दिल्ली में पिछले 17 दिनों से सरकार के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत ने समर्थकों की चिंता बढ़ा दी है. हज़ारों लोग उनसे अनशन ख़त्म करने की अपील कर रहे हैं. दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शुरू किया है. सोनम वांगचुक 28 जून को इस प्रदर्शन से जुड़े थे और उसी दिन से भूख हड़ताल पर हैं.
रिपोर्ट: शुभ राणा
आवाज़: मुकुंद झा
एडिट: सदफ़ ख़ान
विश्व विख्यात श्री सोनम वांगचुक जी से फोन पर बात करके उनके स्वास्थ्य के बारे में जाना और उनसे अनशन तोड़ने की अपील की। उनके सत्याग्रह को हमारा खुला समर्थन है।
हमारा मानना है कि वो जनहित में इस आग्रह पर विचार करें। देश की संपूर्ण युवा शक्ति, उनके अभिभावकों, परिवार और परिजनों की आकांक्षा भी यही है क्योंकि उनके नैतिक बल की देश को बहुत आवश्यकता है अतः वो पूरी दुनिया से आ रहे निवेदनों को स्वीकार करते हुए अपना अनशन तोड़े दें, फिर कुछ दिनों का स्वास्थ्य लाभ लें और नई ऊर्जा का संचय करके पुनः नये आंदोलन में जुट जाएं। उनसे सविनय आग्रह है कि वो ‘नकारात्मक, भ्रष्ट, बेईमान, लोकतंत्र विरोधी सांप्रदायिक भाजपा’ के विरुध्द हो रहे आंदोलनों को पूरे देश में विस्तारित कर जन-एकजुटता की अखंड कड़ी बनें।
नीट की परीक्षा के घोटाले के बाद मंदिर में चोरी के महापाप का भंडाफोड़ भी एक गहरा दिव्य-संकेत है। डॉक्टर को धरती पर भगवान के रूप में ही देखा जाता है। हम सब तो मंदिर और मेडिकल दोनों के गहरे संबंध में विश्वास करते हैं। धर्म के मनोबल का और चिकित्सा का मनोवैज्ञानिक संबंध भी होता है।
जिस तरह संपूर्ण विश्व का मीडिया श्री सोनम वांगचुक जी के लिए चिंतित दिखाई दे रहा है, उसका एक दूसरा पक्ष ये भी है कि इससे भाजपा राज में दुनिया भर में हमारे देश की डेमोक्रेटिक इमेज बुरी तरह खंडित हो रही है।
हम श्री सोनम वांगचुक जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं।
@Wangchuk66
सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को 15 दिनों से ज़्यादा हो चुके हैं।
एक नागरिक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात कह रहा है। उसकी सेहत लगातार गिर रही है। उसके साथी भी भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। लेकिन सत्ता की चुप्पी अब सिर्फ़ चुप्पी नहीं, लोकतांत्रिक संवेदनशीलता पर एक बड़ा सवाल बन चुकी है।
यह सिर्फ़ शिक्षा मंत्री की जवाबदेही का सवाल नहीं है। यह पूरी मोदी सरकार की जवाबदेही का सवाल है। जब शिक्षा से लेकर रोज़गार, परीक्षा व्यवस्था, संस्थाओं की निष्पक्षता और शासन की पारदर्शिता तक लगातार सवाल उठ रहे हों, तब सरकार का दायित्व जवाब देना होता है, ख़ामोश रहना नहीं।
लोकतंत्र में जनता सवाल पूछती है और सरकार जवाब देती है। अगर सवाल पूछने वालों को लगातार अनसुना किया जाएगा, विरोध की आवाज़ों को नज़रअंदाज़ किया जाएगा और जवाबदेही की जगह सिर्फ़ सत्ता का अहंकार दिखाई देगा, तो यह किसी भी लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
आज ज़रूरत किसी एक व्यक्ति के साथ खड़े होने की नहीं, बल्कि उस लोकतांत्रिक अधिकार के साथ खड़े होने की है, जो हर नागरिक को अपनी बात कहने का अधिकार देता है।
अगर आज भी जनता अन्याय, जवाबदेही की कमी और लोकतांत्रिक आवाज़ों की अनदेखी पर चुप रही, तो कल सवाल पूछने की जगह भी धीरे-धीरे सिमट सकती है।
सरकारें जनता से बड़ी नहीं होतीं। लोकतंत्र की असली ताक़त जनता है। इसलिए आवाज़ उठाइए, सवाल पूछिए और जवाबदेही माँगिए - क्योंकि लोकतंत्र तभी मज़बूत रहता है, जब नागरिक ख़ामोश नहीं रहते।
लखनऊ में सड़कों पर घिसटने को मजबूर पिछड़े-दलित छात्र...
'हम दलित-पिछड़े समाज से हैं, हमारी कोई सुनने वाला नहीं है'' -
लखनऊ में शिक्षक भर्ती घोटाले से निराश युवा सड़क पर रेंगते हुए अपना हक मांग रहे हैं। ये युवा बीते 4 साल से संघर्ष कर रहे हैं, नौकरी के लिए आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही।
लखनऊ में 69000 शिक्षकभर्ती अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, आरक्षण घोटाले के खिलाफ पिछड़े व दलित वर्ग के अभ्यर्थियों का शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पर प्रदर्शन। आरक्षण घोटाले से नौकरी से वंचित अभ्यर्थियों का प्रदर्शन। @AjayLalluINC
राजभर, मौर्य, पटेल, पाल, यादव और प्रजापति समाज के बच्चे अपने हक के लिए गिड़गिड़ा रहे, कीड़े की तरह रेंग रहे है लेकिन
ओम प्रकाश राजभर चुप है
केशव प्रसाद मौर्य चुप है
अनुप्रिया पटेल चुप है
संजय निषाद चुप है
अगली बार ये नेता आपके घर वोट मांगने जाए तो इनसे जरूर पूछना जब योगी सरकार ने हमारा आरक्षण छीना तो आप लोग चुप क्यों थे ?
हजारों दलित-पिछड़े अभ्यर्थियों का हक़ छीनकर सरकार आखिर किसका भविष्य बना रही है? ये युवा भीख नहीं, संविधान से मिला अधिकार मांग रहे हैं।
#69000_शिक्षक_भर्ती_आरक्षण_घोटाला
Lucknow में 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जुटे और सड़क पर लेटकर विरोध जताया अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन्हें अब तक नियुक्ति नहीं मिली है और कोर्ट में भी उनकी ओर से प्रभावी पैरवी नहीं की गई। प्रदर्शन के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
#newstrack #69000TeacherRecruitment #Lucknow #TeacherProtest #UPNews #BreakingNews #HindiNews #LatestNews
सालों से लंबित पड़े 69000 शिक्षक भर्ती मामले में अभ्यर्थी नियुक्ति की माँग को लेकर शिक्षा मंत्री के घर के सामने रेंगते हुए प्रोटेस्ट कर रहें हैं
सरकार को थोड़ी सी भी शर्म आती होगी?
लखनऊ की सड़को पर फिर युवा चीख रहा है !
69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी अपने हक के लिए शिक्षा मंत्री के आवास तक पहुंच गए !
लेकिन सत्ता में बैठे लोगो को शायद युवाओ की आवाज सुनाई ही नहीं देती !
युवा पूछ रहा है , क्या इसी अच्छे दिनों के लिए दिन रात पढ़ाई की थी ?
69000 शिक्षक भर्ती अभ्यार्थीयो की आवाज दबेगी नहीं ,
हर अन्याय का जवाब जनता 2027 में देगी !
#लखनऊ
♦69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का प्रदर्शन
♦बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास पर जुटे अभ्यर्थी
♦आवास के सामने लेट कर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन
♦अभ्यर्थियों को अभी तक नहीं मिली नियुक्ति
♦कोर्ट में भी प्रभावी पैरवी न करने का आरोप
#Lucknow#69000ShikshakBharti #TeacherRecruitment @myogiadityanath@lkopolice
"हम दलित-पिछड़े समाज से हैं, हमारी कोई सुनने वाला नहीं है''
- लखनऊ में शिक्षक भर्ती घोटाले से निराश युवा सड़क पर रेंगते हुए अपना हक मांग रहे हैं
दरअसल यूपी की BJP सरकार ने 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण का घोटाला किया, जिसने दलित-पिछड़े वर्ग के युवाओं के सपनों को रौंद दिया है।
यूपी की 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण विवाद आज भी हजारों पिछड़े और दलित अभ्यर्थियों की जिंदगी पर असर डाल रहा है।
जो युवा सालों पहले शिक्षक बन सकते थे, वे आज भी सड़क पर अपने हक की मांग कर रहे हैं। भीषण गर्मी में शिक्षा मंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे इन अभ्यर्थियों का सवाल सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि न्याय और बराबरी का भी है।
जब कोर्ट ने भी आरक्षण गड़बड़ी मानी, तो आखिर समाधान में इतनी देरी क्यों..?
69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का अनोखा प्रदर्शन...
लेटकर और रेंगते हुए शिक्षा मंत्री के आवास पहुंचे अभ्यर्थी, सरकार से सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी की मांग।
लखनऊ में फिर गरमाया 69000 शिक्षक भर्ती मामला।
#69000शिक्षकभर्ती#Lucknow#ShikshakBharti#AnamikaPal#MetroMonday