जो करते है प्रेम प्रत्येक जीव से और सभी जीव करते है प्रेम जिसको, जिसका नाम मात्र पैदा कर देता है स्पन्दन दिलों मे और जो स्वयं भीतर बैठा है हम सभी के। इसके बाद भी क्या मन के प्रवाह और कामनाओं मे खो जाऊँगा मैं!
सहस्रकिरणोज्ज्वल। लोकदीप नमस्तेऽस्तु नमस्ते कोणवल्लभ।।
हे देवदेवेश! आप सहस्र किरणों से प्रकाशमान हैं।
हे कोणवल्लभ! आप संसार के लिए दीपक हैं, आपको हमारा नमस्कार है।
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