**प्रेस विज्ञप्ति**
दिनांक: 03-02-2025
तहसीलदार बड़खल के खिलाफ़ अन्यायपूर्ण एफ़आईआर के विरोध में हरियाणा के सभी राजस्व अधिकारी सामूहिक अवकाश पर चले गए है।
एकजुटता और विरोध के तौर पर, हरियाणा के सभी राजस्व अधिकारी आज, 03-02-2025 को सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। यह निर्णय पुलिस अधिकारियों द्वारा उचित जांच किए बिना, तहसीलदार बड़खल, जिला फरीदाबाद के खिलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने के हालिया और चिंताजनक निर्णय के जवाब में लिया गया है।
वरिष्ठ राजस्व अधिकारी के खिलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने का निर्णय केवल एक निजी व्यक्ति की शिकायत के आधार पर लिया गया था, इस तरह के गंभीर कानूनी कदम को दर्ज करने से पहले कोई जांच या उचित परिश्रम नहीं किया गया था। इस जल्दबाजी की कार्रवाई ने राजस्व अधिकारियों को बहुत परेशान कर दिया है, क्योंकि यह न्याय, निष्पक्षता और प्रणाली की अखंडता के मूल सिद्धांतों को कमजोर करता है, जिसे वे अपनी पेशेवर क्षमता में बनाए रखते हैं।
हरियाणा राजस्व अधिकारी संघ ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि इस तरह की हरकतें प्रशासनिक व्यवस्था में विश्वास को खतरे में डालती हैं और एक खतरनाक मिसाल कायम कर सकती हैं, जहां अधिकारियों को बिना किसी तथ्यात्मक आधार के गलत तरीके से फंसाया जा सकता है। इस तरह के गंभीर कानूनी कदम उठाने से पहले उचित जांच न किए जाने से राजस्व अधिकारियों का कानूनी व्यवस्था की निष्पक्षता पर भरोसा डगमगा गया है।
प्रदर्शनकारी अधिकारी स्थिति की तत्काल समीक्षा और भविष्य में मामलों में उचित प्रक्रिया और उचित जांच का पालन किए जाने का आश्वासन मांग रहे हैं। उनकी मांग है कि न्याय मिले और प्रशासनिक और कानूनी ढांचे की अखंडता को बनाए रखा जाए।
सामूहिक अवकाश एक दिन का है, लेकिन अगर सरकार से कोई आश्वासन नहीं मिलता है तो एचआरओए हड़ताल जैसे अन्य विकल्पों को अपनाने के लिए बाध्य हो सकता है। राजस्व अधिकारी उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप का अनुरोध कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोक सेवकों के अधिकार और सम्मान को बरकरार रखा जाए।
हरियाणा राजस्व अधिकारी संघ
मैं और मेरा बचपन
स्कूल जाने में मैंने जितने फफड किए है वो नजारे अब दिखाई ही नहीं देते हैं। मेरे हाथ पांवों को चार भाई बहन पकड लेते थे और मैं दहाडे मारकर रोता हुआ जाता था। रोने का मेरा अपना स्टाइल था बिल्कुल एक सुर में रोता था मैं।
रास्ते में एक बूढी चंद्रो का घर पडता था। कौन थी कहां से आई थी क्या इतिहास था, मैं नहीं जानता लेकिन हर बच्चा उससे डरता था पर मेरे लिए वो वरदान किरदार थी। जैसे ही मुझे रोता देखती, जोर से आवाज लगाती छोडडो रै इसने और मेरी तरफ आगे बढती और भाई बहन मुझे बीच सडक छोडकर स्कूल भाग जाते थे। मैं चंद्रों के पास शांति से बैठ जाता था, बहुता अपनापन था उनमें।
चंद्रों से बचने का रास्ता ये निकाला गया कि भाई बहनाें ने मेरा जुलूस चंद्रो की गली से निकालना छोड दियाऔर दूसरी गली से मुझे बाइज्जत इसी सम्मान के साथ स्कूल ले जाया जाने लगा। स्कूल में रोते हुए मुझे अक्सर हमारी घर की भैंस और उसका छोटा कटडा याद आता था। बाद में जब मुझे अपने छोटे भाई विकास को स्कूल ले जाने की जिम्मेदारी निभानी पडी तो वो भी मुझे कहता था कि उसे भैंस का कटडा याद आ रहा है तो मैं उसको गले लगा लेता। मास्टरजी के पलक झपकते ही मैं स्कूल से फरार होने में मास्टर था।
हमारे स्कूल का नाम यूं तो विकास पब्लिक स्कूल था लेकिन कच्ची ईंटों के इस मकान को हम भागां वाला स्कूल कहते थे। स्कूल में कोई खास समस्या नहीं थी लेकिन एक मास्टरजी का खौफ इतना भरा हुआ कि पूछो मत। एक दिन मास्टरजी मेरे नजदीक आए, मेरा दिल जोरों से धडकने लगा, उन्होंने सिर पर हाथ रखा और कहा तूं इतना प्यारा बच्चा है मत रोया कर स्कूल आते हुए तुझे नहीं कहूंगा मैं। बस उस दिन के बाद मैं स्कूल जाने लगा, बिना रोए, बिना चार हाथों पर सवार हुए।
एक दिन बालसभा हुई और हिम्मत करके अपनी तोतली आवाज में एक चुटकला सुना दिया, बस उस दिन के बाद किस्से, कहानियां,भाषण, वाद विवाद, अखबार, दोस्त, रंगमंच, दादा से लंबी वार्ताएं, नॉवेल, धर्म अध्यात्म, साधना, पत्रकारिता समेत कहानियों से भरी है मेरी जिंदगी। मेरे जैसी मेरी बेटी है, हुबहू मेरी जैसी आदते हैं उसकी, चैतन्य बहुत अलग तरह का बच्चा है, बिल्कुल आजाद हवाओं जैसा। दोनों को देखकर अपना बचपन जी लेता हूं। अपने अनुभव से इतना कह सकता है कि बच्चों को कहानियां सुनाएं। आप जितनी ज्यादा कहानियां उनको सुनाएंगे उनकी कल्पना शक्ति उतनी ही विस्तार लेगी।
बापू-बेटा कहने वालों सुनो:
#हरियाणा में जितने भी CM रहे, उनके पुत्र एवं भतीजे हमेशा उनकी कमज़ोरी बनकर उभरे हैं। राज के दौरान किसी ने आवारागर्दी 👎🏻 की, रिश्वत ली या गुंडागर्दी, हत्या और रेप किए।
हुड्डा ji एक मात्र CM हैं जिनके पुत्र @DeependerSHooda उनकी कमज़ोरी नहीं, ताकत हैं⚡️
हार जाने का मतलब मरना नहीं होता
हार जाने का मतलब होता है
एक काम था जो हमसे नहीं हुआ... बस
सुनीता करोथवाल की किताब सांझे की बेटियां आ गई हैं। सुनीता की अब तक साहित्य यात्रा का मैं साक्षी रहा हूं और मेरा विश्वास है कि समसामयिक विषयों और ग्राम्य जीवन पर उससे बेहतर कविताएं मैंने आज तक कहीं और नहीं पढी। ये किताब अमेजॉन पर आप मंगवाकर पढें।
हरियाणा राजस्व आयोग ने हरियाणा के तमाम राजस्व रिकार्ड से ऐसे शब्दों को ढूंढकर उनका अंग्रेजी या हिंदी प्रतिस्थापक या अर्थ समझाता एक शब्दकोश तैयार किया है।
उसका प्रिंट सरकार की अनुमति के लिए लंबित है।