हिन्दी साहित्य – पुस्तक समीक्षा ☆ संजय दृष्टि – अधरंगे ख़्वाब — कवि- राजेंद्र शर्मा ☆ समीक्षक – श्री संजय भारद्वाज ☆ - https://t.co/y9NZ6pEoJ5 @AbhivyaktiE
जिजीविषा
~*~*~*~
मैं चलते चला जा रहा हूँ
मैं बढ़ते बढ़ा जा रहा हूँ
मैं तलाशने निकला हूँ
अपनी मंजिल
मैं नित गढ़े चले जा रहा हूँ
अपने पावँ तले की ज़मीन
मैं जीवन हूँ।।
राजेन्द्र शर्मा
मेरी यह रचना मेरे आदरणीय भाई श्रीमान Chandra Prakash Dhand जी के लिए है।
जगत बंधा है प्रेम से, प्रेम ईश वरदान।
साध सके तो जानले, पूर्ण हुआ संधान।।
वेद कुरान बाईबल, अतुल ज्ञान भंडार।
मनुज-मनुज बनके रहे, सबका एक ही सार।।
राजेन्द्र शर्मा
जिजीविषा
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मैं चलते चला जा रहा हूँ
मैं बढ़ते बढ़ा जा रहा हूँ
मैं तलाशने निकला हूँ
अपनी मंजिल
मैं नित गढ़े चले जा रहा हूँ
अपने पावँ तले की ज़मीन
मैं जीवन हूँ।।
राजेन्द्र शर्मा
21/11/2020
11: 12 PM
अलवर (राजस्थान)