमोशनल नहीं अपेक्षित अनपढ़ ज़रूर रहे हैं,
यादवों के इतिहास पर जब जाएंगे तो मूलतः पशुपालन जनजातियां (गड़ेरिया,भील, चरवाहा आदि) हीं झुंड में रहकर अहीर बनें।
यादवों को लठैत भी इसलिए ही कहते हैं क्योंकि इनके हाथ सदियों तक पुस्तक के जगह लाठियां हीं रहीं।
ऐसा नहीं कि यादवों को शिक्षा से वंचित रखा गया बल्कि उन्होंने खुद असाक्षर रहना चुना क्योंकि दूध दही का व्यापार हमेशा लाभपूर्ण रहा,19वीं सदी के बाद में यादव बच्चें भी बाकी OBC वर्ग का अनुसरण करते हुए काड़ी छोड़ आंगनबाड़ी पहुंचे, थोड़े पढ़े लिखें।
आज भी बिहार में यादव बच्चें ज्यादातर बिहार पुलिस/दरोगा/अग्निवीर जैसे टियर 4 प्रशासनिक दौड़ में हीं ज़्यादा सम्मिलित पाए जाते हैं।
JP नारायण जी और मंडल आयोग के प्रवाह में लालू जी को राजनैतिक नियंत्रण मिला, लेकिन उस काल में भी यादव युवा शिक्षित, साक्षर या मुख्य पदों पर नहीं हीं रहें
जब पावर था इन्होंने हरा गमछा बांध उन्माद और बॅकैतिया हीं की, वजह?
यादवों में कभी कोई इंटेलेक्चुअल नहीं रहा, लठैतों को लठैत ही रखा गया इनके बौद्धिक विकास के जगह चोकर घास में उलझाए रखा गया।
शुक्र है इनके पास खुद के पशु और थोड़े बहुत खेती के साधन रहें तो स्थिति और बदतर होती।
वैसे यादवों का एक श्रेष्ठ योगदान हमेशा रहेगा कि इन्होंने क्रूर सामंतवाद को बड़े स्तर पर उखाड़ फेंका, निरंतर उग्र रहें और मुकाबला करते रहें।
यादवों का ख़ौफ़ ऐसा था बिहार में ब्राह्मण खासकर भूमिहार अपना सरनेम लिखना बोलना बताना सब छोड़ दिए थें, आज भी यह प्रभाव में है।
पोटेंशियल है, एनर्जी है, दूध दही खाते हैं लेकिन सही मार्गदर्शन से वंचित जनजाति हैं।
गया जी में पिण्ड दान यात्री आने लगे हैं और पिंड दान क्षेत्र के मुख्य स्थल फल्गु घाट का नज़ारा देखिए । साल भर से सोए हुए रहते हैं आपलोग, कम से कम अब तो जाग जाइए 🙏
Are you capable of doing these ?
Cooking❌
Whistle❌
Draw ❌
Paint ❌
Swim❌
English❌
Dance ❌
Sing ❌
Write ❌
Edit videos/photos ❌
Play the guitar ❌
Female/male interaction on X ❌
Public speaking ❌
मिथिला के जाति विशेष समुदाय जो महानगरों में रहकर थोड़े बहुत संपन्न और एलीट हो चुके हैं, अक्सर अलगाववाद की बात करते नज़र आयेंगे।
बिहार साम्राज्य में ख़ुद को स्थापित ना कर पाने की त्रुटि एक अलग राज्य बनाकर एकाधिकार चाहते हैं।
अलग राज्य की नींव ही बगावत भरी है, द्वेष से अंकुरित है, चौमुखी विकास नहीं दरभंगा और मधुबनी तक इनकी राजनीति और क्रांति सीमित है, सीमित है झा और ठाकुर, मिश्रा, पांडेय के बीच।
डिजिटल युग में ले देकर दरभंगा एयरपोर्ट के अलावा पूरे मिथिलांचल में कोई ढंग का शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, अच्छी सड़के, ब्रांडेड शॉपिंग स्टोर्स, ऐतिहासिक धरोहर, टूरिज्म, अर्बन सोसाइटी, 3 स्टार होटल, परिवहन, कृषि समृद्धि या इरीगेशन से ड्रेनेज सिस्टम तक जर्जर दयनीय स्थिति में है।
इतने साल से इनके सारे MP/MLAs ने क्या किया नहीं किया उनसे न सवाल होगा, न बात होगी।
पैसे डकारते रहो, अलग राज्य मांगते रहो और इन भिखारियों को खाद पानी देने का काम नोएडा, गुरुग्राम और बैंगलोर में रहने वाले जाति विशेष करते हैं।
NCR बेल्ट में यही ग्रसित लोग दिल्ली और हरियाणा वालों के साथ मिलकर बिहारियों का मज़ाक बनाते हैं।
दूर का ढोल सुहावन होता है।