विषय सदैव #दिगंबर या #श्वेतांबर के बजाय यह गर्व वाला होना चाहिए की कम से कम #जैन समाज को सेवा-पूजा,उपासना,व्यवस्था का अवसर किसी प्रबल पुण्य से प्राप्त हो रहा है नहीं तो लाखों जिनालयों को कन्वर्ट कन्ट्रोल अन्य रूप मान्यता में किया गया है सच में लड़ना है तो उनके लिए मिलकर लड़ें।
प्रारंभिक काल में श्वेतांबर समाज भी वीतराग, नग्न (अचेलक) स्वरूप में ही पूजा करता था। उस समय साधुओं के दो स्वरूप प्रचलित थे—अचेलक (नग्न) और सचेलक (वस्त्रधारी), जो आज भी परंपरा में विद्यमान हैं। प्रारंभिक प्रतिमाएँ पूर्णतः वीतराग, निष्काम और निर्विकार स्वरूप में ही निर्मित होती थीं।
ऐतिहासिक साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि प्रारंभिक
जैन परंपरा में तीर्थंकरों का स्वरूप अत्यंत सरल, निर्वस्त्र और आत्मशुद्धि का प्रतीक था। बाद के काल में, सामाजिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय प्रभावों के कारण प्रतिमाओं के स्वरूप में परिवर्तन किया गया और वस्त्र व आभूषण जोड़े गए।
यह परिवर्तन मूल परंपरा नहीं, बल्कि समय के साथ हुआ एक संशोधन था। मूल जैन दर्शन में आज भी वीतरागता, त्याग और निर्विकारता को ही सर्वोच्च आदर्श माना जाता है।
#Jainism
ज्ञान भंडार 📚 Series - 31
बारह देवलोको में कितने जिनमंदिर एवं जिनप्रतिमाएँ है :-
देवलोक जिनमंदिर जिन प्रतिमा पहला देवलोक :-बत्तीस लाख सत्तावन करोड सात लाख
दूसरा देवलोक :-अट्ठावीस लाख पचास करोड चालीस लाख
तीसरा देवलोक :-बारह लाख इक्किस करोड साठ लाख
चौथा देवलोक :-आठ लाख चौदह करोड चालीस लाख
पांचवां देवलोक :-चार लाख सात करोड बीस लाख
छट्ठा देवलोक :-पचास हजार निब्बे लाख
सातवां देवलोक :-चालीस हजार बहत्तर लाख
आठवां देवलोक :-छह हजार एक लाख साठ हजार
नौवां-दसवां देवलोक :-चार सौ बहत्तर हजार
ग्यारहवां-बारहवां देवलोक :- तीन सौ चौपन हजार जिन प्रतिमा है.
#जिनवाणी जैन आगम
भगवान बाहुबली एवं ब्राह्मी एवं सुंदरी की प्रतिमाएं
तमिलनाडु भारत
यह प्रतिमा भगवान बाहुबली की हैं, जिन्हें *गोम्मटेश्वर* भी कहा जाता है। ये प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के पुत्र थे।
कायोत्सर्ग मुद्रा:खड़े होकर ध्यान की मुद्रा। यह कठोर तप का प्रतीक है।
दिन तरफ भगवान बाहुबली की बहनें
*ब्राह्मी और सुंदरी* हैं।
कथा के अनुसार जब बाहुबली को केवलज्ञान नहीं हो रहा था, तो उनकी बहनों ने आकर कहा - "भैया, हाथी से उतरो"। इसका मतलब था 'अहंकार के हाथी से उतरो'। यह सुनते ही बाहुबली का अहंकार टूटा और उन्हें केवलज्ञान हो गया। मूर्ति में दोनों बहनें उन्हें समझाती हुई दिख रही हैं।
ऊपर कोनों में छोटे-छोटे दृश्य हैं। ये *देव-देवियाँ* हैं जो बाहुबली की तपस्या से प्रसन्न होकर पुष्पवर्षा कर रहे हैं।
यह मूर्ति सिर्फ पत्थर नहीं, बल्कि *3 बड़े संदेश* देती है:
. *अहंकार छोड़ो:* बड़े भाई भरत से युद्ध जीतकर भी बाहुबली ने राज्य त्याग दिया।
*तप की शक्ति:* 1 साल अडिग खड़े रहना - संकल्प की पराकाष्ठा।
.*वैराग्य:* संसार की हर वस्तु नश्वर है। सच्चा सुख आत्मा में है।
बाहुबली को *प्रथम कामदेव* भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने काम और अहंकार दोनों पर विजय पाई थी।
यह मूर्ति देखकर ही मन में शांति और वैराग्य की भावना आ जाती है।
#Jainism #jaindharm #bahubali
#तमिलनाडु #bharat
क्या मंत्र जाप से लक्ष्मी मिलती है? 🤔✨
मंत्र जाप मन को एकाग्र, शांत और सकारात्मक बनाता है। 🌿
लेकिन क्या केवल मंत्र जाप से धन की प्राप्ति हो जाती है, या इसके साथ पुरुषार्थ और सद्कर्म भी आवश्यक हैं? 💭
#mantra#mantrajap#lakshmi#reels#moneymindset
नव दंपति कहीं ये भूल तो नहीं कर रहे? 🤔
वैवाहिक जीवन की शुरुआत प्रेम से होती है, लेकिन उसे सफल बनाने के लिए समझ, संवाद और विश्वास की भी आवश्यकता होती है। ❤️🙏
#marriage#couplegoals#relationship#love#family
Khazana Building, Hyderabad
Museum near Golconda Fort have several remarkable Jain idols and sculptural fragments, silently narrating the rich Jain history of the Telangana region.
These ancient images of Tirthankaras, Yakshas, and Yakshinis though many are damaged and neglected display exquisite craftsmanship and reflect the strong presence of Jainism in medieval Telangana. The serene standing and seated figures, intricate carvings, and symbolic iconography are invaluable archaeological treasures.
Sadly, many of these sculptures remain inadequately displayed and deserve greater attention, conservation, and scholarly study. They are not merely stone relics but witnesses to centuries of Jain faith, art, and culture.
#JainHeritage #KhazanaBuilding #JainIdols #Golconda #HyderabadHistory #Jainism #Archaeology
🌿 एक कॉल... और बच गई एक जैन भाई की जान! 🌿
कभी-कभी जीवन में ऐसी घटनाएँ घटती हैं जो हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि समाज में एक-दूसरे के लिए खड़े रहना कितना महत्वपूर्ण है।
दिनांक 2 जून 2026 की सुबह मध्यप्रदेश से अंतर्राष्ट्रीय जैन संघ के राजेशजी का संदेश प्राप्त हुआ।
जानकारी मिली कि सुरेंद्र जैन जी कई दिनों से लापता थे।
अचानक उनके परिवार को तमिलनाडु के पेरुंदै स्थित एक सरकारी अस्पताल से फोन आया कि वे गंभीर रूप से घायल अवस्था में भर्ती हैं।
उनके शरीर पर अनेक चोटें थीं, वे बोलने की स्थिति में नहीं थे और किसी को यह भी नहीं पता था कि उनके साथ क्या हुआ।
परिवार सैकड़ों किलोमीटर दूर था।
भाषा की समस्या अलग थी।
समय बहुत कम था
और
तत्काल सहायता की आवश्यकता थी।
जैसे ही यह सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की गई,
कुछ ही मिनटों में अनेक जैन बंधुओं ने इरोड़ और आसपास के संपर्क उपलब्ध करवाए।
इसी दौरान चेन्नई निवासी श्रीपालभाई जैन करबावाला का फोन आया।
बिना किसी व्यक्तिगत परिचय के उन्होंने तुरंत अपने भाई को लगभग 30 किलोमीटर दूर अस्पताल भेजा।
उन्होंने घायल सुरेंद्रजी की पहचान सुनिश्चित की,
उपचार की व्यवस्था करवाई,
आवश्यक देखभाल उपलब्ध करवाई
और
परिवार के पहुँचने तक हर संभव सहायता का दायित्व अपने ऊपर ले लिया।
श्रीपालभाई की एक बात दिल को छू गई—
*"चाहे दिगंबर जैन हों या श्वेतांबर, स्थानकवासी हों या तेरापंथी... मेरे लिए सबसे पहले वे भगवान महावीर स्वामी के अनुयायी हैं।*
मैं उनकी हर संभव मदद करूँगा।"
यही तो है सच्चा जैनत्व।
सोचिए...
यदि समय पर सहायता नहीं मिलती,
कोई अटेंडेंट साथ नहीं होता
और
उपचार में देर हो जाती तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती थी।
यह घटना केवल एक व्यक्ति की सहायता की कहानी नहीं है,
बल्कि यह प्रमाण है कि सोशल मीडिया का सदुपयोग और जैन समाज का परस्पर सहयोग किसी के जीवन में चमत्कार कर सकता है।
मध्यप्रदेश से सूचना,
चेन्नई से संपर्क,
इरोड़ में सहायता
और
कुछ ही मिनटों में समाधान
—यह केवल तकनीक नहीं,
बल्कि जैन समाज की जीवंत एकता की शक्ति है।
🙏 श्रीपालभाई जैन करबावाला एवं इस कार्य में सहयोग करने वाले सभी महानुभावों की हार्दिक अनुमोदना।
🌟 यह घटना पुनः सिद्ध करती है कि जैन समाज को देशभर में संगठित जैन हेल्पलाइन नेटवर्क की आवश्यकता है,
ताकि संकट की घड़ी में कोई भी जैन परिवार स्वयं को अकेला महसूस न करे।
*हेल्पलाइन पुणे जैन समुदाय ऐसे सभी सेवाभावी व्यक्तियों, संस्थाओं और संगठनों को नमन करता है*
जो
*मानवता, करुणा और जैन एकता के इस दीप को प्रज्वलित रखे हुए हैं।*
*एक जैन – दूसरे जैन का सहारा बने। यही महावीर का संदेश है, यही समाज की शक्ति है।*
🙏 जय जिनेन्द्र
श्री अतिशय क्षेत्र पटेरिया जी में आज श्रद्धा, भक्ति एवं मंगल भावनाओं के साथ शांतिधारा सम्पन्न हुई।
श्री जिनेन्द्र भगवान की असीम कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे तथा धर्म प्रभावना निरंतर बढ़ती रहे।
जय जिनेन्द्र🙏🏻
कर्म की निर्जरा करनी है तो करें ये काम! 🌿📿
जीवन में शांति, आत्मिक उन्नति और कर्मों के बोझ को हल्का करना चाहते हैं? 🤔
तो अपने जीवन में स्वाध्याय, संयम, सेवा, तप और शुभ भावनाओं को स्थान दीजिए। 🙏✨
#karma#Jainism#selfgrowth#explorepage#spirituality
🌿 दिल्ली में जैन समाज के लिए एक महत्वपूर्ण सेवा का शुभारंभ 🌿
प.पु.उपाध्याय श्री गुप्ति सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से
श्री संकट हरण भगवान पार्श्वनाथ मंदिर, राणा प्रताप बाग, दिल्ली में
*"जैन रसोई"*
का शुभारंभ श्रुत पंचमी, शुक्रवार 19 जून से किया जा रहा है।
दिल्ली आने वाले जैन समाज के श्रद्धालुओं एवं निम्न अस्पतालों में भर्ती मरीजों
तथा
उनके परिजनों के लिए शुद्ध सात्विक जैन भोजन की व्यवस्था की गई है।
🍛 भोजन में शामिल रहेगा: ▪️ 2 सब्जी
▪️ दाल
▪️ चावल
▪️ चपाती
▪️ मिठाई
▪️ कचौरी
💰 सेवा सहयोग राशि मात्र ₹25 प्रति थाली
🏥 प्रारंभिक चरण में दिल्ली के 18 प्रमुख अस्पतालों में भोजन पहुँचाने की व्यवस्था की जाएगी।
भविष्य में अधिक अस्पतालों तक यह सेवा विस्तार करने का प्रयास रहेगा।
📞 भोजन एवं अन्य जानकारी हेतु संपर्क करें:
जैन रसोई हेल्पलाइन: 9355551008
⏰ 2 से 4 व्यक्तियों के लिए कम से कम 4 घंटे पूर्व सूचना दें।
⏰ अधिक संख्या होने पर एक दिन पूर्व सूचना देना आवश्यक है।
🙏 यह सेवा जैन समाज के सहयोग से ही सफल होगी।
आपसे विनम्र अनुरोध है कि इस संदेश को अधिक से अधिक जैन परिवारों एवं जैन समाज के समूहों तक पहुँचाने में सहयोग करें।
“सेवा, सहयोग और संस्कार — यही समाज की सच्ची शक्ति है।”
जय जिनेन्द्र। 🙏
दिल्ली जैन समाज पवन जैन गोधा • अजय जैन • रविन्द्र प्रसाद जैन • सुनील जैन • अमित जैन • सुरेश पांड्या • प्रवीण पाटनी • मुकेश जैन • संदीप जैन एवं समस्त दिल्ली जैन समाज
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(सिर्फ जैन समुदाय के अनुयायियों के लिए)
आत्मा की अनुभूति करनी है, तो साधना का दायरा भी बड़ा बनाना होगा। 🙏✨
छोटे प्रयास बड़े परिणाम नहीं दे सकते।
जैसे नदी में नाव चल सकती है, वैसे ही गहन साधना से आत्मकल्याण का मार्ग खुलता है। 🌿🕊️
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मलबे के ढेर में छिपी आस्था की एक जीवित कहानी! 11वीं शताब्दी का 'रत्नत्रय जिनालय' (कार्ला)—जिसकी अद्भुत वास्तुकला ने 1993 के विनाशकारी लातूर भूकंप को भी बेअसर कर दिया। जहां सब कुछ बिखर गया, वहां हमारे तीर्थंकरों की मूर्तियां पूरी तरह सुरक्षित और अविचलित रहीं। यह सिर्फ कला नहीं, साक्षात चमत्कार है! 🏛️ विस्मयकारी विरासत को नमन।"
#जैनमंदिर #कार्लाजैनमंदिर #लातूर #आस्थाकाचमत्कार #इतिहास #अद्भुतवास्तुकला #दिगंबरजैन #रत्नत्रयजिनालय #पार्श्वनाथभगवान #MiracleOfFaith #JainHeritage #laturearthquake1993
ओडिशा के जगतसिंहपुर स्थित खंडेश्वरा शिव मंदिर में आज भी एक प्राचीन दिगंबर जैन तीर्थंकर प्रतिमा विराजमान है। समय के साथ इसकी पहचान बदल गई, लेकिन इसकी मुद्रा, लक्षण और शिल्पकला अब भी इसके जैन मूल की गवाही देते हैं। इतिहास की परतों में छिपी यह विरासत हमें भारत के बहुधार्मिक अतीत की याद दिलाती है।समय ने नाम बदल दिए, पर सत्य नहीं बदला। जिन प्रतिमाओं को कभी तीर्थंकर कहकर वंदित किया गया, आज वे किसी और नाम से पूजी जा रही हैं। इतिहास मौन है, पर पत्थर अब भी अपनी पहचान संजोए हुए हैं।
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