संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सहयोगी सांसदों के साथ देश का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए अत्यंत गौरव, सम्मान और यादगार अनुभव का विषय रहा।
#WATCH | Rajkot, Gujarat: Kshatriya Rajput women performed the traditional Sword Raas at Rajvi Palace during Navratri, displaying sword-fighting skills while riding bikes and jeeps. (12.10)
गुजरात के राजकोट में शाही परिवार की ओर से पारंपरिक तलवार रास का आयोजन किया गया। इस दौरान तलवारों के साथ रास की प्रस्तुति दी गई, जिसमें गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शौर्य की झलक देखने को मिली।
#Rajkot#Gujarat#SwordRaas#RoyalFamily
कोटि-कोटि आभार #बीदासर
सरलीकरण यात्रा के दौरान भले ही पहुँचने में देरी हुई, लेकिन आपके अटूट विश्वास, धैर्य और स्नेह की ताकत देखिए कि आप सुबह चार बजे तक भी इंतजार करते रहे। आपकी यह आत्मीयता और सरलीकरण की मुहिम के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।
आप सभी ने अपना बहुमूल्य समय देकर जिस उत्साह और एकजुटता के साथ इस यात्रा को अपना समर्थन दिया, वह हमारे संघर्ष की सबसे बड़ी ताकत है।
सरलीकरण की इस साझा लड़ाई में सहयोग करने वाले समस्त जागरूक साथियों, युवाओं और क्षेत्रवासियों का हृदय से आभार।
आपका यह विश्वास ही हमारी ऊर्जा है और आपका साथ ही हमारी ताकत।
आपका साथ, हमारा संकल्प!
#सरलीकरण
सुबह तीन बजे तक लोगा री भीड़ सिर्फ ई वास्ते ताकि भाटी ने सुन सके और सम्मानित कर सके । पहली कदी एड़ी भीड़ देखी झकी रात माई नेता ने अड़ीके ताकि सुन सके । एक example है बाक़ी नेता वासते की कतरो ज़रूरी है ज़मीन माथे लोगा सू जुड़े और बिया वास्ते काम करे । मींखा री माया है सा समझो 🦅🚩
न फूल, न माला... दिलफेंक समर्थक ने अपनी मूंछें पहनाकर किया निर्दलीय विधायक रविंद्र भाटी स्वागत, रातभर सड़कों पर जनसैलाब
#RavindraBhati#RavindraBhatiWelcome#SheoMLA
https://t.co/CU4UeRw0Ao
रविंद्र सिंह भाटी का प्रभाव देखकर…
बड़े बड़े नेता गश खाते होंगे…
और सबसे बड़ी बात ये है कि ये केवल एक जाति के लोग नहीं है…
और उससे भी बड़ी बात ये है कि ये केवल एक सीमित क्षेत्र की बात नहीं है…
जहाँ जहाँ बंदा जा रहा है…
वहाँ वहाँ इस तरह का क्रेज़ देखने को मिल रहा है…
राजस्थान वालों ने एक बार कांग्रेस एक बार भाजपा की घुट्टी पी रखी है…
वरना तीसरा मोर्चा खड़ा करना और उसे सफल करने की कूवत रखता है ये बंदा….!!
मेवाड़ के परमप्रतापी शासक बप्पा रावल जी, जिन्होंने प्रतिहारों के साथ मिलकर अरब आक्रांताओं से भारतभूमि की रक्षा की, अपने शत्रुओं को इतना भयभीत किया कि अगले 300 वर्षों तक किसी ने हिंदुस्तान की तरफ आंख उठाकर नहीं देखा
@rajput_pride🏹
उदयपुर का कन्हैया लाल हत्याकांड…
सोचो अगर राजस्थान और केन्द्र में कांग्रेस की सरकार होती…
और हत्यारों को चार साल तक सजा नहीं मिल पाती…
हत्यारे लगातार ज़मानत याचिका लगा रहे होते…
और कोर्ट ज़मानत ख़ारिज कर रहा होता…
तो ये भाजपा वाले पूरी कांग्रेस को आतंकवादी घोषित कर चुके होते…
राहुल गांधी के आतंकवादियों से संबंध स्थापित कर चुके होते…
राहुल गांधी की विदेश यात्राओं का लिंक आतंकियों से जोड़ चुके होते…
तरह तरह के WhatsApp मेसेज फ़ॉरवर्ड हो रहे होते…
अभी चार इंजन की भाजपा सरकार है…
और कितने इंजन चाहिए इनको आरोपियों को सजा दिलाने के लिए…??
@JATbera1 जालोर मटकी कांड के समय आप खुद ने 10 दिन लगातार सुबह-शाम दोनों समय जो जाति आधारित ट्रेंड चलाए थे वो राजनीतिक व जातिय खुनस नहीं थी.?
यदि जालोर मटकी कांड में थप्पड़ मारना दलित उत्पीड़न और सामंती सोच थी तो कलाम थप्पड़ कांड दलित उत्पीड़न ओर लठैतवादी सोच क्यों नहीं.?
अध्यापक को ग़ुस्सा आना स्वाभाविक हैं…
कोई बड़ी बात नहीं है…
अध्यापक का डाँटना भी स्वाभाविक है…
इसमें भी कोई बड़ी बात नहीं है…
लेकिन जो अध्यापक ग़ुस्से में अपनी बोली और अपने कृत्यों पर क़ाबू नहीं रख सकता…
वो अध्यापक कहलाने के लायक़ नहीं है…
ग़ुस्सा तो इस विडियो में भी खूब आया हुआ है…
लेकिन भयंकर ग़ुस्से में भी एक भी अपशब्द नहीं निकला…
और एक भी हाथ नहीं उठा…
बस यही लक्ष्मण रेखा है… शिक्षक और छात्रों के बीच..
राजस्थान की लोकपरंपरा में लोकदेवता ‘मेहोजी मांगलिया’ वीरता, त्याग और गौसेवा की भावना के प्रतीक हैं।
फलोदी के बापिणी में स्थित उनका मंदिर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ग्रामीण समाज में उन्हें लोकदेवता और गौरक्षक के रूप में श्रद्धा से स्मरण किया जाता है। भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को यहां लगने वाला मेला इस लोकआस्था की जीवंत अभिव्यक्ति है।
इसी आस्था और विरासत को संरक्षित करते हुए स्वदेश दर्शन योजना के तहत यहाँ ₹16 करोड़ की लागत से विकास कार्य कराए जाएँगे।
मेरा उद्देश्य है कि मेहोजी मांगलिया की गौरवशाली लोकपरंपरा को और व्यापक पहचान मिले।
जैसलमेर माँ देगराय की कृपा से आलोकित है। भाटी राजवंश की आराध्या और जैसलमेर की रक्षक देवी के रूप में पूजित माँ देगराय के प्रति जैसलमेरवासियों की आस्था शताब्दियों पुरानी है। भाटी राजवंश के संस्थापक से लेकर महारावल जैसल तक, अनेक महान योद्धाओं ने रणभूमि में जाने से पूर्व माँ का आशीर्वाद लिया। आज भी प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु माँ देगराय के दर्शन के लिए यहाँ आते हैं, ऐसे में उनकी सुविधा और आस्था का सम्मान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है।
इसी उद्देश्य से इस पावन पीठ के विकास के लिए स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत 11.84 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इससे मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं का विकास होगा और देश-दुनिया से आने वाले पर्यटकों के लिए भी इस ऐतिहासिक धरोहर को बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया जा सकेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के विजन के अनुरूप हमारा प्रयास है कि आस्था और विरासत से जुड़े ऐसे केंद्रों का विकास हो, जिससे स्थानीय पर्यटन, रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिले। माँ देगराय की यह धरती हमारी आस्था, शौर्य और गौरवशाली विरासत की प्रतीक है।
मेरा प्रयास है कि जैसलमेर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक उसी गरिमा के साथ पहुँचे।
विकास भी, विरासत भी!
जय देगराय माता!