1.आज से जब संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, सदन से लेकर सड़कों व दिल्ली के जन्तर-मन्तर तक में विभिन्न ज्वलन्त मुद्दों को लेकर ज़बरदस्त टकराव की स्थिति है, जिसे देश के विकट राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक हालात के मद्देनज़र ज़रूर बेहतर सूझबूझ से टाला जाना चाहिये।
2.वैसे भी सर्वसमाज के करोड़ों परिवारों के लिये जीवनदायी मेडिकल आदि की अति-महत्वपूर्ण व विशेष आल-इण्डिया परीक्षायें सहित राज्यों में नौकरी सम्बंधी परीक्षायें आदि भी लगातार हो रहे पेपरलीक/गड़बड़ी आदि के कारण रद्द होने की अनिश्चितता से ख़ासकर युवा वर्ग व बेरोज़गार लोग लगातार काफी ज़्यादा परेशान हैं, जो विभिन्न जगहों पर अनेकों प्रकार से व्यक्त किये जा रहे उनके आक्रोश व आन्दोलन आदि से भी प्रकट है और यह देश व जनहित से जुड़ा ऐसा अति-गंभीर मामला है जिसपर पूरी तरह से क़ाबू में करने के लिये सरकारों को तत्काल सख़्त क़दम उठाना नितान्त आवश्यक है।
3.साथ ही, इसके लिये ज़िम्मेदारी भी ज़रूर तय होनी चाहिये तथा ख़ासकर परीक्षा व्यवस्थाओं से जुड़े उच्च पदों पर बैठे लोगों के विरुद्ध भी कड़ी क़ानूनी सज़ा हो ताकि देश की तरक्की की नींव युवा पीढ़ी का भविष्य इस प्रकार की अनिश्चितता और अंधकार से आगे बच पाये।
4.इसी क्रम में यूपी, राजस्थान, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों/शहरों में जिस प्रकार से, अच्छे सरकारी स्कूलों व सरकारी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई के घोर अभाव में, प्राइवेट स्कूल एवं बड़ी-छोटी कोचिंग संस्थायें, तेज़ी से पनप रही हैं, उससे यह स्पष्ट है कि देश का युवा वर्ग व उनका परिवार, ज़बरदस्त महंगाई के इस दौर में भी अपना पेट काटकर एवं अन्य परेशानियों को झेलकर भी, अपने स्तर से पूरा जी-जान लगाकर आगे बढ़ने हेतु प्रतिबद्ध है।
5.वे लोग आउटसोर्सिंंग की शोषणकारी छोटी-मोटी नौकरी आदि से आगे बढ़कर स्थाई व स्वाभिमानी नौकरी में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं ताकि इज्ज़त से दो वक्त की रोटी कमाकर अपना व अपने परिवार का पेट पाल सकें, जो सराहनीय है।
6.ऐसे में सरकारें कोचिंग संस्थाओं आदि पर भय भ्रष्टाचार-मुक्त कड़ी निगरानी ज़रूर रखें, किन्तु प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा स्तर पर सम्पूर्ण सरकारी शिक्षा व्यवस्था को हर स्तर पर बेहतर बनाने के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को आगे बढ़ाने में भी अपना अहम् दायित्व निभाने का ईमानदार प्रयास ज़रूर करें।
7.वैसे भी यह सर्वविदित है कि देश व समाज को शिक्षित बनाना अनवरत प्रक्रिया है और जिसमें सरकारों द्वारा समुचित बजट प्रावधान के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता को भी अच्छे से अच्छा बनाने जैसी सही सोच रखना भी बहुत ज़रूरी है, तभी युवाओं के उज्जवल भविष्य के सहारे परिवार, समाज, प्रदेश व देश का भविष्य संवर पायेगा, वरना जीडीपी ग्रोथ देश की नैया का सही खिवैया क्या बना पायेगा, इसमें शक है।
8.इसीलिये यूपी व देश में भी विकास का मूल आधार संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के उद्देश्यों के अनुसार शिक्षित, सुरक्षित, कल्याणकारी व सभ्य भारत हो तो यह हमेशा ही बेहतर होगा।
9.और अगर इन बातों पर तत्काल ज़रूरी ध्यान दिया जाये तो जन्तर-मन्तर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के हो रहे आन्दोलन जैसी कार्रवाईयों के लिये लोगों में भी ख़ासकर युवा पीढ़ी को बाध्य नहीं होना पड़ेगा। सरकार इनके प्रति सहानुभूति का रवैया अपनाकर स्थिति का सही समाधान करें तो यह उचित होगा।
1.अब जबकि संसद का मानसून सत्र कल दिनांक 20 जुलाई से शुरू हो रहा है, एक बार फिर यह देश व आमजन की चिन्ता है कि क्या इस बार भी फिर से संसद का सत्र हंगामा व स्थगन आदि की भेंट चढ़ जायेगा, या फिर ज़बरदस्त महंगाई, ग़रीबी, बेरोज़गारी, महिला असुरक्षा, महत्वपूर्ण परीक्षाओं के भी पेपरलीक आदि से जुड़े देश के ज्वलन्त मुद्दों से उत्पन्न उत्तेजित, आक्रोशित व आन्दोलित माहौल को शान्त करने व इनके संतोषजनक समाधान हेतु गंभीरता दिखाई जायेगी।
2.वैसे ख़ासकर अयोध्या श्रीराम मन्दिर में चढ़ावा की चोरी, हेराफेरी व ग़बन आदि को लेकर व्यापक जन आक्रोश ने भी यूपी व देश को काफी झकझोर कर रख दिया है और लोग, धर्म का चुनावी स्वार्थ हेतु राजनीतिकरण करने वालों को इसके लिये कठघरे में खड़ा करके, उनसे दिल दुखाने की जवाबदेही माँग रहे हैं, जिसकी गूंज सड़कों से लेकर अदालत तक में है और संसद में भी यह मुद्दा ज़रूर गर्म होगा, जिसपर भी लोगों की पैनी नज़र है।
3.इतना ही नहीं बल्कि बंगाल में विधानसभा आमचुनाव के बाद के हालात्, राजस्थान में सरकार की लापरवाही के कारण गर्भवति महिलाओं की मौत सहित विभिन्न राज्यों में बढ़ती महिला असुरक्षा, काफी आपाधापी में की जाने वाली चुनावी रेवड़ियों में भारी गड़बड़ी, सरकारी योजनाओं आदि में चर्चित भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ का प्रचलन, वर्षों से बसे-बसाये लोगों को उजाड़कर उनके कालोनियों का ध्वस्तीकरण आदि जैसे सरकारी रवैयों से चरमराई संविधान की जनकल्याणकारी व्यवस्था के साथ ही,
https://t.co/zbwuw6xrFA की अर्थव्यवस्था व यहाँ के जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित करती हुई अमेरिका-इज़राइल का ईरान के विरुद्ध लगातार युद्ध व रुपया का अवमूल्यण आदि देश व जनहित के ऐसे ख़ास मुद्दे हैं जिनपर राजनीतिक द्वेष, स्वार्थ व आरोप-प्रत्यारोप की संकीर्णता/वैमनस्य को त्यागकर सत्ता और विपक्ष दोनों को एकजुट होकर अच्छा उपाय ढूंढ कर सराहनीय कार्य करना होगा, वरना लगभग 140 करोड़ की जनसंख्या वाले अपने देश में बहुजनों का जीवन यहाँ और भी अधिक बुरे दिन वाला बनकर उनका भविष्य अधर में लटकायेगा, जिसकी आशंका भी व्यक्त की जा रही है।
5.अतः देश को त्रस्त करने वाली इन भारी चुनौतियों व उसके प्रति चेतावनियों को ध्यान में रखकर संसद के मानसून सत्र को, बिना किसी उत्तेजना, रोष व विद्वेष के, सुचारू, शान्तिपूर्ण एवं स्वस्थ्य लोकतांत्रिक परम्परा के मुताबिक चलना सुनिश्चित किया जाना चाहिये, जो वक्त की अहम् ज़रूरत के हिसाब से सभी की ज़िम्मेदारी भी बनती है।
6.साथ ही, इस सम्बंध में सभी संस्थाओं को ऐसा प्रयास ज़रूर करना चाहिये कि देश के कठिन सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हालात से त्रस्त भारतीयों के जीवन का बोझ व नित्य दिन की उनकी परेशानी/दिक्कतें और अधिक नहीं बढ़ने पायें।
7.इसी क्रम में संसद को भी इन ज्वलन्त राष्ट्रीय मुद्दों पर पूरी तरह से गंभीर व संवेदनशील होना ज़रूरी है और इसकी शुरूआत अगर संसद के वर्तमान मानसून सत्र से ही हो तो यह अवश्य ही बेहतर होगा। जनहितैषी गुड गवरनेन्स हेतु संसद का प्रभावी होना ज़रूरी। जय भीम, जय भारत।
अयोध्या में श्रीराम मन्दिर से चढ़ावे की हुई चोरी, ग़बन व हेराफेरी आदि करने की मीडिया में आएदिन क़िस्म-क़िस्म की आ रही ख़बरें अति-गम्भीर व चिन्तनीय। ऐसे लोग क़तई भी बख़्शे नहीं जाने चाहिये, लेकिन इस मामले का राजनीतिकरण करना भी ठीक नहीं।
साथ ही, अब यहाँ मन्दिर में श्रद्धा के चढ़ावे आदि में आगे कोई भी शिकायत ना आये, इसके लिए देश के दूसरे विख्यात व प्रसिद्ध मन्दिरों में चढ़ावे आदि के हिसाब-किताब के लिए जो वहाँ व्यवस्था है तो उनका यहाँ अयोध्या में भी अनुशरण करके इस प्रकरण को जल्दी ही सुलझाना चाहिये तो यह उचित होगा।
इतना ही नहीं बल्कि देश में राजनीति का अपराधीकरण व अपराध का राजनीतिकरण तथा धर्म का राजनीतिकरण एवं राजनीति का अंध धर्मीकरण ना किया जाये तो यह सही व संवैधानिक होगा, ऐसी बी.एस.पी. की राजनीतिक पार्टियों को देश व जनहित में सलाह और साथ ही देशवासियों से भी यह अपील।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में सपा सांसद श्री अखिलेश यादव जी को आज उनके जन्मदिन पर उन्हें व उनके परिवार वालों को हार्दिक बधाई एवं उनके अच्छे जीवन व लम्बी उम्र की शुभकामनायें।
1. यू.पी. के अयोध्या में श्री राम मन्दिर के बाद अब उत्तराखण्ड स्टेट में भी बद्रीनाथ धाम चढ़ावा में चोरी व ग़बन आदि होने का मामला काफी सुर्ख़ियों में हैं। इन दोनों विख्यात धार्मिक स्थलों में इनके ट्रस्ट से जुड़े मुख्य प्रबन्धकों की भी सही से जाँच होनी चाहिये वरना फिर आगे चलकर इनकी आड़ में इनके स्थान पर दूसरे बने मुख्य प्रबन्धक भी इसका दुरुपयोग कर सकते हैं। क्योंकि ऐसी आम चर्चा है कि निचले स्तर पर जो भी गड़बड़ी हुई है तो उसके लिए या तो मुख्य प्रबन्धकों की मिलीभगत है या फिर उनकी लापरवाही की वजह से यह सब कुछ हुआ है। अतः इस प्रकरण की अब सही से जाँच होनी बहुत ज़रूरी है तथा इस मामले में सरकार व एस.आई.टी. को भी विशेष ध्यान देना है।
2. साथ ही सपा, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी आदि के जिन वरिष्ठ नेताओं द्वारा यहाँ (श्री राम मन्दिर) चढ़ावे में काफी मोटी रकम की चोरी व ग़बन आदि होने की बात कही जा रही है तो उनसे भी इसके पुख़्ता सबूत लेने चाहिये, ताकि कोई भी चोरी व ग़बनकर्ता बच ना सके, वरना इसकी आड़ में इसे कोरी राजनीति ही माना जायेगा अर्थात् श्रद्धा नहीं, जो जनहित के मुद्दों को दरकिनार करके, अब इस मुद्दे की आड़ में ये पार्टियाँ चुनाव में जाना चाहती हैं, ऐसी भी आम चर्चा है।
दिनांक 11.07.2026 : जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी), दूसरी पार्टियों की तरह अपना राजनीतिक व चुनावी स्वार्थ साधने के लिये धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, हल्लाबोल, सरकारी व प्राइवेट सम्पत्तियों के तोड़फोड़ व दूसरी हिसंक घटनाओं तथा हवाहवाई वादों-दावों एवं मिथ्या प्रचार-प्रसार आदि के माध्यम से जनता को गुमराह करने आदि में विश्वास नहीं करती है।
अर्थात् बी.एस.पी. ऐसी तमाम राजनीतिक व चुनावी चालबाज़ियों से पूरी तरह से पाक-साफ देश की एकमात्र ऐसी अम्बेडकरवादी पार्टी है जो ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त व नीति पर चलकर यहाँ सर्वसमाज में भी ख़ासकर ग़रीबों, मज़दूरों, शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों के हित व कल्याण हेतु समर्पित है, और जिसका जीता-जागता प्रमाण यहाँ उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी. के नेतृत्व में चार बार रही सरकार में व्यापक जनहित, जनकल्याण व विकास का तथा अपराध-नियंत्रण व क़ानून-व्यवस्था के मामलों में ’क़ानून द्वारा क़ानून का बेहतरीन राज’ रहा है।
इससे यहाँ यूपी जैसे विशाल राज्य में एक आदर्श संवैधानिक सरकार देने के साथ-साथ यह भी सूरज की रौशनी की तरह पूरी तरह से स्पष्ट है कि बी.एस.पी., विरोधी पार्टियों व उनके इशारे पर चलने वाले दलित संगठनों व पार्टियोें आदि की तरह छल व छलावा की राजनीति तथा उनके लिये मगरमच्छ के आँसू नहीं बहाती और ना ही संकीर्ण स्वार्थ हेतु गिरगिट की ही तरह रंग बदलती है, बल्कि करोड़ों दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ अपरकास्ट समाज के ग़रीबों के वास्तविक हित व कल्याण के लिये ’बहुजन समाज’ में समय-समय पर जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों में भी ख़ासकर महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायणा गुरु, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व बहुजन नायक मान्यवर श्री कांशीराम जी के बताये रास्तों पर चलकर मुख्यतः सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक उत्थान’ का महान लक्ष्य हासिल करना चाहती है।
और अब यहाँ ख़ासकर उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी आमचुनाव में बी.एस.पी के प्रभाव को तेज़ी से आगे बढ़ता हुआ देखकर विरोधी पार्टियाँ में द्वेष व बेचैनी स्वाभाविक है और इसीलिये वे अपने साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों के तहत् कुछ दलित संगठनों व पार्टियों आदि को आगे करके दलित व बहुजन समाज के अन्य विभिन्न अंगों को तरह-तरह से भटकाने व गुमराह करने में लगे हुये हैं,
जबकि शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों को अच्छी तरह से मालूम है कि ’मा. बहन कुमारी मायावती जी’ के नेतृत्व वाली सरकार ही उनकी सभी राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक समस्याओं का उसी प्रकार से बेहतरीन निदान है जैसाकि उनकी सभी सरकारों में होता रहा है जब सत्ता की शक्ति, संसाधन व ऊर्जा तथा सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल भी हर स्तर पर सबके साथ न्याय एवं सबको न्याय दिलाने के लिये समर्पित व तत्पर रहा।
साथ ही, चुनाव नज़दीक आता देख विरोधी पार्टियाँ अपने हथकण्डों आदि के साथ-साथ दलित संगठनों व गुलाम मानसिकता रखने वाले लोगों के कंधे पर बंदूक रखकर बी.एस.पी. व बाबा साहेब के मूवमेन्ट-विरोधी राजनीतिक स्वार्थ का अपना खेल आगे बढ़ाना चाहती हैं, जिससे सर्वसमाज के लोगों को व विशेषकर दलित एवं ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों को बहुत ही ज़्यादा सचेत व सतर्क रहने की ज़रूरत है ताकि विरोधियों केे नापाक इरादे सफल ना हों सकें।
इसको लेकर बी.एस.पी. की असली चिन्ता यही है कि सर्वसमाज के ग़रीब, मज़दूर व बेरोज़गार नौजवान आदि के साथ-साथ समाज के शोषित-पीड़ित व अन्य उपेक्षित लोग, अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने के क्रम में सरकारी द्वेष, उत्पीड़न व आतंक आदि का शिकार ना बनने पायें,
क्योंकि नौजवान अगर सरकारी ज्यादती के कारण यदि मुकदमा व जेल आदि में उलझ जायेंगे तो इससे उनका भविष्य ख़तरे में पड़ जाने की आशंका है तथा अगर परिवार का मुखिया इन चक्कर में पड़ जायेगा तो उनका घरबार तबाह हो जायेगा और उनके पूरे परिवार के इस प्रकार से अंधकार में डूब जाने का खतरा है, जो बी.एस.पी. कतई भी नहीं चाहती है, क्योंकि बी.एस.पी. का अम्बेडकरवादी मिशन प्रभावित हो सकता है जो कि विरोधियों की असल चाल है।
इसके साथ ही, सर्वविदित है कि दलित-विरोधी सहारनपुर काण्ड में जातिवादी, सामंती व सरकारी आतंक के विरुद्ध बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व ने सड़क से लेकर संसद तक में जबरदस्त लड़ाई लड़ी, किन्तु संसद में भी इसका सही से निदान नहीं मिलने के विरोध में तब बी.एस.पी. नेतृत्व ने, दलितों व अन्य पिछड़ों आदि के हक की अनदेखी करने पर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देने का अनुसरण करते हुये, राज्यसभा से ही इस्तीफा दे दिया था कि जब संसद में भी हमारी बात नहीं सुनी जाती है तो ऐसी संसद में रहने का फायदा ही क्या?
इस प्रकार यह उन जबरदस्त उदाहरणों में एक है जो बी.एस.पी. नेतृत्व ने अपने संघर्ष के क्रम में दिया है अर्थात् स्पष्ट है कि बी.एस.पी. को अपनी तरह ही मगरमच्छ के आँसू बहाने की सलाह देेने वाले संकीर्ण स्वार्थी लोग विरोधी पार्टियों के जातिवादी व विशैले षडयंत्र का शिकार ना बनें तो यह बेहतर होगा।
वैसे भी सभी जानते हैं कि मान्यवर श्री कांशीराम जी ने बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) का गठन देश में जाति के आधार पर सदियों से सताये, तोड़े व पछाड़े गये उन लोगों को ’बहुजन समाज’ को आपसी भाईचारा के आधार पर एकता में जोड़कर राजनीतिक शक्ति अर्थात् ’’हुकमरान जमात’’ बनाने के लिये इसलिये किया था ताकि इन वर्गों के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से आत्म-सम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट को मंज़िल तक पहुँचाया जा सके, और यह क्रम लगातार जारी है, जिसकी राह में रोड़ा बनकर खड़ा होना बी.एस.पी के मिशन 2027 को प्रभावित करने का घोर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर-विरोधी अनुचित कृत्य होगा। जय भीम, जय भारत।
आज छत्रपति राजर्षि शाहू जी महाराज की जयंती है, एक ऐसे महापुरुष को याद करने का दिन, जिन्होंने अपने समय से बहुत आगे की सोच रखी।
1902 में, जब देश का बड़ा हिस्सा जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता से जूझ रहा था, तब शाहू जी महाराज ने पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू कर यह साबित किया कि सत्ता का असली उद्देश्य समाज के आख़िरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी न्याय दिलाना होता है, न कि केवल कुछ लोगों के हितों की रक्षा करना।
मैं मानता हूँ कि हर पीढ़ी को बराबरी की लड़ाई अपने तरीक़े से लड़नी होती है। शाहू जी महाराज ने अपनी पीढ़ी की लड़ाई पूरी ईमानदारी से लड़ी। आज जब संविधान, आरक्षण और समान अवसर जैसे सवालों पर बहसें फिर से तेज़ हैं तो उनका जीवन हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र की ताक़त उसके सबसे ऊँचे पदों से नहीं, उसके सबसे आख़िरी नागरिक के साथ हुए व्यवहार से मापी जाती है।
आज सिर्फ़ श्रद्धांजलि देना काफ़ी नहीं है। उनके अधूरे काम को आगे बढ़ाना हर वंचित और पिछड़े व्यक्ति तक शिक्षा, सम्मान और बराबर अवसर पहुँचाना ही शाहू जी महाराज के लिए हमारी असली श्रद्धांजलि होगी।
छत्रपति राजर्षि शाहू जी महाराज को मेरा कोटि कोटि नमन।
बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा आमचुनाव की तैयारियों के मद्देनज़र जब से अपरकास्ट समाज और उसमें से ख़ासकर ब्राह्मण समाज को, उनके बी.एस.पी. में जुड़ने को ध्यान में रखकर, पार्टी का उम्मीदवार बनाना शुरू कर दिया है, तब से सभी विरोधी पार्टियों में व ख़ासकर समाजवादी पार्टी में उनकी नींद उड़ा देने वाली बेचैनी देखने को मिल रही है, जो कि सन् 2007 की तरह ब्राह्मण समाज के योगदान से बी.एस.पी को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जैसा ही इस बार के आगामी चुनाव परिणाम के रिपीट होने की संभावना के तहत् स्वाभाविक ही प्रतीत होता है।
वैसे भी यह सर्वविदित है कि यूपी जैसे विशाल आबादी वाले प्रदेश में अपरकास्ट में से ख़ासकर ’ब्राह्मण समाज का हित बी.एस.पी. में ही सुरक्षित है’, जिस अपनी इस ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त, नीयत व नीति को बहुजन समाज पार्टी ने पहले पार्टी स्तर पर अमल करके और फिर सरकार बनने पर भी उन्हें भरपूर आदर-सम्मान के साथ-साथ उन्हें हर स्तर पर पूरी-पूरी भागीदारी देकर यह साबित भी कर दिया है, जबकि दूसरी पार्टियों की सरकारों में इस वर्ग के लोग पिछले काफी समय से अपने आपको काफी उपेक्षित, असुरक्षित व ठगा हुआ भी महसूस कर रहे हैं।
इतना ही नहीं बल्कि ’ब्राह्मण समाज द्वारा सामाजिक भाईचारा के आधार पर बी.एस.पी. से जुड़ने की इनकी तैयारियों को ध्यान में रखकर इन्हें पार्टी उम्मीदवार बनाने की प्रक्रिया जारी है तथा इन्हें बी.एस.पी. की आयरन लेडी नेतृत्व पर पूरा यह यक़ीन भी है कि बी.एस.पी. की सरकार बनने पर उन्हें पहले की तरह ही हर स्तर पर भरपूर आदर-सम्मान ज़रूर दिया जायेगा, जो कि इनकी वास्तविक चिन्ता व दूसरी पार्टियों से मुँह मोड़ने का कारण है।
इसके साथ ही, अपरकास्ट में से क्षत्रिय, वैश्य आदि व अन्य समाज के लोगों को भी उनकी बी.एस.पी. से जुड़ने की तैयारी अर्थात् ’जिसकी जितनी तैयारी उसकी उतनी भागीदारी’ के आधार पर चुनाव में उम्मीदवार भी ज़रूर बनाया जायेगा, जिसकी तैयारी हर स्तर पर लगातार जारी है।
बी.एस.पी., दूसरी पार्टियों की तरह कुछ लोगों को ’लॉलीपाप’ थमाने की संकीर्ण व स्वार्थ की राजनीति नहीं करती है बल्कि पूरे समाज के हित व कल्याण की चिन्ता करना अपना संवैधानिक कर्तव्य समझती है और इसीलिये बी.एस.पी. की नीति व कार्यक्रम जनहित व जनकल्याण तथा अपराध नियंत्रण व क़ानून व्यवस्था के मामले में भी देश व जनहित में बेहतरीन होते हैं।
यूपी की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेन्टर में आज दोपहर बाद हुई अग्निकाण्ड में अनेक लोगों की मौत तथा और भी कई लोगों के घायल हो जाने की घटना अति-दुखद। इस प्रकार की जानलेवा घटनायें दिल को दहलाने वाली होती हैं तथा कितने ही परिवार की उम्मीदों को बिखेर देती हैं। ऐसी दुखद घटनाओं की रोकथाम के लिये सबको मिलकर सही से काम करने की ज़रूरत है। सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा।
यूपी की राजधानी लखनऊ के पड़ोसी ज़िला हरदोई में एक सरकारी अधिकारी शाहाबाद के एसडीएम श्री सुशील मिश्रा पर सरकारी निरीक्षण के दौरान दबंगों द्वारा ईंट व पत्थर आदि से किया गया जानलेवा हमला तथा उसमें उनके घायल होकर इलाज के लिये अस्पताल में भर्ती होने की ख़बर है, जो दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं बल्कि अति-चिन्ताजनक भी है। ऐसी घटनाओं की रोकथाम ज़रूरी है ताकि सरकारी कार्यों में कथित भ्रष्टाचार के साथ-साथ प्रदेश को अराजक तत्वों से बचाया जा सके। सरकार व्यापक जनहित के मद्देनज़र, इस ओर ज़रूर समुचित ध्यान दे।
जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. देश में ’बहुजन समाज’ व अपरकास्ट समाज के ग़रीब शोषित-पीड़ित व उपेक्षितों द्वारा, उनके संवैधानिक हक़ व न्याय आदि के लिये परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के बताये रास्तों पर चलने वाली ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सच्ची व ईमानदार अम्बेडकरवादी पार्टी है, जो दूसरी पार्टियों की तरह बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के सहारे और उनके इशारे पर नहीं चलती है बल्कि अपने लोगों के ही तन, मन और धन के बलबूते पर चलती है, जो स्वाभाविक तौर पर संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व पूंजीवादी ताक़तों को यह फुटी कौड़ी नहीं सुहाता है और इसी लिये वे समय-समय पर और ख़ासकर चुनाव के नज़दीक आने पर क़िस्म-क़िस्म के हथकण्डे इस्तेमाल करके बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट को तथा उसके आयरनलेडी नेतृत्व को भी बदनाम करने में लगे रहते हैं।
इसी क्रम में मीडिया के एक वर्ग द्वारा दूसरी पार्टियों की चुनावी जुगाड़ आदि पर से लोगों का ध्यान बाँटने तथा उन पर पर्दा डालने के लिये बी.एस.पी. पार्टी उम्मीदवार के चयन को लेकर सवालिया निशान खड़े करते रहते हैं, जबकि बी.एस.पी. को जो भी आर्थिक सहयोग हासिल होता है वह पार्टी उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने पर ही क़ानूनी तौर से ज़्यादातर ख़र्च कर दिया जाता है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है। फिर भी उसको लेकर षडयंत्र के तहत् गुमराह करने वाली तरह-तरह की ग़लत बातें व अफवाहें आदि फैलाना मीडिया को शोभा नहीं देता है।
इसके साथ ही यहाँ यह भी सर्वविदित है कि केवल बी.एस.पी. यूपी स्टेट यूनिट के अध्यक्ष श्री विश्वनाथ पाल ही नहीं बल्कि पार्टी के अन्य सभी छोटे-बड़े पदाधिकारी व कार्यकर्तागण भी इस समय पार्टी संगठन की मज़बूती तथा पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के साथ-साथ आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव हेतु पार्टी उम्मीदवारों की संभावित सूची बनाने तथा उनकी ठोस स्क्रीनिग करने आदि में लगे हुये हैं और पार्टी की उम्मीदवारी को लेकर उनसे मिलने वालों से अन्य बातों के अलावा उनकी सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हैसियत के साथ ही उनके पार्टी के प्रति वफादारी व टिकाऊपन आदि को भाँपने के लिये, कोर्ट में जिरह की तरह, उनसे तरह-तरह के सवाल-जवाब भी करते रहते हैं, जिसकी गहराई में गये बिना ही उसे उसके पूरे फेस वैल्यू पर अन्यथा लेना उचित नहीं है, यह मीडिया से भी अनुरोध है तथा पार्टी के लोगों से भी अपील है कि वे विरेाधी पार्टियों के ऐसे प्रायोजित किसी भी षडयंत्र का शिकार होकर गुमराह ना हों बल्कि अपने मिशन 2027 के लक्ष्य में पूरे जी-जान से लगे रहें, जिस बी.एस.पी ज़िन्दाबाद की आपकी जबरदस्त तैयारी को देखकर ही विरोधियों की नींद काफी उड़ी हुई है। जय भीम जय भारत।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता योगी आदित्यनाथ जी को आज उनके जन्मदिन पर हार्दिक बधाई एवं उनके स्वस्थ्य जीवन व दीर्घायु होने की भी शुभकामनायें।
1. यू.पी. के ग्रेटर नोएडा के जेवर में की गई लगभग 15 वर्ष के गोपाल शर्मा की हत्या अति दुःखद व चिन्ताजनक। सरकार इस घटना की उच्च-स्तरीय जाँच कराये और इसके सभी अभियुक्तों को कड़ी सजा दी जाये।
2. साथ ही कल हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल के गिरने से कई मजदूरों की हुई मौत के प्रकरण को भी सरकार गम्भीरता से लेते हुये मृतकों के आश्रितों को उचित आर्थिक मदद दे तथा घायलों का भी विशेष ध्यान रखा जाये, बी.एस.पी. की यह भी मांग।
यू.पी. के जिला गाजियाबाद में खोड़ा के एक नौजवान युवक सूर्या चौहान की हुई हत्या की घटना अति दुखद व चिन्ताजनक। इस प्रकार की आयदिन हो रही घटनाओं की रोकथाम के लिए शासन व प्रशासन को सही कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही इस घटना में शामिल अपराधियों की पहचान करके उन्हें कानूनी सजा जरूर दी जाए।
इसके साथ ही चुनाव का समय जैसे-जैसे नज़दीक आता जाएगा ऐसी घटनाओं के व्यापक दुष्परिणाम होंगे। अतः सरकार पूरी तरह सतर्क रहे।
दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में जान गँवाने वाले हर व्यक्ति और उनके परिवार के साथ मेरी गहरी संवेदनाएं है। जिन्होंने अपनों को खोया, उनके दुख की कोई भरपाई नहीं लेकिन इतना ज़रूर है कि वे इस घड़ी में अकेले नहीं हैं। पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
मैं जानता हूँ कि कोई भी हादसा पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। लेकिन कुछ हादसे ऐसे होते हैं जिनकी कहानी हम पहले भी सुन चुके होते हैं और यही सबसे तकलीफ़देह बात है। उपहार सिनेमा से लेकर आज तक, दिल्ली ने आग से होने वाली मौतों का यह सिलसिला बार-बार झेला है। हर बार वही सवाल उठते हैं, और हर बार जवाब अधूरे रह जाते हैं।
ईमानदारी से कहूँ तो इन घटनाओं की ज़िम्मेदारी किसी एक पार्टी पर नहीं डाली जा सकती। दिल्ली में बारी-बारी से कांग्रेस, बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने सरकार चलाई है, नगर निगम भी इनके पास रहा है और फिर भी फायर सेफ्टी के बुनियादी नियम लागू करना किसी की प्राथमिकता नहीं बन सका। बिना मंज़ूरी के रेस्टोरेंट चलते रहे, अनाधिकृत निर्माण होते रहे, और जिनकी ज़िम्मेदारी निगरानी की थी, वे कहीं और देखते रहे। यह सिर्फ़ प्रशासन की चूक नहीं है यह उस भरोसे की चूक है जो हर नागरिक अपनी सरकार से करता है।
दिल्ली के लोग सिर्फ़ फ़रियाद नहीं कर रहे वे यह माँग रहे हैं कि अगली बार किसी और परिवार को इस त्रासदी को ना झेलना पड़े। यह माँग बहुत बड़ी नहीं है। यह वही बुनियादी माँग है जिसका हर लोकतंत्र अपने नागरिकों से वादा करता है।
हम मिलकर इसे बदल सकते हैं,पार्टी से ऊपर उठकर, चुनाव से ऊपर उठकर। यही उन परिवारों के प्रति सच्ची संवेदना होगी जिन्होंने आज अपनों को खोया है।
यूपी के जिला मेरठ की सरधना विधानसभा क्षेत्र के ग्राम चिरोड़ी की लगभग 17 वर्षीय बेटी एंव राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी अनुष्का पाल की बदमाशों द्वारा की गई हत्या की खबर अत्यंत दुःखद एंव चिंताजनक है। यह घटना समाज को झकझोर देने वाली है। सरकार इस जघन्य अपराध में शामिल सभी दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करे, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके तथा भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृति न हो।
देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर के एक होटल में आज हुआ भीषण अग्निकाण्ड अति-दुर्भाग्यपूर्ण तथा इसमें काफी लोगों की हुई मौत तथा कई लोगों के घायल होने की भी घटना अत्यन्त ही दुखद। सभी पीड़ित परिवार वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदना।
ऐसी दुखद घटनाओं की रोकथाम पर केन्द्र व दिल्ली सरकार को ज़रूर विशेष ध्यान देना चाहिये ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृति ना हो सके।