People are really running out of patience waiting to see my degree.
Makes me wonder how they’ve managed for 12 years without seeing the Prime Minister’s.
Sir @narendramodi, let’s both show our degrees and put an end to this?
युवाओं के आंदोलन का एक बड़ा सबक बड़े मीडियावालों के लिए भी है: Mainstream Media को Main Street Media बनना होगा।
इस आंदोलन ने बड़े-बड़ों की position ROTATE कर दी है, मीडिया भी इसका अपवाद नहीं है। आज संकट सिर्फ़ ‘राष्ट्रीय सरकार’ के लिए ही नहीं, तथाकथित ‘राष्ट्रीय मीडिया’ के लिए भी बराबर का ही है। जवाबदेही का सवाल केवल किसी एक के लिए नहीं है।
जब कोई ‘वोकल फॉर लोकल’ का नारा दे रहा था, तो नेशनल मीडिया के लोग समझ ही नहीं पाए कि वे जिस बात का प्रचार कर रहे हैं, वह केवल किसी प्रोडक्ट तक सीमित नहीं रहेगी। अगर राष्ट्रीय मीडिया अपनी चकाचौंध और पैकेजिंग में न्यूज़ को प्रोडक्ट बनाकर पेश करेगा, तो फिर आम लोग भी लोकल और स्थानीय चैनलों पर ज़्यादा भरोसा करेंगे, क्योंकि वे उनकी पहुँच में हैं और उनमें उन्हें अपनी भाषा-बोली का अपनापन भी दिखता है, साथ ही उन स्थानीय पत्रकारों के दिनभर के दौड़ते-भागते रहने के संघर्ष में सच्चाई भी दिखती है।
जनहित के लिए समर्पित ’आकार में छोटे लेकिन विचार में बड़े’, ये सभी सच्चे न्यूज़ व व्यूज़ चैनल्स या यूट्यूबर जर्नलिस्ट-पैनलिस्ट केवल दिखावटी औपचारिकता पूरी नहीं करते हैं, बल्कि जनमानस के बीच की बातें करते हैं। ये ऊपरी-ऊपरी औपचारिक कॉस्मेटिक जर्नलिज्म नहीं करते हैं; बल्कि जनता के मसलों, मुद्दों और जन सरोकार से जुड़े सच्चे विषय उठाते हैं। ये सरकार के सहयोग से कॉरपोरेट मीडिया की तरह चमचमाते नहीं हैं बल्कि जनता के ऐतबार से चलते हैं। ये एक हाथ से माइक या मोबाइल पकड़ते हैं और दूसरे से अपने गमछे से पसीना पोंछते हैं। ज़मीन से जुड़ी यह ‘माटी पत्रकारिता’ या कहें ‘Grounded Journalism’ ही सच्चे जर्नलिज़्म का भविष्य है।
अब जनता ‘नाटकीय निरर्थक विवाद’ नहीं, ‘वास्तविक सार्थक संवाद’ देखना चाहती है।
अब ‘जिसका दाना, उसका गाना’ वाला चारण युग अपने अंतिम पड़ाव में है।
This is absolute cinema 🔥
Gaurav Gogoi exposed BJP on the floor of Parliament
"Dharmendra Pardhan resigned because 21 NEET students died, but he was welcomed the next day as if he came from a war fought for India" 🗿
Opposition is ruthless now
मेट्रो बंद करो।
रास्ते बंद करो।
दुकानें बंद करो।
Internet बंद करो।
खाना बंद करो।
अपना हक़ मांग रहे छात्रों के ख़िलाफ़ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए।
बस एक चीज़ बंद नहीं कर पाए, मोदी जी - पेपर लीक।
This is hilarious.
ANI picked a commuter facing issues because of Metro closure and thought he will blame the protesters.
Instead he ended up blaming BJP 🤭
ANI reporter immediately pulled away the mic and left.
नड्डा साहिब की PC का सरकार और उनके tv वालों ने इतना माहौल बनाया। लोगों को उम्मीद थी कि वे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का ऐलान करेंगे। लेकिन उन्होंने तो कुछ नहीं बोला। इसका मतलब मोदी जी युवाओं को हल्के में ले रहे हैं।
20 जुलाई को हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संसद चलो मार्च पर चप्पल पहनकर, बिना वर्दी के एक व्यक्ति प्रदर्शनकारियों पर डंडे भांज रहा था.
लल्लनटॉप के पत्रकार अभिलाष ने सवाल किया तो केवल सवाल पूछने की वजह से ही रिपोर्टर को लाठी मार दी गई.
इसके बाद पुलिस ने भी लाठी मारने वाले का बचाव किया और बदतमीज़ी करते हुए माइक जमीन पर फेंक दिया.
@DelhiPolice
CJP | Delhi Police | Reporter
THIS IS ANJANA GETTING SCHOOLED AGAIN 🔥
ANJANA: Celebrity YouTube teachers are making paid videos and looting students’ parents.
SUMAN MA’AM 🎯: Paid by whom? Is my marker on rent? Is my mic on rent? Is my camera on rent?
ANJANA: These shallow YouTuber teachers run shops on students’ hard work.
SUMAN MA’AM: We made education easy for children who could not come to cities. You call that dhanda?
ANJANA: They are coaching mafia.
SUMAN MA’AM 🔥: If you had done your journalism properly, teachers would not need to make these videos. Our real stardom is when a poor village student gets selected and his family smiles.