@Asharamjibapu__ "कलिजुग केवल हरि गुन गाहा।
गावत नर पावहिं भव थाहा॥"
अर्थ: कलियुग में भगवान के गुणों का गान (भजन-कीर्तन) ही मुख्य साधन है। जो मनुष्य भगवान के गुणों का गान करता है, वह संसार-सागर (जन्म-मरण के बंधन) से पार हो जाता है।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
Disciples of Sant Shri Asharamji Bapu successfully conducted #Balsanskar classes for Juniors on 05.06.2026 at Shubodhini English High School, ITI Layout, #Bengaluru to inculcate sanskaras & moral values in children.
Here are the glimpses of the event.👇
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📿✨🕉️ शिवाजी की वीरता भाग - 4 🕉️✨📿
⚔️👊🏼 छत्रपति शिवाजी महाराज की गुरुभक्ति: भाग - 2
👁️💨 श्वासों श्वास की गिनती
🥵🧘 धनुरासन
🔉🌙 सोमवती अमावस्या को क्या करें, क्या ना करें
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#balsanskarkendra
Roots Of Religion remain strong bcoz saints stand firm to protect them
Sanatan Dharma is a living
#LegacyOfHinduSaints thru their wisdom & selfless efforts,saints have spread its timeless values among mankind,awakened people about a culture that has d power 2 enlighten d world.
#LegacyOfHinduSaints - Pujya Sant Shri Asharamji Bapu has consistently emphasized preserving India’s spiritual heritage through cultural awakening. His efforts inspire generations to strengthen their faith in Sanatan Dharma, & uphold values that form the true Roots Of Religion.
बापूजी ने समाज को नशे के जाल से मुक्त करने के लिए देशव्यापी नशामुक्ति अभियान चलवाया व त्योहारों में आई विकृतियों को दूर किया।
बापूजी ने Sanatan Dharma की मर्यादा और Roots Of Religion को पुनर्जीवित किया। #LegacyOfHinduSaints
वाराणसी के हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में "सुपर एल नीनो वर्ष 2026 में धान की सीधी बुआई एवं उन्नत खेती पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में डॉ प्रकाश सिंह, धान अभिजनक कृषि विश्वविद्यालय बिहार ने बताया कि खेती में एल नीनो के प्रभाव को कम करने में DSR का महत्वपूर्ण भूमिका है
मन ही हमारे दुख-सुख का और ऊंचाई-नीचाई का, पतन और उत्थान का कारण है। ना ग्रह शास्त्र कारण है, ना प्रारब्ध वेग कारण है, ना ज्योतिष कारण है। हमारा मन ही हमारे पतन और उत्थान का कारण है। ये श्रीमद्भागवत के ग्यारहवें स्कंध में है।
और गीता कहती है, "आत्मैव आत्मनो बंधु।" मनुष्य अपने आप का बंधु है और अपने आप का शत्रु।
तो पुरुषार्थ ये करना है कि मन में जो आए वो खा लिया, जो आए वो बोल दिया, जैसा आए वो कर लिया, तो अपने आप का सत्यानाश करने वाला होगा।
अगर मन के आगे धर्मशास्त्र, ईश्वर आज्ञा, समाज व्यवस्था रखकर, नियंत्रित करके मन को चलाया जाए, तो मन आपको ईश्वरमय कर सकता है। यहां पुरुषार्थ है।
#AsharamjiBapu
न आत्मा में दुःख है, न परमात्मा में दुःख है, न ही प्रकृति में दुःख है । ईश्वर हमारा दुश्मन नही है कि हमको दुःखी करने के लिए ये संसार बनाए।
भूल ये हो गई है कि सांसारिक पदार्थो एवं इंद्रियों से सुख लेने की वासना के कारण मनुष्य जीवन मे दुःख हैं । उस दुःख का मूल तनाव है और उस तनाव का मूल भोग संग्रह है !
#AsharamjiBapuQuote
सत्संग में एक-एक क़दम चलकर आते हैं, यज्ञ करने का फल होता है, श्रद्धा भक्ति से बैठते हैं, तो भक्तियोग का फल होता है और सत्संग सुनते तो ज्ञानयोग तो स्वाभाविक मिलता है।
कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग तीन-तीन योग होता है सत्संग से।
#AsharamjiBapuQuotes
सौ काम छोड़कर भोजन कर ले, हज़ार काम छोड़कर स्नान कर ले, लाख काम छोड़कर दान, पुण्य, शुभ कर्म कर ले, लेकिन करोड़ों काम छोड़कर हरि का ज्ञान और हरि का ध्यान धर ले, इसी से तेरा मंगल है, इसी से तेरा कल्याण है।
#AsharamjiBapuQuotes
तो सुबह नींद में से उठो। प्रार्थना करो कि हमें झूठ, कपट, बेईमानी, भोग, संग्रह, शरीर और संसार की आसक्ति मिटाने की सत्बुद्धि दे, महाराज। इतना आप कर सकते हैं, इसमें कोई जोर नहीं आएगा। तेरे तरफ प्रीति दे दे, क्योंकि हम जीवात्मा चैतन्य परमात्मा के हैं। शरीर जड़ है, परिवर्तनशील है और हमारा नहीं है, महाराज, यह हम अब समझे हैं। शरीर मैं नहीं हूँ, शरीर मेरा नहीं है। अगर मेरा होता तो महाराज, मेरे कहने में चलता। अब खोपड़े में बात समझ आ गई। शरीर मेरा होता तो मेरे कहने में चलता। मैं चाहूंगा क्या बाल सफेद हो जाए, झुर्रियाँ पड़ जाए, बीमार हो जाए या मर जाए। कोई नहीं चाहता, तो शरीर हमारे कहने में नहीं चलता और शरीर हम नहीं हैं। फिर भी महाराज, आपकी माया आप ही हरिए हरि और आपकी कृपा आप ही भरिए, महाराज। हम अब आपके सन्मुख होना चाहते हैं। हमारी ताकत नहीं है, तुम्हारी कृपा और दया चाहते हैं। #AsharamjiBapu
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संसार असार है।आयु का,धन का, स्वास्थ्य का भरोसा नहीं।खाते-2 लोग लुढ़क जाते हैं।
इस असार संसार में बार-बार किया हुआ अपने सोहम स्वभाव का चिंतन,अपने अमरत्व का चिंतन,ज्ञान,सत्संग और अमरत्व को पाए हुए महापुरुषों का सानिध्य,सत्संग सारों का भी सार है।
#RishiDarshan#AsharamjiBapu
"मनुष्य के भावी जीवन का आधार उसके बाल्यकाल के संस्कार एवं चारित्र्यनिर्माण पर निर्भर करता है।"
#Bapuji की प्रेरणा से ओडिशा में चल रहे बालसंस्कार केन्द्र की झलकियाँ..
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