मर्यादा ही धर्म है- यही भगवान श्रीकृष्ण ने सिखाया है!
पहलगाम में आतंकी हमले में शहीद लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी के बारे में सोशल मीडिया पर जैसी बातें लिखी गईं या लिखी जा रही हैं, वो बेहद शर्मनाक हैं। दुख की इस घड़ी में भी मर्यादाओं को लांघा गया।
इस मामले में बिना किसी किंतु-परंतु के विरोध होना चाहिए।
जिसके पास शहीद की विधवा के लिए इतनी घटिया बातें हैं, वो इंसान कहलाने लायक भी नहीं है।
शहीद की विधवा और उनके परिजन अपने देश में गरिमापूर्ण जीवन जिएं- यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
वो देश की बेटी हैं, हमारी बहन हैं। उनके जीवन में जो अपूरणीय क्षति हुई है, उसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता-और अब हमारी जिम्मेदारी है कि उनका सम्मान हर हाल में अक्षुण्ण बना रहे।
आप उनके विचारों से सहमत या असहमत हो सकते हैं,
लेकिन यह कभी न भूलें कि वो अपने जीवन की सबसे बड़ी पीड़ा से गुजर रही हैं-और इस दुख का सम्मान करना ही नहीं, उनके साथ खड़े होना भी हमारा फर्ज है।
अगर विरोध करना है तो देश के दुश्मनों के खिलाफ करिए, लेकिन जिनके घर के चिराग इस देश पर कुर्बान हुए हैं, उनके प्रति सम्मान रखना हमारा धर्म है।
नालन्दा यूनिवर्सिटी को किसने जलाया था?
मैंने UPSC की तैयारी की है तो उस दौरान मेरा ऑप्शनल History था। मैंने उस समय हिस्ट्री की तमाम किताबें पढ़ी, अलग अलग राइटर्स की पढ़ीं मगर
मैंने उनमें कभी नहीं पढ़ा कि
नालंदा को ब्राह्मणों ने जलाया था। अब एक सवाल हम सबको भी अपने आप से करना चाहिए और वह सवाल यह है कि
क्या इतिहास में हुई हरेक चीज़ के लिए ब्राह्मणों को ज़िम्मेदार ठहराना सही है?
हमें आज भी जहां पर लगता है कि किसी बात के लिए सच में ब्राह्मण ज़िम्मेदार थे तब हम उन्हें रेस्पॉन्सिबल मानते हैं मगर
हर बात का ज़िम्मेदार ब्राह्मणों को ठहराना सरासर गलत है।