Students on streets for exams without cheating. The Education Minister resigned.
Now on protests to allow cheating. The IIT professors should resign.
What about parents and students?
What about spineless system that has allowed for an education environment where no child left behind means to push them up without even failing. Give marks for blank sheets.
Pass even if they don't know. Pitch slow ones with fast ones.
And then blame those who are on recieving end.
Dear @narendramodi Ji
May I request you to declare all General Caste citizens of your country Persona Non Grata and throw us in burning pyres or simply use firing squad to kill all of us.
With Regards
An Oppressor Brahmim
IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोड़े परीक्षा में मोबाइल लेकर पकड़े गए। IIT के मुताबिक प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड कर जवाब लेने की कोशिश की गई.
ड्यूटी पर मौजूद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला ने पकड़ लिया। IIT का दावा है कि न सस्पेंड किया, न कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की—काउंसलिंग करके वापस भेज दिया.
फिर साहिल की मौत हो गई। परिवार ने जातिगत उत्पीड़न के आरोप लगाए और अब प्रोफेसर पर SC/ST Act और आत्महत्या के लिए उकसाने की FIR दर्ज है। IIT ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है.
अब जरा इस व्यवस्था पर सवाल पूछिए...
परीक्षा में नकल रोकना अपराध है या जाति देखकर नकल रोकनी चाहिए?
क्या IIT में परीक्षा के नियम भी अब जाति देखकर लागू होंगे ?
मोबाइल लेकर परीक्षा में बैठना—नियमों का उल्लंघन
AI पर प्रश्नपत्र डालकर जवाब लेना—गंभीर सवाल
प्रोफेसर का पकड़ना—उसका काम
लेकिन छात्र की मौत के बाद अगर हर सवाल का जवाब SC/ST Act में खोजा जाएगा, तो कल शायद परीक्षा में नकल पकड़ने से पहले invigilator को यह पूछना पड़े “पहले जाति बता दीजिए, फिर नकल रोकूं”
जातिगत भेदभाव के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन जांच से पहले किसी को दोषी घोषित करना भी न्याय नहीं है।
नकल रोकने वाला शिक्षक अपराधी और नकल करने वाला पीड़ित—क्या यही नया अकादमिक मॉडल है?
#IITBombay #SahilWakode #SCSTAct #ChatGPT
@iitbombay@iitalumni
साहिल वकोड़े IIT बॉम्बे के छात्र थे। परीक्षा चल रही थी। पूरा प्रश्नपत्र AI एप्प को अपलोड कर के उत्तर कॉपी में लिख रहे थे। प्रोफेसर ने पकड़ लिया। बाहर ले गए, डाँटा और कहा कि संस्थान के नियम स्पष्ट हैं आप चोरी करते पकड़े गए तो सस्पेंड किए जा सकते हो।
साहिल ने बाद में आत्महत्या कर ली। माँ-बाप ने पोस्टमार्टम के बाद भी शव नहीं लिया क्योंकि उन्हें न्याय चाहिए। न्याय पाने के लिए उन्होंने मोदी एक्ट की धाराएँ लगवा दीं प्रोफेसर पर।
एक लड़का आरक्षण से IIT पहुँचा। कम नंबर न आए, इसलिए चोरी कर रहा था। वह टॉपर बनना चाह रहा था। पर एक मनुवादी शिक्षक ने उसे कॉलेज के कानून बताए, सस्पेंड किया भी नहीं। उसने आत्महत्या कर ली।
क्या एक दलित को फोन ले जाने अनुमति नहीं होनी चाहिए? क्या ऐतिहासिक प्रताड़ना के कारण उसको ओपन मोबाइल परीक्षा देने की अनुमति नहीं होनी चाहिए?
आज एक ब्राइट स्टूडेंट, जो जेट इंजन बना सकता था AI से पूछ कर, हमारे बीच इसलिए नहीं रहा क्योंकि उससे पहले ही चरण में रोक लिया गया। मोदी एक्ट इसीलिए बना ही है।
प्रोफेसर को फाँसी होनी चाहिए।
भारत के हजारों परिवार आपके ‘मोदी एक्ट’ के कारण टॉर्चर हो रहे हैं। उस पर तो आपकी कैं भी सुनने को नहीं मिलती, यहाँ लेख लिखे जा रहे हैं।
भारत के सवर्ण आपके और आपके मोदी के परिवार में नहीं।
‼️खुशखबरी‼️
उत्तरप्रदेश के 4 SCP मेडिकल कॉलेजों का पहला Counselling round, जो 91% आरक्षण के हिसाब से हुआ था, उसको कैंसिल कर दिया गया है!
अब 50% आरक्षण के हिसाब से ही Counselling होगा!
भाजपा ने जो नग्नता की है एक व्यक्ति के जन्मदिन पर, उस पर दो केस होने चाहिए:
१. हिन्दू प्रतीकों, आस्था और पर्व को नीचा दिखाने का कि इन्होंने कलश, दीपक, आरती और दीवाली को एक जातिवादी नेता के छवि प्रबंधन के लिए प्रयोग किया
२. पार्टी के नेता के जन्मदिन पर करदाताओं के धन के निरर्थक व्यय का
ये चिरकुट कार्यकर्ता और पार्टी का चटुआ सेल किस बात पर कल को नेहरू और राजीव गाँधी को घेरेगा कि ये युद्धपोत पर पिकनिक मनाते थे?
तुमने भगवान राम की दीपावली पर बने दीपों के रिकॉर्ड को टच करने का सोचा भी कैसे? तुमने दीपावली मनाने का ही कैसे सोच लिया? तुम्हारी औकात है भगवान राम के समक्ष खड़े होने की भी, इस चंदा-चोरी के बाद? तुम पापी लोग भगवान की बराबरी करोगे?
तुम स्वयं को भगवान से ऊपर समझने लगे? हस्ती क्या है तुम्हारी? तुम्हारे वश में सरकारी सर्कुलर भेजना ही अब बचा है क्योंकि लोग भय से, कि सैलरी न कट जाए, नौकरी न चली जाए, दीप जलाएँगे।
और हाँ पापियो! बिहार के बाढ़ की विभीषिका के मध्य तुमने यह नंगई की है और जम्मू-कश्मीर की बाढ़ पर तुमने ज्ञान दिया था सहयोग का। नरेन्द्र मोदी के हैंडल से नेपाल की बाढ़ पर पोस्ट है, पर बिहार पर अभी तक नहीं।
दीपक जला और हमारी जेब भी कि हम जो पैसा सड़क-हॉस्पिटल-स्कूल बनाने के लिए देते हैं, वह एक व्यक्ति के ईगो मसाज के लिए लुटाया जा रहा है ताकि रिकॉर्ड बन सके, फोटो और रील कट सके, इनके नाम के गीत गाए जाएँ।
लज्जा कर लो, यदि बची है तो! और चटुआ सेल, ज्ञान मत देना, तुम्हारा बाप हूँ मैं ज्ञान देने में।
एक दिए की कीमत तेल और कपास की बत्ती मिलाकर 10 रुपये भी हो, तो 58 लाख दिए की कीमत करीब 5.8 करोड़ रुपये होगी। जब सरकार इसे खरीदेगी, तो खर्च 10 करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है। इसमें तेल रखने, दिए जलाने के लिए मजदूरी, सजावट, सामान लाने-ले जाने का खर्च, सब कुछ शामिल होगा।
एक राज्य के एक स्थान, शिप्रा नदी के तट पर इतना खर्च कैसे सही ठहराया जाएगा, भाई? कैसे जस्टिफाई करोगे?
‼️जरूरी सूचना‼️
हम राजस्थान के 64% आरक्षण को हाइकोर्ट में चैलेंज कर रहे हैं!
इसके लिए हमको कुछ petitioners चाहिए!
राजस्थान से सामान्य वर्ग के ऐसे लोग जिन्होंने राजस्थान में किसी vacancy के लिए एग्जाम दिया हो, और रिजल्ट अभी आए हों या आने वाले हों!
कृपया ऐसे लोग रिप्लाई करें🙏
उत्तरप्रदेश की हुकम सिंह कमिटी रिपोर्ट 2001
यादव जनसंख्या: 19.4%
यादव सरकारी नौकरी: 33%
कुर्मी जनसंख्या: 7.5%
कुर्मी सरकारी नौकरी: 12.5%
जाट जनसंख्या: 3.6%
जाट सरकारी नौकरी: 6.9%
गुर्जर जनसंख्या: 1.7%
गुर्जर सरकारी नौकरी: 2.1%
जाटव जनसंख्या: 55.7%
जाटव सरकारी नौकरी: 56.7%
मतलब ये सारी जातियाँ आज से 25 साल पहले ही आबादी से ज़्यादा प्रतिनिधित्व पा चुकीं थीं!
फिर इनको आज भी आरक्षण क्यों मिल रहा है?
इनको अब आर्टिकल 16-4 के अनुसार आरक्षण मिल ही नहीं सकता! फिर भी सामाजिक न्याय की धज्जियां उड़ाकर इनको आरक्षण आज भी दिया जा रहा है!
वंचित जातियों तक आरक्षण नहीं पहुंच पाने का यही कारण है कि कुछ जातियों को आबादी से अधिक आरक्षण मिल रहा है!
तो वंचित जातियों का असल दुश्मन सवर्ण नहीं, वो हैं जो दबंग होने के बाद भी आरक्षण छोड़ नहीं रहे!
Imagine the audacity… didn’t fight a single battle against invaders.
A cult whose Gurus were protected by Rajputs, from Hargovind to Teg Bahadur. Guru & their wives sought refuge with Kachawaha Rajas, Mirza Jai Singh, Ram Singh & Sawai Jai Singh.
But some Chauvinist pig…
अब यादव समाज भी खुलकर SC/ST एक्ट के खिलाफ मैदान में आ चुका है!
पटना में हुई यादव समाज की बैठक में SC/ST एक्ट के खिलाफ आवाज़ उठाई गई और GC/OBC एक्ट की मांग की गई!
बदलाव की शुरुआत हो चुकी है!
सर आप भी आईटी सेल द्वारा चलाए गए प्रोपगेंडा का शिकार हो रहे हो लेकिन मुझे उनके प्रोपगेंडा का खंडन करने में बड़ा मजा आता है।
1.पहली भ्रामक खबर - UGC ACT लागू ही नहीं हुआ उसको रोलबैक कैसे कर सकते है ।
उत्तर -
यूजीसी ने इन नियमों को 13 जनवरी 2026 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित कर दिया था। किसी भी विनियामक संस्था के नियम गजट में प्रकाशित होते ही कानूनी तौर पर प्रभावी हो जाते है, कोर्ट ने 29 जनवरी को रोक लगाई थी। इसका अर्थ यह है कि यह कानून 13 जनवरी से 29 जनवरी तक प्रभावी था।
2.दूसरी भ्रामक खबर - UGC एक 'स्वतंत्र' निकाय है, इस पर सरकार का हस्तक्षेप नहीं होता!
उत्तर -
UGC शिक्षा मंत्रालय (केंद्र सरकार) के अधीन काम करने वाली संस्था है। UGC Act की धारा 20 के तहत केंद्र सरकार के नीतिगत निर्देश इस पर पूरी तरह बाध्यकारी होते हैं।जब रेगुलेशन लाने वाली संस्था ही सरकार के अधीन है, तो सरकार द्वारा उसका विरोध न करना यह साफ साबित करता है कि इस फैसले को सरकार का पूरा समर्थन और सहमति हासिल थी!
3. भ्रामक खबर - कोर्ट ने UGC act पर रोक लगाई है तो इसका अब विरोध करना औचित्यहीन है।
उत्तर -
कोर्ट का लगाया स्टे फैसला नहीं, केवल अंतरिम रोक है, कोर्ट द्वारा स्टे लगाया जाना किसी रेगुलेशन का रद्द होना नहीं होता। कोर्ट द्वारा लगाया गया स्टे केवल अंतरिम रोक होती है, कानून का स्थायी खात्मा नहीं।
4. भ्रामक खबर - मामला कोर्ट में है अब सरकार कोर्ट का निर्णय आने से पहले कुछ नहीं कर सकती?
उत्तर -
अदालत में मामला विचाराधीन होने से कार्यपालिका या संबंधित विनियामक संस्था का नियम वापस लेने का अधिकार समाप्त नहीं होता। सरकार या UGC कोर्ट का अंतिम फैसला आने से पहले भी इस रेगुलेशन को कभी भी वापस या संशोधित कर सकती है।
सर आपके और तर्क भी आमंत्रित है।
#UGCRollBack
#UGC_Rollback
#UGC_काला_कानून_वापस_लो
#StopMisuseOfSCSTAct
#ReservationReform