पूर्वांचल की क्रांतिकारी भूमि और बिजली का निजीकरण नामंजूर है।
पूर्वांचल कि धरती जिसे क्रांति और संघर्ष की भूमि कहा जाता है आज एक बड़े संकट का सामना कर रहा है। उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग (UPPCL) का निजीकरण सबसे पहले पूर्वांचल से शुरू करने की योजना अन्यायपूर्ण और अनुचित है। यह निर्णय न केवल पूर्वांचल की जनता बल्कि किसानों, सरकारी कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के भविष्य को अंधकारमय बना देगा। बिजली कर्मी जो दिन रात जनता की सेवा में तत्पर रहते हैं निजीकरण के कारण अपनी नौकरियां और अधिकार खो सकते हैं।
निजीकरण होने से किसानों पर बिजली की लागत बढ़ने से सबसे अधिक आर्थिक नुकसान होगा।निजी कंपनियां लाभ कमाने के उद्देश्य से बिजली की दरें बढ़ा सकती हैं जिससे आम जनता पर आर्थिक भार बढ़ेगा।
सरकारी कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा और उनके अधिकार खतरे में आ जाएंगे। आदरणीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि जनता और कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए विद्युत निजीकरण पर तत्काल रोक लगाई जाए।
#StopElectricityPrivatization
#StopPrivatizationOfUPPCL
#जनता_की_बिजली_जनता_के_लिए
माननीय प्रधानमंत्री जी दिल्ली जीत का श्रेय पूर्वांचल को दे रहे हैं-
किंतु भाजपा के कुछ माननीय पूर्वांचल विद्युत निगम निजीकरण पर आतुर हैं।
निजीकरण बाद जनता पुनः यही प्यार भाजपा को आगामी 2027 चुनाव में देगी ?
विचार आवश्यक
@narendramodi@myogiadityanath@aksharmaBharat@BJP4India
पूर्वांचल की भूमि क्रांतिकारी भूमि है मा. प्रधानमंत्री@narendramodi जी व मा. मुख्यमंत्री@myogiadityanath जी पूर्वांचल भूमि से प्रतिनिधित्व करते हैं।
पूर्वांचल के बिजली कर्मी संघर्ष के मैदान में लड़ते हुए वीरगति स्वीकार्य कर सकते हैं किन्तु घर का निजीकरण कदापि स्वीकार नहीं करेंगे
@AMITCHOUDHARYZ Andha bate Rewari Apne Apne ko de, yahi hisab hai aaj ka rajniti ka log apni pension rakhte hain aur karmchari ki band kar di.. hame bhi ops chahiye