आरक्षण खैरात ही नहीं भीख भी है क्योंकि एक meritorous सामान्य वर्ग के विद्यार्थी का सीट छीनकर भीख में आरक्षण जीवियों को दिया जाता है। आरक्षण संवैधानिक नीति नहीं बल्कि वोट बैंक की राजनीति है।संविधान में आरक्षण एक temporary प्रावधान था जिसे बढ़ाते चला गया। सभी बीमारियों में सबसे खतरनाक बीमारी है आरक्षण। यह कैंसर की तरह देश की प्रतिभा को खा रहा है। जिस देश में प्रतिभा का तिरस्कार किया जाता है वह देश विकसित कैसे बन सकता है। देश की सारी संस्थाओं की effficiency compromise हो गई है आरक्षण से।
सवर्ण टैक्स देते हैं, इसलिए आरक्षण की कृतज्ञता दिखाओ।
भाई, टैक्स किसी जाति का दान नहीं, नागरिकों का योगदान है। उसी टैक्स से सड़क, अस्पताल, स्कूल, पुलिस और सरकारी संस्थान चलते हैं और Sc, St, OBC भी टैक्स देते हैं।
आरक्षण खैरात नहीं, संवैधानिक नीति है।
Taxpayer बनकर मालिक बनने की कोशिश मत करो लोकतंत्र में नागरिक बराबर होते हैं।
पिछले 70 सालों से क्या इलाज हुआ आरक्षण से? क्या सामाजिक बदलाव आया पिछले 70 सालों से। आरक्षण से क्या जातीय उत्थान या सामाजिक उत्थान हुआ? जाति का समूल नाश कैसे करोगे।तुम लोग खुद अपनी जाति का नाश कर लो। बाबा साहब ने बौद्ध धर्म अपना लिया । तुमलोग भी अपनी जाति से मुक्त हो जाओ। आरक्षण ने तो और जातिगत भेदभाव को बढ़ाया है।आरक्षण के कारण विभिन्न जाति समुदायों के बीच घृणा और नफरत बढ़ा है कालांतर में।
जो कल भी शोषित थे, क्या आज भी शोषित ही रहेंगे?
जब तक वास्तविक ज़रूरतमंदों को सही अवसर नहीं मिलेगा, तब तक समाज में पूर्ण समानता कैसे आएगी? आरक्षण में संशोधन की माँग पर एक विचारणीय चर्चा। 💭
#EqualityForEveryone#ReservationDebate#YouthVoice#India
@KraantiKumar सुप्रीम कोर्ट पूरी तरह से आरक्षण से मुक्त है और जजों की नियुक्ति योग्यता और अनुभव के आधार पर होता है। Sc st obc समाज से कोई उपरोक्त शर्त नहीं पूरा किया होगा तो कहां से चीफ जस्टिस बनेगा।
If reservation is beacon of hope to weed out caste inequalities . Then what reservation had done for last 70 years. It has zero percentage role in social justice.instead it has increased hatred and has created wide gap among caste groups. It has only promoted caste based and vote bank politics. It has zero role in nation building. It has killed merit .
@ajeetbharti क्या जातिगत आरक्षण ने देश को बर्बाद किया है? क्या यह जातियों के बीच घृणा और नफरत को बढ़ाया है? क्या जातिगत आरक्षण कभी खत्म भी होगा देश से?
मायावती जी आप थोड़ा अध्ययन करती और ठीक से विश्लेषण करती तो आप को समझ में आता कि अपने ही sc st समाज में जो विधायक, मंत्री, ias, ips, उद्योगपति, व्यवसाई जो आर्थिक दृष्टि से उन्नत हो चुके है उनको आरक्षण क्यों चाहिए। अगर क्रीमी लेयर नहीं लगेगा तो सारा आरक्षण का लाभ आप जैसे mp , विधायक, मंत्री, बड़े अधिकारी के लोग ही डकार जा रहे है और वास्तव में आप ही के वर्ग के गरीब लोग पिछड़े और वंचित रह जायेंगे। आप जैसे लोग अपने ही समाज के दुश्मन है। आरक्षण ने ही सवर्णों और sc st समुदायों के बीच घृणा और नफरत को कालांतर में बढ़ाया है। जाति आधारित आरक्षण से 70 सालों में क्या सामाजिक सुधार हुआ। क्या आरक्षण से जाति खत्म हो जाएगी। 70 सालों में केवल अमीर sc st के लोग और ज्यादा अमीर हुए है। इसलिए क्रीमी लेयर की जरूरत है समय की मांग है।आप केवल अमीर sc st की भलाई चाहती।आपको गरीब sc st की चिंता नहीं है। आप लोग गरीब sc st ke कंधों पर बंदूक रख के अपना उल्लू सीधा करना चाहती हैं। @arakshan_hatao1@ajeetbharti
कोई भी तरीका अपना लो जाति व्यवस्था कभी खत्म नहीं होगी। भेदभाव का आधार केवल जाति नहीं है। धर्म के आधार पर भेदभाव, अमीरी और गरीबी के कारण भेदभाव, क्षेत्र के आधार पर भेदभाव, भाषा के आधार पर भेदभाव ना जाने कितने ही आधार पर भेदभाव है समाज में। भेदभाव का कारण है -अज्ञान, शिक्षा और जागरूकता का अभाव। आरक्षण जातिगत भेदभाव को और बढ़ाया है। आरक्षण के कारण sc st और सवर्णों के बीच घृणा और नफ़रत कालांतर में बढ़ा है।
@priti134 बहुत सारे Sc st के लोग आरोप लगाते है कि सामान्य वर्ग sc st ke खिलाफ हैं। लेकिन सच यह है कि सामान्य वर्ग हमेशा ही न्याय के पक्ष में रहा है और केवल राष्ट्र हित की बात करता है।
उस चीज़ को काट दें जो आपको चुपचाप निचोड़ रही है।
आपको पता है वो क्या है। आपको लंबे समय से पता है। वो आदत। वो व्यक्ति। वो ऐप। वो सोच का पैटर्न जिसके पास आप हमेशा लौट आते हैं।
वो चीज़ जो सब कुछ ले लेती है और बदले में कुछ भी असली नहीं देती। घोषणा करने की ज़रूरत नहीं। बस रुक जाएँ। चुपचाप। और देखें कि जब आप ऐसा करते हैं तो कितनी ऊर्जा उसी पल लौट आती है।
ज़्यादा इनकम वाले और ऊंचे पदों पर आसीन लोग रिज़र्वेशन क्यों चाहते हैं? वे और अमीर होते जाएंगे, जबकि उनकी अपनी जाति के गरीब लोग उनके सामने मौके खो देंगे। सबसे अच्छी शिक्षा मुफ़्त में दें और कॉलेज मुफ़्त करें। लेकिन नौकरियां सबके लिए बराबर होनी चाहिए।
जो नेता आरक्षित सीट से चुनाव लड़ेगा, आरक्षण को सपोर्ट करेगा, आरक्षित वर्ग के लिए काम करेगा, आरक्षित वर्ग की हित की बात करेगा, सवर्णो को sc st AcT ki धमकी देगा, आरक्षण के नाम पर देश में आग लगने की बात करेगा, सवर्णों से घृणा करेगा और नफरत की बीज बोएगा भला वो नेता सभी वर्गों का सर्वमान्य नेता कैसे बनेगा। @ajeet
भाई मौजूदा आरक्षण में सुधार नहीं चाहिए।आरक्षण सीमित यानी 20 -30% तक होनी चाहिए और आरक्षण आर्थिक आधार पर होने चाहिए।ताकि संस्थाओं की effficiency प्रभावित नहीं हो साथ में आरक्षण का लाभ बहुसंख्या जनता तक आर्थिक आधार पर पहुंचे बिना किसी जातिगत भेदभाव के। भारतीय समाज में सबसे ज्यादा वंचित पीड़ित गरीब ही है और सभी वर्गों को इससे फायदा होगा।,,@ajeetbharti@re